जिला जेल में बंदियों को विधिक जागरूकता से कराया गया अधिकारों से अवगत
दमोह जिला जेल में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें प्रधान जिला न्यायाधीश ने बंदियों को मौलिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के संबंध में...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: अनिल राठौर
द क्लिफ न्यूज़ | दमोह | 14 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार दमोह जिला जेल में एक महत्वपूर्ण विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति शिक्षित करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष सुभाष सोलंकी ने की।
कार्यक्रम के दौरान, प्रधान जिला न्यायाधीश सुभाष सोलंकी ने बंदियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि जेल में रहने के बावजूद उनके मौलिक अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि प्रत्येक बंदी को जेल नियमावली के तहत अपने धर्म का पालन करने की पूर्ण स्वतंत्रता है। वे अपनी आस्था के अनुसार पूजा, प्रार्थना या इबादत कर सकते हैं और धर्म ग्रंथ भी अपने पास रख सकते हैं। न्यायाधीश सोलंकी ने बंदियों से वर्तमान परिस्थितियों से सीख लेकर भविष्य में अपराधों से दूर रहने का संकल्प लेने का आग्रह भी किया।
कानूनी सहायता और नशे से मुक्ति पर परामर्श
कार्यक्रम में सिविल जज वरिष्ठ खंड उषाकांता कृषाण ने नशे की लत से प्रभावित बंदियों को सलाह दी कि वे जेल से रिहा होने के बाद भी इस बुराई से दूर रहें। उन्होंने उन बंदियों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान किया जो न्यायालय द्वारा दंडित होने के बाद कानूनी अपील करना चाहते हैं। ऐसे बंदी जेलर के माध्यम से विधिक सहायता कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं, ताकि उनकी अपील निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जा सके।
विधिक सहायता योजनाओं की जानकारी
विधिक सहायता अधिकारी रजनीश चौरसिया ने उपस्थित बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता योजना, अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी और लोक अदालत की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने इन योजनाओं के लाभों और प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के समापन पर, बंदियों द्वारा पूछे गए विभिन्न सवालों का समाधान किया गया। जेल अधीक्षक एम.एल. पटैल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया। इस प्रकार के आयोजन बंदियों को समाज की मुख्य धारा से जुड़ने और पुनः अपराध न करने के लिए प्रेरित करने में सहायक सिद्ध होते हैं।
