कजरी तीज पर भक्तिमय हुआ बलरामपुर, शिवालयों में गूंजे महादेव के जयकारे
बलरामपुर जिले में कजरी तीज पर भक्तों का उत्साह देखने लायक रहा। शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी, जबकि कांवड़ियों ने सिसई घाट से जल...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 14 सितंबर 2026
बलरामपुर जिले में कजरी तीज का पर्व आस्था और भक्ति के अनूठे संगम के साथ मनाया गया। सोमवार को, भोर की पहली किरण के साथ ही, जिले के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। 'हर-हर महादेव' और 'बोलबम' के जयघोष से पूरा वातावरण शिव भक्ति के रंग में रंग गया। इस पावन अवसर पर, सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखते हुए भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना की। कजरी तीज, जिसे कजली तीज के नाम से भी जाना जाता है, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है और यह महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन वे अपने सुहाग की लंबी आयु और परिवार में सुख-शांति की कामना करते हुए व्रत रखती हैं।
राप्ती नदी के सिसई घाट पर सुबह से ही कांवड़ियों का तांता लगा रहा। कांवड़ियों ने पवित्र जल से भरे कलश लेकर राजापुर भरिया जंगल स्थित कल्पेश्वर नाथ महादेव मंदिर की ओर प्रस्थान किया। यात्रा के दौरान कांवड़ियों के बोलबम के जयकारे मार्ग को गुंजायमान करते रहे। मंदिर पहुँचने पर, कांवड़ियों ने श्रद्धापूर्वक कल्पेश्वर नाथ का जलाभिषेक किया। देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन जारी रहा। इसी प्रकार, नगर के झारखंडी मंदिर, रानी तालाब स्थित शिवालय और गन्ना दफ्तर के शिव मंदिर में भी भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। झारखंडी और कल्पेश्वर नाथ मंदिरों में मेले जैसा माहौल था, जहां पूजा सामग्री और प्रसाद की दुकानों पर लोगों की आवाजाही बनी रही। इन मंदिरों में विशेष सजावट भी की गई थी, जिससे उत्सव का माहौल और भी बढ़ गया।
कल्पेश्वर नाथ मंदिर में कल्पेश्वर नाथ का जलाभिषेक
उतरौला मार्ग पर स्थित कल्पेश्वर नाथ मंदिर कजरी तीज के अवसर पर भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। सदर विधायक पलटूराम ने स्वयं पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया। विधायक ने मंदिर परिसर में आयोजित भंडारे में भी भाग लिया और समिति के पदाधिकारियों को उनके सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया। इस पुण्य अवसर पर भाजपा नेता अनन्य गौरव मिश्र, सभासद आनंद गुप्त, मनोज चौरसिया, प्रधान महेश मिश्र और लल्लू चौरसिया सहित अनेक स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों और भक्तों ने श्रद्धालुओं की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दिया। इन गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने स्थानीय प्रशासन और जनमानस के बीच समन्वय को दर्शाया। भक्तों की सेवा के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं भी आगे आईं, जिन्होंने जलपान और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान कीं।
कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने के प्रयास
कांवड़ यात्रा को सुगम और निर्विघ्न संपन्न कराने के उद्देश्य से, नगर पालिका प्रशासन ने सिसई घाट से लेकर राजापुर भरिया जंगल तक विशेष प्रबंध किए थे। यात्रा मार्ग पर विशेष साफ-सफाई का ध्यान रखा गया, चूने का छिड़काव किया गया और प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई। कांवड़ियों की प्यास बुझाने के लिए पानी के टैंकर और शीतल जल की व्यवस्था भी की गई थी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यात्रा के दौरान किसी भी कांवड़िए को असुविधा न हो, स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए थे। कई स्वयंसेवकों ने यात्रा के दौरान कांवड़ियों के साथ चलकर उनका उत्साह बढ़ाया और उन्हें सहयोग प्रदान किया। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए यातायात पुलिस ने भी विशेष व्यवस्थाएं की थीं, ताकि कांवड़िये सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच सकें।
मंदिरों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा
मंदिरों में भीड़ के प्रबंधन के लिए पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई थी, ताकि दर्शन सुगमता से हो सकें। इससे अव्यवस्था फैलने की संभावना कम हो गई और श्रद्धालुओं को शांतिपूर्वक पूजा करने का अवसर मिला। सुरक्षा की दृष्टि से, पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्रमुख शिव मंदिरों, कांवड़ यात्रा के रास्तों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से अपनी पूजा-अर्चना और कांवड़ यात्रा संपन्न कर सकें। पुलिस की मौजूदगी से भक्तों में सुरक्षा की भावना बढ़ी। विभिन्न चौराहों पर पुलिस सहायता केंद्र भी स्थापित किए गए थे, जहां किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल तैयार थे। जिले में कजरी तीज का यह पर्व शांति और उत्साह के माहौल में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसने स्थानीय लोगों के बीच गहरी श्रद्धा और भक्ति की भावना को दर्शाया। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सामुदायिक भावना को भी मजबूत करता है।
