जावद गौशाला में 6 गोवंश की मौत: प्रशासनिक लापरवाही या राजनीतिक षड्यंत्र?
जावद की कबीर मठ गौशाला में एक सप्ताह में 6 गोवंश की मौत से आक्रोश। कांग्रेस ने कहा 'प्रशासनिक हत्या', अध्यक्ष ने बताया 'राजनीतिक दुष्प्रचार'। एसडीएम ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।

द क्लिफ न्यूज़ | नीमच | 5 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के जावद में नगर परिषद द्वारा संचालित 'श्री कबीर मठ गौशाला' से एक अत्यंत गंभीर और हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ पिछले एक सप्ताह के भीतर छह गोवंश की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना ने जहां स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त कर दिया है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी गरमागरमी तेज हो गई है। एक ओर जहां सत्ताधारी दल गौ-संरक्षण के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार तंत्र की कथित संवेदनहीनता ने मूक पशुओं की जान पर संकट ला दिया है।
पिछले सात दिनों में छह गोवंश की मौत की पुष्टि हुई है। हाल के पांच दिनों में जहां चार गायों की मौत हुई, वहीं बीते दिन दो और गायों के अवसान ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। नागरिकों का आरोप है कि यह मौतें चारे-पानी की कमी और उचित प्रबंधन के अभाव के कारण हुई हैं, जो प्रशासनिक लापरवाही की ओर स्पष्ट इशारा करता है।
भव्य शुभारंभ और 'घर-घर रोटी' अभियान का सच
यह कबीर मठ गौशाला 3 अक्टूबर 2022 को बड़े ही भव्य समारोह के साथ शुरू की गई थी। इसके शिलालेख पर तत्कालीन कैबिनेट मंत्री और वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, सांसद सुधीर गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष सज्जन सिंह चौहान, तत्कालीन भाजपा जिला अध्यक्ष पवन पाटीदार, जनपद अध्यक्ष गोपाल चारण और नगर परिषद अध्यक्ष सोहनलाल माली जैसे कई प्रतिष्ठित नेताओं के नाम अंकित हैं। इस लोकार्पण के अवसर पर, नगर परिषद अध्यक्ष सोहन माली ने 'घर-घर रोटी' अभियान की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य गायों के लिए भोजन एकत्र करना था। हालांकि, शुरुआत में इस अभियान को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और इसने अखबारों में सुर्खियां बटोरीं, लेकिन कुछ ही दिनों में यह अभियान पूरी तरह ठंडा पड़ गया और गोवंश को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
कांग्रेस का तीखा प्रहार: 'यह प्रशासनिक हत्या है'
इस संवेदनशील मुद्दे पर जावद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रकाश राका ने गहरा अफसोस जताते हुए सत्ताधारी दल और प्रशासन पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस घटना को 'प्रशासनिक लापरवाही और क्रूरता के कारण हुई सीधे तौर पर हत्याएं' करार दिया। प्रकाश राका ने सवाल उठाया कि जब सरकार गौ-सेवा के नाम पर भारी बजट स्वीकृत करती है, तो कबीर मठ गौशाला में गायें चारे और पानी के लिए क्यों तरस रही हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है और पूछा कि आखिर यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है।
प्रशासन का आश्वासन: पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जावद के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) संजीव साहू ने तुरंत कार्रवाई की है। एसडीएम साहू ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन गोवंश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने पशु चिकित्सा विभाग की टीम को विस्तृत जांच और मेडिकल परीक्षण के निर्देश दिए हैं। साहू ने कहा कि गायों की मौत का वास्तविक कारण विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। उन्होंने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का आश्वासन दिया और कहा कि यदि प्रबंधन की ओर से किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। उनका मुख्य उद्देश्य गौशाला में सभी गोवंश को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण प्रदान करना है।
नगर परिषद अध्यक्ष का बचाव: 'गौ-सेवा मेरा संकल्प, सामग्री की कमी नहीं'
वहीं, नगर परिषद अध्यक्ष सोहन माली ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए गौशाला के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गौशाला में गायों की देखभाल और सेवा के लिए आवश्यक सामग्री, जैसे चारा, पानी और पोषण सामग्री, की कोई कमी नहीं है। माली के अनुसार, कुछ गायों की मृत्यु सामान्य या गंभीर बीमारियों के कारण हुई है, और विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर दुष्प्रचार कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गौमाता की निस्वार्थ सेवा करना उनका प्राथमिक लक्ष्य और संकल्प है, और वे हर गोवंश को बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं।
