जलवायु परिवर्तन: राज्यसभा सांसद ने कृषि-जल प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति पर दिया जोर
राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के मद्देनजर कृषि और जल प्रबंधन के लिए 25-50 वर्षों की दूरगामी रणनीति तैयार करने की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 10 अगस्त 2026
जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को देखते हुए, राज्यसभा सांसद माया नारोलिया ने सदन में एक विशेष उल्लेख के माध्यम से कृषि और जल प्रबंधन के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि अब यह केवल भविष्य की चिंता नहीं, बल्कि एक वर्तमान की हकीकत है, जो अनियमित वर्षा, तापमान वृद्धि, सूखा और अतिवृष्टि के रूप में किसानों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रही है।
सांसद नारोलिया ने इस बात पर जोर दिया कि केवल प्राकृतिक आपदाओं के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। इसके बजाय, दूरदर्शिता के साथ ऐसी नीतियों का निर्माण करना आवश्यक है जो आने वाले दशकों में किसानों और जल संसाधनों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से बचा सकें। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के लिए, जहाँ नर्मदा, चंबल, सोन और ताप्ती जैसी नदियाँ हैं और कृषि की समृद्ध परंपरा है, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की वकालत
उन्होंने वर्षा जल संचयन, तालाबों के पुनरुद्धार, सूक्ष्म सिंचाई, जलग्रहण क्षेत्र विकास और भूजल पुनर्भरण को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की वकालत की। सांसद नारोलिया का मानना है कि जल संरक्षण को एक जन-आंदोलन का स्वरूप देना चाहिए। पारंपरिक जल प्रबंधन प्रणालियों को आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़कर, जल संरक्षण के क्षेत्र में और अधिक प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
25 से 50 वर्षों की समग्र रणनीति की मांग
राज्यसभा सांसद ने राज्य सरकार से अगले 25 से 50 वर्षों के परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कृषि और जल प्रबंधन की एक समग्र और दूरदर्शी रणनीति विकसित करने का आग्रह किया। इस प्रस्तावित रणनीति में मिट्टी के स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी, जलवायु-अनुकूल बीजों का विकास, मौसम-आधारित वास्तविक समय की कृषि सलाह और जल के दक्ष उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने किसानों की जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता को बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई। उनके अनुसार, कृषि क्षेत्र को बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुसार ढालना वर्तमान समय की एक अत्यंत महत्वपूर्ण मांग है, जिसके लिए अभी से ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
