कैलाश मानसरोवर यात्रा दल ग्यारोंग में भीषण बाढ़ से लापता, 80 लोग फंसे
नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्यारोंग में अचानक आई भीषण बाढ़ ने ईशा फाउंडेशन के 80 सदस्यीय कैलाश मानसरोवर यात्रा दल को चपेट में ले लिया है। संपर्क टूटने से यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता बनी हुई है।

द क्लिफ न्यूज़ | 27 अगस्त 2026
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्यारोंग क्षेत्र में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे ईशा फाउंडेशन के एक बड़े दल को संकट में डाल दिया है। यात्रा पूरी कर वापस लौट रहा करीब 80 सदस्यीय दल ग्यारोंग स्थित इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद था, लेकिन अचानक आई बाढ़ के बाद उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया है। इस दल में 77 तीर्थयात्री, तीन स्वयंसेवक और एक डॉक्टर शामिल बताए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह दल कैलाश मानसरोवर की यात्रा संपन्न करने के बाद वापस लौट रहा था। वापसी के दौरान सभी यात्री ग्यारोंग के इमिग्रेशन सेंटर पर पहुंचे थे, जहाँ उन्हें सीमा पार करने से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करनी थीं। इसी दौरान अचानक तेज जलधारा के साथ बाढ़ आ गई। पानी का बहाव इतना तीव्र था कि इमिग्रेशन सेंटर की इमारत भी उसकी चपेट में आ गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
घटना से कुछ समय पहले तक दल के सदस्यों से संपर्क बना हुआ था। सुबह करीब 9:05 बजे समूह की ओर से अंतिम बार संपर्क किया गया था, जिसमें यात्रियों के इमिग्रेशन सेंटर पर पहुंचने की सूचना मिली थी। इसके लगभग नौ मिनट बाद अचानक संपर्क टूट गया और तब से दल के सदस्यों से फोन या किसी अन्य माध्यम से संपर्क स्थापित नहीं हो सका है।
संचार और बचाव में चुनौती
अचानक आई बाढ़ के कारण क्षेत्र में संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। सड़क मार्ग और आसपास के रास्तों के बाधित होने से बचाव दलों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पर्वतीय क्षेत्र में तेज जलधारा के साथ मलबा आने और भूस्खलन की आशंका ने बचाव अभियान को और अधिक कठिन बना दिया है।
ईशा फाउंडेशन की स्थिति
ईशा फाउंडेशन की ओर से अभी तक इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद दल के सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संस्था के अन्य सदस्य स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। लापता यात्रियों की जानकारी जुटाने और उनके संभावित ठिकाने का पता लगाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
इस बीच, ईशा फाउंडेशन के कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए अन्य दलों के अधिकांश यात्री सुरक्षित लौट चुके हैं। संस्था के करीब 495 सदस्य पहले ही सुरक्षित वापस आ चुके हैं। हालांकि, ग्यारोंग में मौजूद 80 सदस्यीय दल का संपर्क टूटना चिंता का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।
सद्गुरु ने व्यक्त की चिंता
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु ने भी इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने लापता यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घटनास्थल तक पहुंच की अनुमति और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।
व्यापक नुकसान और प्रभावित बुनियादी ढाँचा
ग्यारोंग और उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ से व्यापक नुकसान की सूचना है। अचानक बढ़ी जलधारा ने सड़क मार्ग, इमारतों और अन्य बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। कई स्थानों पर मलबा जमा होने के कारण सामान्य आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई है। ऐसे में बचाव दलों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्तों और उपलब्ध संसाधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
परिवारों में चिंता का माहौल
लापता दल में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री शामिल होने के कारण उनके परिवारों में चिंता का माहौल व्याप्त है। परिजन लगातार अपने रिश्तेदारों की सुरक्षित जानकारी मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। संपर्क टूटने के बाद से हर गुजरते समय के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। हालांकि, जब तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आती, तब तक यात्रियों की स्थिति को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
दुर्गम मार्गों पर सुरक्षा की आवश्यकता
कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग हिमालयी क्षेत्र के अत्यंत दुर्गम और संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरता है। यहां मौसम में अचानक बदलाव, भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक घटनाएं यात्रियों के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकती हैं। इस घटना ने एक बार फिर ऐसे दुर्गम तीर्थ मार्गों पर आपातकालीन संचार, प्रभावी मौसम चेतावनी प्रणाली और त्वरित बचाव व्यवस्था की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है।
वर्तमान में राहत और बचाव प्रयासों का मुख्य उद्देश्य ग्यारोंग इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद 80 सदस्यीय दल का पता लगाना और उनकी स्थिति की पुष्टि करना है। स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और ईशा फाउंडेशन के प्रतिनिधि उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर संपर्क और बचाव के प्रयास लगातार जारी रखे हुए हैं। फिलहाल, 80 सदस्यीय दल से संपर्क टूटने की पुष्टि की गई है, लेकिन उनकी सुरक्षित स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। सभी यात्रियों के सुरक्षित मिलने की उम्मीद बनी हुई है।
