JPSC-JSSC परीक्षा विवाद: झारखंड में छात्र आंदोलन जारी, मंत्रियों से वार्ता सकारात्मक
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन तेज हो गया है। शनिवार को हुई मंत्रियों के पैनल से वार्ता सकारात्मक रही, लेकिन छात्रों ने ठोस कार्रवाई के अभाव में धरना जारी रखने की घोषणा की है।

द क्लिफ न्यूज़ | रांची | 7 अगस्त 2026
झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन ने जोर पकड़ लिया है। राजधानी रांची में आंदोलनरत छात्र संगठनों और राज्य सरकार के बीच शनिवार को पहले दौर की औपचारिक वार्ता हुई, जिसमें सरकार की ओर से गठित चार मंत्रियों के पैनल ने छात्र प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की। दोनों पक्षों ने बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राज्य सरकार की ओर से गठित मंत्री समूह में चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू (दोनों झामुमो), दीपिका पांडेय सिंह (कांग्रेस) और संजय प्रसाद यादव (राजद) शामिल थे। मंत्रियों ने लगभग 10-11 सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों को धैर्यपूर्वक सुना और उन्हें सरकार के समक्ष रखने का भरोसा दिलाया।
छात्रों की प्रमुख मांगें और अनिश्चितकालीन धरना
वार्ता के बाद छात्र प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे रवीन्द्र पासवान ने बताया कि बातचीत का माहौल सकारात्मक रहा, लेकिन केवल मौखिक आश्वासन स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्र वर्षों से एक पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं और अब ठोस निर्णयों का इंतजार करेंगे। जब तक सरकार लिखित रूप में स्पष्ट कार्रवाई का आश्वासन नहीं देती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने, परीक्षा की OMR शीट सार्वजनिक करने, पूरी चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। उनका मानना है कि पारदर्शिता की कमी से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है।
राजनीतिक रंगत और विपक्ष का दबाव
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड की राजनीति का भी एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। विधानसभा के मानसून सत्र में विपक्ष ने इस मामले को पुरजोर तरीके से उठाया और सरकार पर भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बरतने में विफलता का आरोप लगाया। विपक्ष लगातार मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।
सरकार का आश्वासन और आगे की राह
सरकार ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए भरोसा दिलाया है कि सभी मांगों और सुझावों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, इस वार्ता के बाद भी सरकार की ओर से किसी भी मांग पर अंतिम फैसला अभी घोषित नहीं किया गया है। इसी बीच, छात्र संगठनों ने अपना धरना और प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते और उनकी मांगों पर स्पष्ट एवं लिखित निर्णय नहीं आता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच एक और दौर की वार्ता होने की संभावना है।
