मंत्री के घर के बाहर IYC का हंगामा: रिश्तेदारों पर गांजा तस्करी के आरोपों से बढ़ा सियासी तनाव
मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को बड़ा बवाल तब खड़ा हो गया जब इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने राज्य की महिला एवं...

मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को बड़ा बवाल तब खड़ा हो गया जब इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने राज्य की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री प्रातिमा बगरी के निवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मंत्री के भाई और कुछ रिश्तेदार कथित रूप से गांजा तस्करी के एक मामले में शामिल हैं। यह मामला सामने आते ही सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप–प्रत्यारोप की नई जंग शुरू हो गई है।
युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप, पुलिस ने रोका प्रदर्शनकारियों को
IYC के जिला अध्यक्ष अमित खत्री के नेतृत्व में पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं के भविष्य को “अंधेरे में धकेल रही है” और प्रदेश “उड़ता एमपी” बनने की कगार पर है।
पुलिस ने जब कार्यकर्ताओं को मंत्री के घर की तरफ बढ़ने से रोका, तो दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक भी हुई। बाद में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर सभी को पीछे धकेला और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया।
अमित खत्री ने दावा किया कि “यदि जांच गंभीरता से हो तो मंत्री के निवास से भी प्रतिबंधित पदार्थ बरामद हो सकते हैं।” हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अब तक किसी एजेंसी ने नहीं की है।
NSUI का अलग मोर्चा: मुख्यमंत्री को ‘प्रतीकात्मक गांजा माला’ देने की कोशिश
इसी मुद्दे पर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने भी कांग्रेस कार्यालय से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों के हाथों में एक प्रतीकात्मक "गांजा माला" थी, जिसे वे मुख्यमंत्री मोहन यादव को सौंपने का इरादा रखते थे।
लेकिन पुलिस ने उन्हें रेड क्रॉस चौराहे पर ही रोक लिया और कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। अधिकारियों का कहना है कि “कानून-व्यवस्था बनाए रखना पहली प्राथमिकता है, इसलिए रोकना जरूरी था।”
पीसीसी अध्यक्ष जितू पटवारी का पलटवार: ‘यह ड्रग नेटवर्क नहीं, BJP रिश्तेदार नेटवर्क है’
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जितू पटवारी ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “मामला केवल प्रतिबंधित पदार्थ की तस्करी का नहीं है, बल्कि सत्ता संरक्षण और रिश्तेदारी के नेटवर्क का है।”
पटवारी ने सवाल उठाया कि:
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जब एक मंत्री के घर का नाम सामने आता है, तब गृह मंत्री की चुप्पी क्यों?
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क्या यह सरकार जवाबदेही से बच रही है?
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क्या ‘डबल इंजन’ सरकार तस्करी का ‘ट्रांजिट इंजन’ बन रही है?
पटवारी ने मांग की कि आरोपों की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो और पूरे मामले में पारदर्शिता रखी जाए।
सरकारी पक्ष क्या कहता है?
अब तक राज्य सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि “कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह चल रही है और किसी भी आरोप की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा ही की जाएगी।”
वहीं, पुलिस का कहना है कि तस्करी मामले में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
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राजनीतिक नैतिकता का प्रश्न: जब किसी मंत्री के परिजनों पर गंभीर आरोप लगते हैं, तो इससे सरकार की छवि और विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
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मादक पदार्थों का बढ़ता खतरा: मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़े मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
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युवा सुरक्षा का मुद्दा: विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार नशा-नियंत्रण की रणनीतियों को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे युवाओं के भविष्य पर खतरा बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह के राजनीतिक विवादों में जांच प्रक्रियाएं उलझती रहीं, तो मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ राज्य की नीति कमजोर हो सकती है।
