जंतर-मंतर उपद्रव साजिश: बंगाल STF ने जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्धों से पूछताछ की
पश्चिम बंगाल STF ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में गड़बड़ी और पाकिस्तान हैंडलर्स से संपर्क के आरोप में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े संदिग्धों से पूछताछ तेज कर दी है।

द क्लिफ न्यूज़ | कोलकाता | 2 अगस्त 2026
पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद से कथित तौर पर जुड़े संदिग्ध ऑपरेटिव हमीम मंडल और उसकी सहयोगी अर्पिता सरकार से जुड़ी पूछताछ में ऐसे कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं, जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान उपद्रव फैलाने की एक कथित साजिश और विदेशी हैंडलर्स से संपर्क की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच एजेंसियां इन दावों की गहन पड़ताल कर रही हैं, हालांकि सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही संभव हो पाएगी।
STF की प्रारंभिक जांच के अनुसार, संदिग्धों को दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की योजना से जोड़ा जा रहा है। यह पड़ताल की जा रही है कि क्या प्रदर्शन स्थल पर भीड़ के बीच भ्रम या तनाव पैदा करने के लिए विशेष तैयारी की गई थी। इस संदर्भ में पुलिस की वर्दी या पहचान से जुड़े सामान जुटाने के कथित निर्देशों की भी जांच की जा रही है। एजेंसियों का यह पता लगाने का प्रयास जारी है कि क्या किसी बड़े सार्वजनिक स्थान को निशाना बनाने की योजना थी, इस कथित योजना में और कौन लोग शामिल थे, और क्या किसी बाहरी नेटवर्क से निर्देश प्राप्त हो रहे थे।
वीआईपी और संवेदनशील ठिकानों की निगरानी का एंगल
जांच का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि क्या संदिग्धों को किसी राजनीतिक व्यक्ति या महत्वपूर्ण स्थानों से संबंधित जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे। STF इस दिशा में आरोपियों की गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह केवल ऑनलाइन गतिविधि थी या किसी वास्तविक योजना का हिस्सा। सुरक्षा एजेंसियां इस जानकारी को सत्यापित करने के लिए सक्रिय हैं कि क्या किसी वीआईपी या संवेदनशील ठिकानों की निगरानी करने का प्रयास किया गया था।
पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से संपर्क का दावा
STF की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कुछ विदेशी संपर्कों के संपर्क में थे। एजेंसियां इन संपर्कों की तकनीकी जांच कर रही हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बातचीत के लिए कथित तौर पर व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। साइबर विशेषज्ञ अब इन चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन गतिविधियों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इन संपर्कों की प्रकृति और उद्देश्य को समझा जा सके।
शहजाद भट्टी गैंग और ISI लिंक की जांच
जांच एजेंसियां आरोपियों के कथित संपर्कों में पाकिस्तान स्थित शहजाद भट्टी गैंग और आईएसआई समर्थित नेटवर्क के एंगल की भी जांच कर रही हैं। एजेंसियों का मुख्य ध्यान यह पता लगाने पर है कि क्या विदेशी नेटवर्क सीधे निर्देश दे रहा था, संपर्कों का उद्देश्य केवल प्रचार था या कोई आपराधिक गतिविधि, और क्या भारत में मौजूद किसी व्यक्ति या समूह को इस साजिश का हिस्सा बनाया गया था। इस संबंध में गहन पड़ताल जारी है।
बर्धमान और साहिबगंज से हुई गिरफ्तारियां
STF ने अपनी कार्रवाई के तहत संदिग्धों को पश्चिम बंगाल के बर्धमान क्षेत्र और झारखंड के साहिबगंज से गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के बाद दोनों संदिग्धों से आमने-सामने पूछताछ कर उनके नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के संपर्कों की एक विस्तृत सूची तैयार कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क का विस्तार किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है।
फंडिंग नेटवर्क की पड़ताल
आतंकी नेटवर्क की जांच में आर्थिक स्रोत एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। STF और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित गतिविधियों के लिए धन कहां से आ रहा था। इस जांच के प्रमुख बिंदुओं में बैंक खातों और डिजिटल भुगतानों की जांच, संदिग्ध लेन-देन की पहचान, फंड पहुंचाने वाले लोगों की तलाश और नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की पहचान शामिल है। इस आर्थिक पहलू की जांच से साजिश के पीछे की मंशा और उसके पैमाने को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल सबूतों से जोड़ी जा रही कड़ियां
आधुनिक जांच प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। एजेंसियां मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल सामग्री के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई हैं। जांचकर्ताओं का मानना है कि डिजिटल फुटप्रिंट से इस नेटवर्क की वास्तविक संरचना और संपर्कों का पता लगाया जा सकता है। यह तकनीक उन सूचनाओं को उजागर करने में मदद करती है जो पारंपरिक जांच विधियों से शायद ही मिल पातीं।
STF की इस कार्रवाई के बाद केंद्रीय और राज्य सुरक्षा एजेंसियां भी मामले पर बारीक नजर बनाए हुए हैं। जांच का दायरा अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भी तलाश की जा रही है। बंगाल STF की कार्रवाई के परिणामस्वरूप जंतर-मंतर प्रदर्शन, विदेशी संपर्कों और कथित आतंकी नेटवर्क के बीच संभावित संबंधों की जांच तेज हो गई है। एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, गहन पूछताछ और वित्तीय जांच के जरिए पूरे मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
