जंतर-मंतर प्रदर्शन: CJP नेताओं राका, दास और शिंदे को क्राइम ब्रांच का समन
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं आशुतोष राका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में पूछताछ के लिए समन भेजा है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेताओं आशुतोष राका उर्फ राका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर 2026 को हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए समन जारी किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब इस प्रदर्शन से संबंधित दो मामलों की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, जो मामले को एक नई दिशा दे सकती है।
पुलिस रिपोर्टों के अनुसार, CJP के सदस्यों ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर क्षेत्र में कथित तौर पर प्रदर्शन किया था। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उस क्षेत्र में प्रवेश किया जो अब प्रदर्शन स्थलों की अधिसूचित सूची से हटाया जा चुका है, और उन्होंने कथित तौर पर निजी परिसर के रास्ते प्रवेश का प्रयास किया। इस दौरान, पुलिस ने मौके पर मौजूद 14 सदस्यों को हिरासत में लिया था और घटना के संबंध में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों के कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा, जिसके निष्कर्षों पर सभी की निगाहें टिकी होंगी।
जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस से जुड़े मामलों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई
इस घटनाक्रम के तुरंत बाद, दिल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दिया। 20 और 21 अक्टूबर को आई खबरों के अनुसार, न केवल जंतर-मंतर पर हुए कथित प्रदर्शन से संबंधित मामला, बल्कि कनॉट प्लेस में कथित अनधिकृत प्रवेश से जुड़ा एक दूसरा मामला भी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। इस दोहरे हस्तांतरण के बाद, यह स्पष्ट हो गया कि दोनों ही मामलों की गहन और विस्तृत जांच अब एक विशेष जांच इकाई द्वारा की जाएगी, जो इन घटनाओं के मूल कारणों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाने का प्रयास करेगी। हालांकि, जारी किए गए समन में नेताओं को उपस्थित होने के लिए किस विशिष्ट तारीख का उल्लेख किया गया है और पूछताछ का विस्तृत एजेंडा क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि की आवश्यकता बनी हुई है, जिससे आगे की कार्यवाही की दिशा तय हो सके।
नेताओं की कानूनी स्थिति में भिन्नता और न्यायिक प्रक्रिया
जंतर-मंतर पर हुई घटना के बाद, कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं में से दो, आशुतोष राका और सौरव दास, को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह गिरफ्तारी के बाद की प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा था। बाद में, उनकी हिरासत अवधि को दो दिनों के लिए और बढ़ाने की खबरें सामने आई थीं, जिससे उनकी पूछताछ की अवधि बढ़ गई थी। इसके विपरीत, पार्टी के तीसरे नेता, अजिंक्य शिंदे, को व्यक्तिगत मुचलके पर रिहा कर दिया गया था। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि तीनों नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों में उनकी व्यक्तिगत भूमिका और साक्ष्य के आधार पर कानूनी स्थिति एक समान नहीं रही है, और न्यायिक प्रक्रिया प्रत्येक व्यक्ति के मामले को अलग-अलग आधारों पर देख रही है।
पुलिस और पार्टी के भिन्न-भिन्न रुख: आरोपों और बचाव की दलीलें
पुलिस का पक्ष यह है कि प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन करते हुए एक प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की, और इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मियों के विधिवत कार्यों में बाधा डाली, जो कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती थी। पुलिस के अनुसार, यह जानबूझकर किया गया कृत्य था जिसका उद्देश्य व्यवस्था को बाधित करना था। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े लोगों और पार्टी के समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्षता और नेताओं को हिरासत में लिए जाने की वैधता पर कड़े सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है। ऐसे मामलों में, लगाए गए आरोपों की सत्यता और उसमें शामिल व्यक्तियों की दोषसिद्धि की पुष्टि केवल गहन जांच प्रक्रिया और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही संभव है, जहां दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
क्राइम ब्रांच द्वारा जांच का जिम्मा संभालने के बाद, यह अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि पूछताछ के दौरान पुलिस किन विशिष्ट तथ्यों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की पड़ताल करती है। समन जारी करना केवल एक प्रारंभिक प्रक्रिया है, जो संबंधित व्यक्तियों को पूछताछ के लिए बुलाने का एक औपचारिक तरीका है; इसे अपने आप में किसी अपराध का प्रत्यक्ष प्रमाण या दोषसिद्धि का संकेत नहीं माना जा सकता। वर्तमान में, जंतर-मंतर प्रदर्शन से संबंधित मामले में पुलिस की जांच सक्रिय रूप से जारी है। मामले की आगे की दिशा, जिसमें नेताओं के बयान, पुलिस द्वारा जुटाए गए नए साक्ष्य, और चल रही न्यायिक कार्यवाही के निर्णय शामिल हैं, से ही स्पष्ट होगी कि इस प्रकरण का अंतिम परिणाम क्या होता है। यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या कनॉट प्लेस से जुड़ा मामला भी जंतर-मंतर मामले से किसी तरह जुड़ता है या उसकी अपनी अलग जांच होती है।
