जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का सवाल: 'ओबीसी सूची के बिना हो रही गणना, सरकार की नीयत साफ नहीं'
कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के वर्तमान प्रारूप पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी का आरोप है कि ओबीसी वर्ग के लिए ड्रॉपडाउन सूची न होने से गणना दोषपूर्ण है और सरकार की नीयत साफ नहीं है।

संवाददाता: शशि भूषण दूबे कंचनीय यूपी स्टेट ब्यूरो प्रमुख लखनऊ
द क्लिफ न्यूज़ | लखनऊ | 5 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर गहरी चिंता व्यक्त की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिंद ने कहा कि जातिगत जनगणना में मूलभूत कमियां हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की मंशा पर सवाल उठाती हैं। कांग्रेस की मांग है कि तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों में अपनाई गई पद्धति के अनुसार, जातियों की प्रमाणित सूची (ड्रॉपडाउन सूची) के आधार पर एक नई और पारदर्शी प्रश्नावली तैयार कर राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना कराई जाए।
डॉ. जयहिंद ने स्पष्ट किया कि मौजूदा प्रारूप में 'ओपन-एंडेड' (खुला प्रारूप) प्रश्न शामिल हैं, जो जातिगत जनगणना को अव्यवहारिक बनाते हैं। उन्होंने बताया कि ओपन-एंडेड प्रश्नों में कोई पूर्वनिर्धारित सूची नहीं होती, जिससे गणनाकारों द्वारा नागरिक की बताई गई जाति या उपजाति को हूबहू दर्ज किया जाता है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में, जहाँ एक ही जाति के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नाम, उपजातियां और बोलियां हैं, इस पद्धति से लाखों नाम दर्ज हो जाएंगे, जिससे आंकड़ों में बड़ी विसंगतियां उत्पन्न होंगी और पूरी प्रक्रिया अनुपयोगी हो जाएगी।
ओबीसी की आबादी पर पड़ सकता है असर
कांग्रेस के अनुसार, वर्तमान प्रारूप में 'पिछड़ा वर्ग' शब्द तक शामिल नहीं है, जो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अति पिछड़े वर्ग (ईबीसी) की आबादी के सटीक आंकड़े सामने आने में बाधा उत्पन्न करेगा। पार्टी का मानना है कि यदि एक ही जाति को अलग-अलग नामों और वर्तनी के कारण कई हिस्सों में बांट दिया गया, तो ओबीसी-ईबीसी की वास्तविक संख्या और उनकी वंचितता अदृश्य हो सकती है। यह "जितनी आबादी, उतना हक" के सिद्धांत और आरक्षण की समीक्षा के आधार को कमजोर करेगा। इसके परिणामस्वरूप, यह पता लगाना कठिन हो जाएगा कि कौन सी ओबीसी-ईबीसी जातियां आरक्षण का लाभ नहीं पा रही हैं, और सबसे पिछड़े समुदाय फिर पीछे छूट जाएंगे।
कदम-दर-कदम त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया
प्रेस वार्ता में यह भी बताया गया कि एक जून को हुई एक बैठक में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पास मौजूद ओबीसी जातियों की सूची साझा करने की इच्छा जताई थी। हालांकि, रजिस्ट्रार जनरल के कार्यालय द्वारा तैयार बैठक के शुरुआती मसौदे में इस प्रस्ताव को ठीक से दर्ज नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिला कि ऐसी कोई सूची उपलब्ध नहीं है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि जब सूची मौजूद है, तो ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया और किसके निर्देश पर इसे प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया।
कांग्रेस ने बताया कि देश में लगभग 4,200 जातियां हैं, और केंद्र व राज्य सरकारों के पास इनकी सूचियां पहले से उपलब्ध हैं। इसके बावजूद, सरकार राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना के लिए ड्रॉपडाउन सूची नहीं रख रही है, क्योंकि वह शुरू से ही ऐसी जनगणना के खिलाफ रही है। कांग्रेस ने 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के हलफनामे का भी उल्लेख किया, जिसमें सरकार ने स्वयं स्वीकार किया था कि जातिगत जनगणना के लिए ड्रॉपडाउन सूची तैयार होना आवश्यक है।
लंबा संघर्ष और प्रधानमंत्री को पत्र
कांग्रेस नेता डॉ. जयहिंद ने बताया कि पार्टी लंबे समय से सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है, जो 2021 से लंबित है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 2023 से इस मुद्दे को लगातार उठाने का उल्लेख किया। इसके अलावा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक संयुक्त पत्र लिखकर मौजूदा जातिगत जनगणना प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी। खरगे ने इससे पहले 16 अप्रैल 2023 को पहला और 5 मई 2025 को दूसरा पत्र लिखा था, लेकिन सरकार ने इन पर कोई जवाब नहीं दिया।
2023 और 2024 के चुनावों के दौरान, जब कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की मांग की थी, तब प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में इसे "अर्बन नक्सल सोच" बताया था। राहुल गांधी की पुरजोर मांग के बाद, 30 अप्रैल 2025 को सरकार को यू-टर्न लेते हुए 2027 से जातिगत जनगणना कराने का ऐलान करना पड़ा। हालांकि, घोषणा के बावजूद, कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया को पारदर्शिता के साथ लागू करने में अपनी मंशा स्पष्ट नहीं कर रही है।
आंदोलन की चेतावनी
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी श्री राजेंद्र पाल गौतम, पूर्व मंत्री, ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मौजूदा जातिगत जनगणना के आवेदन प्रपत्र में एसटी (अनुसूचित जनजाति) और एससी (अनुसूचित जाति) कैटेगरी की उपजातियों का उल्लेख है, लेकिन ओबीसी वर्ग के कॉलम में पिछड़ा वर्ग की उपजातियों की सूची मौजूद नहीं है। इस कारण देश की एक बड़ी आबादी ठगा हुआ महसूस कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इन खामियों को दूर नहीं करती है, तो आने वाले समय में देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
कांग्रेस ने चेताया है कि सरकार के पास अभी भी प्रारूप में सुधार का समय है, क्योंकि अभी जातिगत जनगणना केवल जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में ही शुरू हुई है, और पूरे देश में यह फरवरी 2027 से शुरू होनी है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि पिछड़ों, दलितों और शोषितों के हक की लड़ाई से कांग्रेस पीछे नहीं हटेगी और सरकार को हर हाल में सही जातिगत जनगणना करवानी ही होगी।
इस प्रेस वार्ता में सांसद श्री राकेश राठौर, पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन श्री मनोज यादव, प्रवक्ता डॉ. उमा शंकर पाण्डेय, श्रीमती प्रियंका गुप्ता, श्रीमती रफत फातिमा, श्री सचिन रावत, और श्री अलीमुल्ला खान भी मौजूद रहे।
