जीआरपी की त्वरित कार्रवाई: 11 दिन में मिली परित्यक्त, 48 घंटे में अपहृत बच्ची
मध्यप्रदेश जीआरपी ने दो अलग-अलग घटनाओं में एक माह की परित्यक्त बच्ची को 11 दिन में परिजनों तक पहुंचाया और 8 माह की अपहृत बच्ची को 48 घंटे में सकुशल दस्तयाब किया।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 22 जुलाई 2026
मध्यप्रदेश की शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने रेल यात्रियों और बच्चों की सुरक्षा के प्रति अपनी संवेदनशीलता का एक बार फिर उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 'देशभक्ति-जनसेवा' के मूल मंत्र का पालन करते हुए जीआरपी ने दो अलग-अलग घटनाओं में दो मासूम बच्चियों को न केवल सुरक्षित बचाया, बल्कि उन्हें उनके परिवारों से मिलाने में भी सफलता हासिल की है। इन कार्रवाइयों ने साबित किया है कि जीआरपी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ हर जरूरतमंद की मदद के लिए तत्पर है।
भोपाल जीआरपी ने 'ऑपरेशन हमदर्द' के तहत एक माह की परित्यक्त बच्ची को मात्र 11 दिनों के भीतर उसके परिजनों के सुपुर्द किया। 10 जुलाई को भोपाल रेलवे स्टेशन के ऑटो स्टैंड पर इस लावारिस बच्ची के मिलने की सूचना मिलते ही जीआरपी ने तत्काल उसे संरक्षण में लिया, चिकित्सकीय परीक्षण कराया और शिशु गृह में सुरक्षित रखा। इसके बाद, बच्ची के माता-पिता की पहचान के लिए एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने रेलवे स्टेशनों और शहर के सीसीटीवी फुटेज का गहन विश्लेषण किया, विभिन्न राज्यों में सूचना का आदान-प्रदान किया और सोशल मीडिया व स्थानीय स्तर पर व्यापक तलाश अभियान चलाया। 11 दिनों के अथक प्रयासों के बाद, बच्ची के माता-पिता की पहचान कर उन्हें चिन्हित किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि आर्थिक तंगी के कारण बच्ची को रेलवे स्टेशन पर छोड़ दिया गया था। इस मामले में विधिक कार्रवाई जारी है।
अपहृत बच्ची की 48 घंटे में सकुशल वापसी
वहीं, बीना जीआरपी ने एक 8 माह की बच्ची को, जो अपनी मां से बिछड़कर अपहृत हो गई थी, मात्र 48 घंटे के भीतर सकुशल दस्तयाब करने में सफलता प्राप्त की है। अपराध दर्ज होते ही बीना जीआरपी ने एक विशेष जांच दल गठित किया। दल ने बीना, भोपाल, रानी कमलापति, इटारसी, नर्मदापुरम और झांसी सहित विभिन्न रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से परीक्षण किया। तकनीकी साक्ष्यों और निरंतर फील्ड कार्रवाई के आधार पर, इटारसी रेलवे स्टेशन से आरोपित महिला को चिन्हित किया गया और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। इस कार्रवाई में जीआरपी और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीच प्रभावी समन्वय भी देखने को मिला, जिसने बच्ची की त्वरित वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दोनों ही प्रकरणों में जीआरपी के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अत्यंत संवेदनशील, मानवीय और पेशेवर दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई की। आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी विश्लेषण, अंतर-जिला समन्वय और सतत फील्ड कार्यवाही जैसे माध्यमों से दोनों बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई। यह सफलता मध्यप्रदेश पुलिस की संवेदनशील, उत्तरदायी और जन-केंद्रित पुलिसिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो राज्य में कानून व्यवस्था के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
