झारखंड में 3 JPSC परीक्षाएं रद्द, छात्रों का आंदोलन जारी
छात्रों के विरोध के बीच झारखंड सरकार ने 14वीं JPSC PT समेत तीन परीक्षाएं रद्द कीं। TDPL की उच्चस्तरीय जांच के आदेश। JSSC-CGL रद्द करने की मांग पर छात्र अड़े।

द क्लिफ न्यूज़ | रांची | 12 अगस्त 2026
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान घोषणा की है कि 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा (PT) सहित कुल तीन परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। इस फैसले में वर्ष 2023 और 2025 की दो बैकलॉग JPSC परीक्षाएं भी शामिल हैं। सरकार के इस कदम से परीक्षाओं की शुचिता और व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच छात्रों को आंशिक राहत मिली है, हालांकि उनका आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया गया है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 और 2025 में आयोजित होने वाली दो बैकलॉग JPSC परीक्षाएं भी निरस्त कर दी गई हैं। इन रद्द की गई परीक्षाओं में शामिल हुए अभ्यर्थियों के लिए आगे की प्रक्रिया राज्य सरकार और JPSC द्वारा तय की जाएगी। यह उम्मीद जताई जा रही है कि परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की नई प्रक्रिया और समय-सारणी जल्द ही जारी की जाएगी।
परीक्षा एजेंसी TDPL की होगी उच्चस्तरीय जांच
परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाली एजेंसी TDPL की कार्यप्रणाली भी अब गहन जांच के दायरे में आ गई है। सरकार ने TDPL की भूमिका और परीक्षा संचालन से संबंधित पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी किए हैं। इस जांच का उद्देश्य यह पड़ताल करना है कि परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्रों की व्यवस्था और परीक्षा संचालन में एजेंसी के स्तर पर कोई अनियमितता तो नहीं हुई है। सरकार का लक्ष्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और किसी भी तरह की गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, JPSC के तीन सदस्यों के इस्तीफे की भी चर्चा है, जिसने आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से ही संदेह पैदा कर दिया था। परीक्षा रद्द होने और आयोग के सदस्यों से जुड़े घटनाक्रम ने JPSC की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में, अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करना सरकार और आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी।
JSSC-CGL को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी
हालांकि सरकार ने तीन JPSC परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है, लेकिन छात्र संगठन इस फैसले से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उनका आंदोलन अभी भी जारी है और वे JSSC-CGL (संयुक्त स्नातक स्तरीय) परीक्षा को भी रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, छात्र पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच की मांग पर भी अड़े हुए हैं। संगठनों का तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं का सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ता है, इसलिए इन मामलों में विभागीय जांच के बजाय एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए ताकि उसकी निष्पक्षता पर कोई संदेह न रहे।
छात्र संगठनों का आरोप है कि परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के कारण योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि अपात्र लोग अनुचित लाभ प्राप्त कर लेते हैं। उनका कहना है कि जब तक JSSC-CGL परीक्षा रद्द नहीं होती और सीबीआई जांच शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की चुनौती
JPSC की तीन परीक्षाओं को रद्द करने का सरकारी निर्णय, छात्रों के बढ़ते दबाव और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ है। अब सरकार के सामने एक दोहरी चुनौती है: एक तरफ, आंदोलन कर रहे छात्रों की जायज मांगों को पूरा करना और दूसरी ओर, भविष्य में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और विवादों से मुक्त तरीके से आयोजित कराना। TDPL की जांच के नतीजों पर भी छात्र और अभ्यर्थी बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि इससे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा तय होगी।
सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद, JSSC-CGL परीक्षा को लेकर आंदोलनकारी संगठनों का रुख आने वाले दिनों में राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
अभ्यर्थियों की नजर अब अगली कार्रवाई पर
तीन JPSC परीक्षाओं के रद्द होने के फैसले से हजारों अभ्यर्थियों के सामने एक बार फिर से तैयारी का दबाव आ गया है। उनके मन में नई परीक्षा की प्रक्रिया, उसके आयोजन की तारीखों और व्यवस्थाओं को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में, अभ्यर्थी सरकार और JPSC से स्पष्ट दिशा-निर्देश, परीक्षा की नई तारीखों का निर्धारण और एक पारदर्शी परीक्षा प्रणाली स्थापित करने की अपेक्षा कर रहे हैं।
फिलहाल, सरकार के इस निर्णय ने JPSC परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद में एक बड़ा मोड़ ला दिया है। हालांकि, JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और सीबीआई जांच की छात्रों की मांग के चलते, झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं का मुद्दा अभी शांत होने की संभावना कम है। यह देखना होगा कि सरकार छात्रों के आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांगों पर क्या और कब कार्रवाई करती है।
