जातिगत पहचान वाली बस्तियों का नामकरण अब संतों के नाम पर होगा: कटनी निगम
कटनी नगर निगम परिषद ने जातिगत नामों से जानी जाने वाली बस्तियों का नाम महान संतों के नाम पर रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि और महर्षि सुदर्शन नगर जैसे नाम दिए गए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | कटनी | 23 जुलाई 2026
कटनी नगर पालिक निगम परिषद ने सामाजिक समरसता और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। निगम परिषद ने जातिगत नामों से पहचानी जाने वाली बस्तियों का नामकरण भारत के महान संतों के नाम पर करने की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय का उद्देश्य समाज में सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करना और सभी वर्गों के बीच समानता की भावना को बढ़ावा देना है।
निगम परिषद की 15 अप्रैल 2026 को हुई बैठक में पारित प्रस्ताव के तहत, वीर सावरकर वार्ड क्रमांक 12 की अनुसूचित वर्ग बस्ती का नाम बदलकर 'संत रविदास नगर' किया गया है। इसी प्रकार, रामनिवास सिंह वार्ड की सफाई मित्रों की बस्ती को 'महर्षि वाल्मीकि नगर' तथा महात्मा गांधी वार्ड की हरिजन बस्ती को 'महर्षि सुदर्शन नगर' के नाम से जाना जाएगा।
नामकरण समरसता और सम्मान का प्रतीक
निगम अध्यक्ष मनीष पाठक ने इस निर्णय को केवल नाम परिवर्तन न बताकर सामाजिक चेतना, सम्मान और समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत के महान संतों ने अपने जीवन से समानता, मानवता और सेवा का अनमोल संदेश दिया है। इन बस्तियों को उनके नाम से पहचान मिलना प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है और यह आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करेगा।
श्री पाठक ने जोर देकर कहा कि नगर निगम कटनी सामाजिक सौहार्द, समान अवसर और सभी वर्गों के सम्मान के लिए निरंतर प्रयासरत है। परिषद का यह निर्णय सामाजिक एकता को और अधिक मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य समाज को जातिगत पहचान से ऊपर उठाकर महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ना है।
तत्काल प्रभाव से लागू होगी कार्रवाई
नगर निगम प्रशासन ने संबंधित बस्तियों में नवीन नामों की नामपट्टिकाएं स्थापित करने की कार्यवाही शुरू कर दी है। साथ ही, सरकारी अभिलेखों में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है, ताकि नए नाम विधिवत रूप से दर्ज हो सकें। यह पहल कटनी में सामाजिक समरसता की भावना को और अधिक गहरा करने की उम्मीद है।
