जिलाधिकारी ने की उच्च मूल्य के विलेखों की स्थलीय जांच, राजस्व चोरी पर सख्ती के निर्देश
बलरामपुर जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने स्टाम्प एवं पंजीकरण में पारदर्शिता लाने के लिए उच्च मूल्य के विलेखों का स्थलीय निरीक्षण कर राजस्व चोरी रोकने के निर्देश दिए।

द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 25 अगस्त 2026
बलरामपुर के जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने जिले में स्टाम्प एवं पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कर चोरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उच्च मूल्य के विलेखों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सदर उपनिबंधक कार्यालय से संबंधित अर्द्धनगरीय क्षेत्र के ग्राम महादेव मिश्र में दो उच्च मूल्य के पंजीकृत विलेखों की जांच की। लेखपत्र संख्या-6395/2026, जिसकी मालियत ₹3,21,57,000 है और संपत्ति की प्रकृति आवासीय दर्ज है, का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इसके अतिरिक्त, लेखपत्र संख्या-6396/2026, जिसकी मालियत ₹10,27,02,000 है, का भी निरीक्षण किया गया। इस संपत्ति पर इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप और एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स स्थित है। जिलाधिकारी ने अभिलेखों में दर्ज विवरण और संपत्ति के वास्तविक उपयोग का मिलान करते हुए इसके लगे नगरीय क्षेत्र के रिहायशी मकान का भी अवलोकन किया।
संपत्ति की वास्तविक स्थिति का जायजा
निरीक्षण के क्रम में, जिलाधिकारी ने नगरीय क्षेत्र के मोहल्ला अचलापुर, सिविल लाइन स्थित एक अन्य संपत्ति का भी स्थलीय निरीक्षण किया। यह लेखपत्र संख्या-5995/2026 के तहत पंजीकृत है, जिसकी मालियत ₹4,73,83,000 है। इस संपत्ति में एक दो मंजिला रिहायशी मकान और खाली भूमि शामिल है। जिलाधिकारी ने मौके की स्थिति का अवलोकन किया और संबंधित अभिलेखों एवं संपत्ति के वास्तविक स्वरूप के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
करापवंचन पर प्रभावी अंकुश के निर्देश
जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि बड़े मूल्य के विलेखों की नियमित रूप से स्थलीय जांच सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संपत्ति की वास्तविक प्रकृति और उपयोग के अनुरूप ही उचित स्टाम्प शुल्क का निर्धारण हो सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजीकरण प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता रखी जाए और शासन के राजस्व हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी प्रकरण में स्टाम्प शुल्क में कमी, संपत्ति के वास्तविक स्वरूप और अभिलेखों में दर्ज विवरण में अंतर, या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता से राजस्व क्षति का मामला सामने आता है, तो संबंधित प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग के अधिकारियों को उच्च मूल्य की संपत्तियों और विलेखों की सतत निगरानी तथा नियमित जांच के माध्यम से करापवंचन पर प्रभावी अंकुश लगाने और शासकीय राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान एआईजी स्टाम्प सुनील कुमार और अन्य संबंधित अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
