जन्माष्टमी पर नर्मदापुरम में भक्ति का सागर, साधु-संतों और नेताओं ने लिया हिस्सा
नर्मदापुरम में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। ग्वालटोली में आयोजित कार्यक्रम में दादा गुरु महाराज, सांसद, विधायक और कलेक्टर ने भाग लिया।

संवाददाता: मुकेश भदौरिया
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 4 सितंबर 2026
भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर पूरे नर्मदापुरम जिले में भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। शहर के विभिन्न हिस्सों में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित मनमोहक झांकियां, शोभायात्राएं, भंडारे और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं के चेहरों पर कृष्ण भक्ति का अनुपम भाव दिखाई दे रहा था। छोटे बच्चों द्वारा श्रीकृष्ण का वेश धारण कर उनकी बाल लीलाओं का मंचन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जन्मोत्सव के उत्साह को और बढ़ाने के लिए कई स्थानों पर विशाल भंडारों का आयोजन भी किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया। इस पावन अवसर पर जिले के ग्वालटोली क्षेत्र में विशेष उत्साह देखा गया। यहां स्थित प्राचीन काली मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर परिसर के निकट ग्वाल समाज द्वारा भव्य जन्मोत्सव और मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में आध्यात्मिक गुरु दादा गुरु महाराज, नर्मदापुरम के विधायक डॉ. सीतासरन शर्मा, लोकसभा सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू यादव और कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा सहित कई अन्य गणमान्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सहभागिता की। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
कार्यक्रम के दौरान, दादा गुरु महाराज और कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने मंदिर में पारंपरिक विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चना कर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित विभिन्न धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लिया, जो स्थानीय प्रशासन की धार्मिक सद्भाव के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी के उत्सव ने नर्मदापुरम को आध्यात्मिक रंगों से सराबोर कर दिया, जहां हर ओर कृष्णमय वातावरण था।
भक्तिमय प्रस्तुतियां और खेल
जन्मोत्सव के उत्सव में, कलाकारों ने राधा-कृष्ण के मनमोहक वेश धारण कर नृत्य प्रस्तुतियां दीं, जिन्होंने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। इन प्रस्तुतियों में बालकृष्ण की बाललीलाओं को जीवंत किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही, रोमांचक मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं के बीच खासा उत्साह पैदा किया। ऊँचे बांधे गए दही से भरे घड़े को फोड़ने की होड़ ने पारंपरिक उत्साह को दोगुना कर दिया। श्रीकृष्ण की बाललीलाओं पर आधारित झांकियां और नृत्यों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया, जिससे उपस्थित भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। यह आयोजन समाज के सभी वर्गों को एक साथ जोड़ने में सफल रहा।
दादा गुरु महाराज के संदेश: गौ सेवा और पर्यावरण संरक्षण
इस अवसर पर अपने प्रवचन में, दादा गुरु महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और उनके सार्वभौमिक संदेशों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने हमें धर्म, सत्य, कर्तव्य और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उनके उपदेश प्रकृति, गौ माता और समस्त जीवों के प्रति करुणा और संरक्षण की भावना रखने के महत्व पर बल देते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समाज में प्रेम, भाईचारा और समरसता का प्रसार ही वास्तविक जन्माष्टमी उत्सव का सार है।
दादा गुरु महाराज ने विशेष रूप से गौ माता के महत्व पर प्रकाश डाला, जो भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक अभिन्न अंग है। उन्होंने सभी से गौ संरक्षण और गौ सेवा को अपने जीवन का अविभाज्य हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की वाहक है और उसकी सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने तुलसी के औषधीय और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल पूजनीय है, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी भी है। उन्होंने बताया कि तुलसी के पौधे घर-आंगन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत गुणकारी हैं।
दादा गुरु महाराज ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने और लगाए गए पौधों की न केवल देखभाल करने, बल्कि उन्हें पूर्ण विकसित वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि केवल पौधारोपण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को हरा-भरा रखना भी धर्म का ही एक अंग है और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमें एक स्वस्थ वातावरण छोड़ना चाहिए। उन्होंने वृक्षों को प्रकृति का अनुपम उपहार बताते हुए उनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
वृंदावन सी अनुभूति
जन्माष्टमी के उल्लासपूर्ण वातावरण में, राधा-कृष्ण की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लेने के लिए उमड़ी भारी भीड़ ने कार्यक्रम को सफल बनाया। आयोजन के दौरान निर्मित भक्तिमय माहौल इतना जीवंत था कि श्रद्धालुओं को ऐसा महसूस हो रहा था मानो वे नर्मदापुरम में ही मथुरा-वृंदावन के पवित्र धाम में उपस्थित हों। यह आयोजन जिले में सांप्रदायिक सद्भाव और धार्मिक एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण साबित हुआ। ग्वालटोली के इस आयोजन ने स्थानीय लोगों को न केवल धार्मिक उल्लास प्रदान किया, बल्कि उन्हें एक-दूसरे से जुड़ने और समुदाय की भावना को मजबूत करने का अवसर भी दिया। इस वर्ष की जन्माष्टमी को नर्मदापुरम वासी लंबे समय तक याद रखेंगे।
