जापान में 3 लाख युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण, भारत-जापान सहयोग का नया दौर
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे पर बताया कि जापानी कंपनियां भारत के 3 लाख युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देंगी। जापान में भी रोजगार के अवसर तलाशे जाएंगे।

द क्लिफ न्यूज़ | ओसाका | 28 अगस्त 2026
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान के अपने चार दिवसीय दौरे के अंतिम दिन एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि जापानी कंपनियां भारत के लगभग तीन लाख युवाओं को विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के लिए प्रशिक्षित करेंगी। इस पहल का उद्देश्य भारत में निवेश को बढ़ावा देना और जापान के साथ आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करना है। इसके अतिरिक्त, भारतीय युवाओं की प्रतिभा को पहचान कर उन्हें जापान में रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
ओसाका में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि जापान में कुशल श्रमिकों की बढ़ती मांग भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर प्रस्तुत करती है। उन्होंने युवाओं से जापानी भाषा सीखने और इससे संबंधित अवसरों के लिए सक्रिय रूप से आवेदन करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय युवाओं के लिए ऑनलाइन साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे, जिसके आधार पर उनकी क्षमताओं के अनुरूप प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म स्थापित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
विविध क्षेत्रों में कौशल विकास की पहल
श्री गोयल ने स्पष्ट किया कि यह प्रशिक्षण और रोजगार की पहल किसी एक विशिष्ट क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। शिपिंग, केमिकल, सेमीकंडक्टर उत्पादन और टेक्सटाइल जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में जापानी कंपनियों के साथ गहन चर्चा हुई है। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जापान की औद्योगिक आवश्यकताओं और भारत के विशाल युवा मानव संसाधन के बीच एक मजबूत तालमेल स्थापित करके दोनों देश महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। यह साझेदारी न केवल कौशल विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को भी गहराई प्रदान करेगी।
जापानी कंपनियों से भारत में निवेश की उम्मीद
अपने चार दिवसीय जापान दौरे के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने दर्जनों जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भारत में निवेश की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। कई कंपनियों ने भारत में निवेश के लिए संभावित भारतीय साझेदारों की पहचान कर ली है, जिससे भारत में विदेशी निवेश की प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है। श्री गोयल ने बताया कि एक प्रमुख जापानी रोबोटिक्स कंपनी ने भी भारत में अपनी निवेश योजनाओं के लिए एक उपयुक्त भारतीय कंपनी की पहचान करने की पुष्टि की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जापानी निवेशकों के साथ बातचीत जारी रहेगी और भारत सरकार देश में निवेश के लिए एक अनुकूल और सुगम वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
निवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने पर सरकार का ध्यान
विदेशी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने की लगातार आ रही मांगों के जवाब में, श्री गोयल ने कहा कि सरकार प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और नीतियों में आवश्यक सुधारों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र की उभरती जरूरतों के अनुरूप नियमों में बदलाव किए जा सकते हैं। इसके अलावा, औद्योगिक जगत के लिए 'अपने ग्राहक को जानें' (केवाईसी) प्रक्रिया में सुधार की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। विभिन्न देशों के साथ आपसी मान्यता समझौतों (एमआरए) को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में संलग्न कंपनियों के लिए परिचालन प्रक्रियाएं अधिक सुचारू हो सकें।
श्री गोयल ने यह भी बताया कि हाई-टेक उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के प्रमाणन नियमों में कुछ छूट दी जा रही है। उनका मानना है कि जो कंपनियां भारत में उच्च-तकनीकी उत्पादन में संलग्न हैं, वे स्वतः ही उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों का उपयोग करेंगी। सरकार का लक्ष्य न केवल निवेश को प्रोत्साहित करना है, बल्कि औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी नीतियों को निरंतर परिष्कृत करना भी है।
सेमीकंडक्टर से लेकर फार्मा तक, निवेश में गहरी रुचि
जापानी कंपनियों द्वारा भारत में निवेश की रुचि वाले प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए, श्री गोयल ने बताया कि विशेष प्रकार के रसायनों, जो सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च-तकनीकी उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण हैं, उनमें जापानी कंपनियों की विशेष दिलचस्पी है। इसके अतिरिक्त, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाले घटक, गैस आपूर्ति और टेक्सटाइल जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी भारत में उत्पादन इकाई स्थापित करने की संभावनाओं की पड़ताल की जा रही है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच प्राप्त होगी। भारत के कई देशों के साथ मौजूदा व्यापार समझौते हैं, और कनाडा, इज़राइल, पेरू और चिली जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत प्रगति पर है। न्यूजीलैंड के साथ भी एक व्यापार समझौते के जल्द लागू होने की उम्मीद है, जो भारतीय व्यवसायों के लिए नए अवसर खोलेगा।
भारत 'चीन प्लस वन' से आगे, अपनी क्षमता पर केंद्रित
वैश्विक विनिर्माण परिदृश्य में भारत को चीन के विकल्प के रूप में देखे जाने के सवाल पर, श्री गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत केवल 'चीन प्लस वन' रणनीति का अनुसरण नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अपनी मजबूत आर्थिक क्षमताएं और एक विशाल घरेलू बाजार है। भारत में उत्पादन करने वाली कंपनियों को न केवल देश के बड़े बाजार का लाभ मिलता है, बल्कि वे दुनिया भर के विभिन्न देशों में भी अपने उत्पाद बेच सकती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में आई बाधाओं के बाद, भारत को 'चीन प्लस वन' के रूप में एक विकल्प के रूप में देखा जाने लगा था। हालांकि, श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की आर्थिक शक्ति और बाजार को केवल इस संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। भारत अपनी पूर्ण क्षमता के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में योगदान करने के लिए तैयार है।
आर्थिक विकास दर मजबूत रहने का भरोसा
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के अनुमानों पर टिप्पणी करते हुए, श्री गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत की आर्थिक विकास दर दुनिया के अन्य प्रमुख देशों की तुलना में सबसे अधिक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का यह सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।
मंत्री ने यह भी बताया कि निर्यात में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, और अगस्त 2026 में भी लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की घरेलू खपत काफी मजबूत है, जिसके कारण वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्था कहना उचित नहीं होगा।
स्टार्टअप्स को जापान से तकनीकी और वित्तीय सहयोग
भारतीय स्टार्टअप्स को जापान से मिलने वाली सहायता के संबंध में, श्री गोयल ने कहा कि जापान से तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हो रहा है। यह सहयोग भारतीय स्टार्टअप्स को अपने व्यवसायों का विस्तार करने और उनकी तकनीकी क्षमताओं को उन्नत करने में मदद करेगा।
उन्होंने आगे बताया कि जापानी कंपनियों के साथ स्टार्टअप्स के समझौते भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेंगे। इसके अतिरिक्त, जापानी वित्तीय संस्थानों के माध्यम से भारतीय स्टार्टअप्स के लिए धन जुटाने के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
श्री गोयल ने निष्कर्ष निकाला कि भारत और जापान के बीच बढ़ता औद्योगिक सहयोग केवल निवेश तक ही सीमित नहीं है। कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देना और वैश्विक बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करना, ये सभी क्षेत्र साझेदारी के माध्यम से दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर उत्पन्न कर सकते हैं।
