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कबाड़ से जुगाड़: डीएवी कॉलेज में छात्रों ने रची अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी चीजें

महोबा के डीएवी इंटर कॉलेज में 'मेरा युवा भारत' के तत्वावधान में स्वच्छता पखवाड़े के तहत 'कबाड़ से जुगाड़' प्रतियोगिता हुई। छात्रों ने बेकार सामान से उपयोगी वस्तुएं बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

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कबाड़ से जुगाड़: डीएवी कॉलेज में छात्रों ने रची अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी चीजें

द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 12 अगस्त 2026

महोबा के डीएवी इंटर कॉलेज में 'मेरा युवा भारत' संगठन के सहयोग से स्वच्छता पखवाड़े के अवसर पर एक अनूठी 'कबाड़ से जुगाड़' प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वच्छता, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और पर्यावरण संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना था। यह पहल विशेष रूप से युवा पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करने के लिए की गई थी।

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगणों के साथ-साथ 'मेरा युवा भारत' के स्वयंसेवक आयुष चौरसिया, धर्मेंद्र सेन, संगम द्विवेदी और प्रशांत चौरसिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को कबाड़ में पड़ी अनुपयोगी वस्तुओं से मूल्यवान और उपयोगी सामग्री तैयार करने की कला सिखाई गई। यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका लक्ष्य समाज में स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देना है।

रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का संगम

प्रतियोगिता के दौरान, छात्र-छात्राओं ने अपनी कल्पना और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया। उन्होंने पुराने और बेकार पड़े सामानों, जैसे प्लास्टिक की बोतलों, गत्ते के डिब्बों, अनुपयोगी धातुओं और अन्य सामग्री का उपयोग करके विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुएं बनाईं। इन कृतियों में पुन: उपयोग किए गए सामग्री से कलाकृतियाँ, खिलौने, उपयोगी घरेलू सामान और सजावटी वस्तुएँ शामिल थीं। इन कृतियों ने न केवल उनकी रचनात्मक प्रतिभा को उजागर किया, बल्कि पर्यावरण को स्वच्छ रखने और संसाधनों के पुन: उपयोग का एक सशक्त संदेश भी दिया। विद्यार्थियों ने यह दर्शाया कि किस प्रकार थोड़ी सी कल्पना और मेहनत से हम अपने आसपास के कचरे को कम कर सकते हैं और उसे उपयोगी बना सकते हैं।

कबाड़ से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण

छात्रों द्वारा बनाई गई वस्तुओं में पुरानी बोतलों से गमले, गत्ते के डिब्बों से स्टेशनरी होल्डर, टूटे हुए खिलौनों से नई कलाकृतियाँ और अन्य बेकार सामग्री से मॉडल शामिल थे। इन परियोजनाओं के माध्यम से, विद्यार्थियों ने सीखा कि कैसे अनुपयोगी वस्तुएं भी रचनात्मकता के स्पर्श से जीवन में वापस आ सकती हैं। यह प्रक्रिया उन्हें न केवल कचरा प्रबंधन के महत्व को समझाने में सहायक हुई, बल्कि उन्हें यह भी सिखाया कि कैसे वे अपने दैनिक जीवन में पुनर्चक्रण को अपना सकते हैं। इस तरह की गतिविधियों से उनमें नवाचार की भावना भी विकसित होती है, जो भविष्य में उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकती है।

प्रतिभागियों को प्रोत्साहन और संकल्प

प्रतियोगिता में मोहम्मद अलसैफ ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा के बल पर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिन्होंने प्लास्टिक की बोतलों और अन्य पुनर्चक्रित सामग्री से एक आकर्षक मॉडल प्रस्तुत किया। सक्षम चौरसिया को द्वितीय स्थान से सम्मानित किया गया, जिन्होंने पुराने गत्ते के डिब्बों और कागजों का उपयोग करके एक उपयोगी स्टेशनरी आयोजक बनाया। धर्मेंद्र कुशवाहा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जिनकी रचनात्मकता ने उन्हें बेकार धातु के टुकड़ों से एक अनूठी कलाकृति बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों को स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्हें यह भी समझाया गया कि कैसे उनकी छोटी-छोटी कोशिशें भी एक बड़े सकारात्मक बदलाव का कारण बन सकती हैं।

कार्यक्रम के समापन पर, सभी उपस्थित लोगों ने 'स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत' के संकल्प को दोहराया और एक स्वच्छ समाज के निर्माण में अपना योगदान देने का आह्वान किया। यह प्रतियोगिता 'मेरा युवा भारत' संगठन द्वारा आयोजित एक सफल पहल थी, जिसने युवाओं को पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस प्रकार की पहलें युवाओं को जिम्मेदार नागरिक बनाने और पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे वे एक स्वस्थ और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकें।