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झांसी के डेली गांव को मिली नई पहचान, एकता परिषद ने किया विकास का शुभारंभ

झांसी के डेली गांव में शबरी माता मंदिर और भाई जी बाल मंदिर विद्यालय का उद्घाटन हुआ। दो दशक के संघर्ष के बाद 'भाई जी...

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•संवाददाता: दिनेश सिकरवार
झांसी के डेली गांव को मिली नई पहचान, एकता परिषद ने किया विकास का शुभारंभ

jhansi uttar pradesh | संवाददाता: दिनेश सिकरवार

द क्लिफ न्यूज़ | झांसी | 9 अक्टूबर 2026

बुंदेलखंड की धरती पर सहरिया आदिवासी समुदाय के उत्थान और सामाजिक परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण घटना 8 अक्टूबर 2026 को झांसी जिले के डेली गांव में घटी। यहां सहरिया आदिवासियों के लिए दशकों से चलाए जा रहे गांधीवादी संघर्षों के प्रतीक के रूप में शबरी माता मंदिर का उद्घाटन किया गया। इसी के साथ, स्वर्गीय डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाई जी’ की स्मृति में भाई जी बाल मंदिर विद्यालय का भी शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर, गांव को अब 'भाई जी पुरा' के नाम से एक नई पहचान दी गई है, जो जल, जंगल और जमीन के अधिकारों के लिए हुए अहिंसक आंदोलनों की सफलता का प्रमाण है।

एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी. व्ही. ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में किया। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि दो दशक पूर्व यह वही डेली गांव था जहां सहरिया आदिवासी समुदाय के लोग झोपड़ियों में निवास करते थे और पत्थर तोड़कर अपनी आजीविका चलाते थे। आज, संगठन द्वारा चलाए गए अभियानों और समुदाय की एकता के फलस्वरूप, कई परिवारों के पास अपने स्वयं के मकान हैं और बच्चे शिक्षा की ओर अग्रसर हैं। राजगोपाल पी. व्ही. ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस बदलाव की यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है, और युवाओं के कौशल विकास तथा उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करना एकता परिषद की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

आगे की योजनाओं पर विशेष जोर

एकता परिषद के राष्ट्रीय समन्वयक राकेश दीक्षित ने भविष्य की कार्ययोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गांवों में स्थायी और वास्तविक बदलाव लाने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए। इस दिशा में, झांसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 21 गांवों का एक विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य उन वंचित परिवारों की पहचान करना होगा जिन्हें रोजगार और कौशल विकास के अवसरों की आवश्यकता है, ताकि उन्हें उपयुक्त सरकारी लाभों से जोड़ा जा सके। राकेश दीक्षित ने यह भी बताया कि निरंतर संवाद और प्रयासों के माध्यम से, इन गांवों में केसरी बाई और रानी सहरिया जैसे स्थानीय नेतृत्व विकसित हुए हैं। यह स्थानीय नेतृत्व अब ग्रामीणों की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

आजीविका और खदानों से प्रभावित भूमि पर ग्रामीणों ने रखी बात

कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रीय संयोजक अनीस भाई की गरिमामयी उपस्थिति ने संगठन के संकल्पों को और अधिक बल प्रदान किया। ग्रामीणों ने इस अवसर पर अपनी दैनिक आजीविका से जुड़ी समस्याओं के साथ-साथ खदानों से प्रभावित भूमि के मुद्दों को भी मंच पर साझा किया। एकता परिषद की यह पहल सहरिया आदिवासियों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। संगठन अब सरकारी योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन और प्रशासनिक अमले के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए, इन समुदायों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने का प्रयास कर रहा है।

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