जयशंकर ने अफ्रीकी मिशन प्रमुखों के साथ साझा किया भारत-अफ्रीका सहयोग का रोडमैप
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 'अफ्रीका दिवस 2026' समारोह में अफ्रीकी मिशन प्रमुखों से मुलाकात कर रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को प्रगाढ़ बनाने पर जोर दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 6 अगस्त 2026
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'अफ्रीका दिवस 2026' समारोह में भाग लिया, जहाँ उन्होंने भारत में तैनात अफ्रीकी मिशन प्रमुखों और राजनयिक समुदाय के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ भविष्य के सहयोग का एक विस्तृत रोडमैप साझा किया। इस महत्वपूर्ण बैठक का प्राथमिक उद्देश्य भारत और पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को और अधिक मजबूत तथा गहरा बनाना था।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने दोनों पक्षों के बीच स्थापित मजबूत वैचारिक और ऐतिहासिक संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अफ्रीका के बीच संबंध केवल राजनयिक या आर्थिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक जुड़ाव, सांस्कृतिक समानता और उपनिवेशवाद के खिलाफ साझा संघर्षों की विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए दोनों पक्षों का सामूहिक संघर्ष आज वैश्विक मंच पर एक अटूट और भरोसेमंद साझेदारी के रूप में विकसित हो चुका है।
व्यापार और निवेश में सशक्त साझेदारी
डॉ. जयशंकर ने भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के बढ़ते आंकड़ों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत आज अफ्रीका के सबसे बड़े व्यापार और निवेश भागीदारों में से एक है। आँकड़ों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 93 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है, जबकि अफ्रीका में भारत का संचयी निवेश 80 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है। विदेश मंत्री ने अफ्रीका महाद्वीप की युवा आबादी और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों को परिवर्तन की दहलीज पर खड़े होने की संज्ञा दी, जिसे वे भारत की नवाचार-आधारित विकास यात्रा का पूरक मानते हैं।
समावेशी विकास और ऋण सहायता
विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अफ्रीका के साथ समावेशी और मांग-आधारित विकास सहयोग को प्राथमिकता देता है, जिसका उद्देश्य स्थानीय क्षमताओं को बढ़ाना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को पूरा करना है। इस दिशा में, उन्होंने घोषणा की कि भारत सरकार ने अफ्रीका के 40 से अधिक देशों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 10 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की 190 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (एलओसी) प्रदान की हैं। अब तक, 4.5 अरब डॉलर मूल्य की 220 से अधिक परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं, और कई अन्य विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
खाद्य सुरक्षा और मानवीय सहायता पर ध्यान
‘ग्लोबल साउथ’ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, जयशंकर ने कहा कि ऐसे समय में जब वैश्विक संघर्षों का प्रभाव विकासशील देशों पर तेजी से बढ़ रहा है, भारत-अफ्रीका साझेदारी खाद्य सुरक्षा पर भी केंद्रित है। उन्होंने हाल के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए बताया कि बुर्किना फ़ासो, मोज़ाम्बिक, लेसोथो, नामीबिया, ज़ाम्बिया, ज़िम्बाब्वे, नाइजीरिया, बोत्सवाना और सिएरा लियोन जैसे देशों को अनाज की आपूर्ति की गई है। उन्होंने मोटे अनाज (मिलेट) के उत्पादन को पुनर्जीवित करने के भारत के अनुभव को अफ्रीकी देशों के लिए अत्यधिक उपयोगी बताया। इसके अलावा, एकजुटता के प्रतीक के रूप में, पिछले पाँच वर्षों में 25 से अधिक अफ्रीकी देशों को दवाएं, टीके, चिकित्सा उपकरण और आपदा राहत सामग्री भेजी गई है।
