ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी: मध्य प्रदेश को ₹11.22 करोड़ राजस्व, अन्य राज्यों को ₹200 करोड़ की बचत
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के उप सचिव को ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया। इस नीति से प्रदेश को ₹11.22 करोड़ का राजस्व मिला, जबकि अन्य राज्यों को ₹200 करोड़ की बचत हुई।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 19 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग में उप सचिव के पद पर कार्यरत अधिकारी को ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) शेयरिंग पॉलिसी के सफल क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया गया है। यह सम्मान निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, संसाधन-सक्षम और आर्थिक रूप से किफायती बनाने की दिशा में किए गए नवाचारों को मान्यता देता है। इस नीति के तहत, मध्य प्रदेश को न केवल ₹11.22 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है, बल्कि महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को ईवीएम की नई खरीद पर लगभग ₹200 करोड़ की बचत हुई है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव द्वारा 15 अगस्त को आयोजित एक कार्यक्रम में इस अधिकारी को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। यह नीति उपलब्ध ईवीएम संसाधनों के बेहतर उपयोग पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों की चुनावी आवश्यकताओं को पूरा करना और नई ईवीएम की खरीद पर होने वाले भारी व्यय को कम करना है। यह दावा किया जा रहा है कि किसी राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम शेयरिंग व्यवस्था के माध्यम से राजस्व अर्जित करना देश में अपनी तरह का पहला मामला है।
राजस्व अर्जन और राष्ट्रीय बचत का मॉडल
राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव के कुशल मार्गदर्शन में विकसित की गई ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी ने मध्य प्रदेश शासन के लिए 11 करोड़ 22 लाख रुपये का राजस्व उत्पन्न किया है। यह पहल न केवल मध्य प्रदेश के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी सिद्ध हुई है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों के प्रभावी साझाकरण और बचत के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इस नीति के सफल क्रियान्वयन से यह साबित होता है कि नवाचार के माध्यम से संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सकता है, जिससे सार्वजनिक धन की बचत होती है और उसका उपयोग अन्य महत्वपूर्ण विकास कार्यों में किया जा सकता है।
इस नीति का लाभ उठाते हुए महाराष्ट्र, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने नई ईवीएम की खरीद से बचकर लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत की है। इन राज्यों में स्थानीय निकायों के चुनाव ईवीएम के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न कराए गए हैं। नई मशीनों की खरीद पर बड़ी राशि खर्च करने के बजाय, संबंधित राज्य सरकारों को अब इन संसाधनों का उपयोग अपने राज्यों के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर करने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार, ईवीएम शेयरिंग व्यवस्था को राज्यों के बीच संसाधनों के सहयोगात्मक उपयोग को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।
भविष्य की चुनाव व्यवस्था के लिए महत्वाकांक्षी योजना
ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी की अभूतपूर्व सफलता के बाद, मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग भविष्य की चुनाव प्रबंधन प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए इसी मॉडल का उपयोग करने की योजना पर कार्य कर रहा है। आयोग की प्रस्तावित योजना के अनुसार, आम चुनाव 2027 के दौरान, मध्य प्रदेश अपने स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए अन्य प्रदेशों से ईवीएम प्राप्त कर उनका उपयोग कर सकता है। इस योजना से अतिरिक्त संसाधनों और बड़ी धनराशि के व्यय को बचाते हुए, स्थानीय निकायों के चुनावों को अधिक व्यापक स्तर पर और सुचारू रूप से ईवीएम के माध्यम से संचालित करना संभव होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत, जिला पंचायत से लेकर पंच पद तक के सभी स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ, एक ही चरण में ईवीएम के माध्यम से संपन्न कराने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। यदि यह योजना सफलतापूर्वक कार्यान्वित होती है, तो यह न केवल निर्वाचन प्रबंधन में लगने वाले समय, संसाधन और वित्तीय व्यय को कम करेगी, बल्कि संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और कुशल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह पहल भारत में चुनावी प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और दक्षता में वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
संसाधन प्रबंधन और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण
ईवीएम शेयरिंग पॉलिसी को निर्वाचन संसाधनों के कुशल प्रबंधन की दिशा में एक उल्लेखनीय नवाचार के रूप में सराहा जा रहा है। इस नीति ने मध्य प्रदेश के लिए जहाँ एक ओर राजस्व का एक नया स्रोत खोला है, वहीं दूसरी ओर अन्य राज्यों को ईवीएम खरीद पर होने वाले भारी वित्तीय बोझ से मुक्ति दिलाई है। 15 अगस्त को प्रदान किया गया प्रशस्ति पत्र इस पहल से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रयासों को सम्मानित करता है। यह दर्शाता है कि निर्वाचन जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में भी नवाचार, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और आर्थिक दक्षता को अपनाकर बड़े पैमाने पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित और सफलतापूर्वक लागू की गई यह ईवीएम शेयरिंग व्यवस्था, भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी संसाधनों के साझा उपयोग और चुनाव प्रबंधन की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित हो सकती है। यह नीति न केवल आर्थिक बचत का एक प्रभावी माध्यम है, बल्कि राज्यों के बीच सहयोगात्मक भावना को भी बढ़ावा देती है, जो एक मजबूत और व्यवस्थित चुनावी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
