जन्मसिद्ध नागरिकता पर ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी अदालत ने लगाई रोक
मैरीलैंड की संघीय अदालत ने जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने वाले ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। अदालत ने इसे 14वें संशोधन का उल्लंघन माना है।

द क्लिफ न्यूज़ | वॉशिंगटन | 4 सितंबर 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने के लिए जारी किए गए संशोधित कार्यकारी आदेश पर संघीय अदालत ने अस्थायी रोक लगा दी है। मैरीलैंड की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने इस आदेश पर शुरुआती रोक लगाते हुए कहा कि सरकार का यह निर्देश अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता से वंचित करने का प्रयास करता है, जो संवैधानिक प्रावधानों के विरुद्ध है।
यह फैसला ट्रंप प्रशासन की नागरिकता नीति को एक और बड़ा कानूनी झटका है, क्योंकि अदालत ने इसे अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन माना है। 14वां संशोधन अमेरिका में जन्म लेने वाले और उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करने का संवैधानिक आधार है।
संशोधित आदेश और अदालती दलीलें
राष्ट्रपति ट्रंप ने 6 अगस्त 2026 को इस संशोधित आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश का मुख्य निशाना उन मामलों को बनाना था, जिनमें बच्चे के माता-पिता अमेरिका में स्थायी नागरिक नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, इस आदेश में कथित 'बर्थ टूरिज्म' (जन्म के लिए अमेरिका आना) और विदेशी सरकारी कर्मचारियों के बच्चों से संबंधित प्रावधान भी शामिल थे।
जज डेबोरा बोर्डमैन ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि यह नीति संविधान के 14वें संशोधन के मूल प्रावधानों से सीधे तौर पर टकराती है। संशोधन के अनुसार, जो भी व्यक्ति अमेरिका में जन्म लेता है और इसके अधिकार क्षेत्र में आता है, वह अमेरिका का नागरिक होगा। प्रशासन का संशोधित आदेश इस मौलिक सिद्धांत को चुनौती देता प्रतीत होता है।
कानूनी टकराव की आगे की राह
यह निर्णय ट्रंप प्रशासन और संघीय अदालतों के बीच जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर जारी कानूनी टकराव को और गहरा सकता है। इससे पहले भी राष्ट्रपति ट्रंप के नागरिकता से संबंधित विभिन्न प्रयासों को अदालतों में कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है और कई मामलों में उन्हें झटका लगा है।
अब इस संशोधित आदेश के खिलाफ आगे की कानूनी लड़ाई पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। यदि यह मामला उच्च अदालतों तक पहुँचता है, तो अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा और कानूनी बहस के केंद्र में आ सकती है। अदालत के इस निर्णय ने नागरिकता के अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दी है।
