इटावा: स्थायी रास्ते की मांग पर ग्रामीण डटे, पांचवें दिन भी जारी सत्याग्रह
इटावा के शेखूपुर जखोली में स्थायी रास्ते की मांग पर ग्रामीण डटे हैं। रेलवे अंडरपास में जलभराव से परेशान लोगों का सत्याग्रह पांचवें दिन भी जारी रहा।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 17 अगस्त 2026
जनपद इटावा के विकासखंड बढ़पुरा की ग्राम पंचायत शेखूपुर जखोली में आवागमन के स्थायी रास्ते की मांग को लेकर ग्रामीणों का “रास्ता दो या मौत” बैनर तले चल रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह सोमवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। रेलवे अंडरपास में लंबे समय से बने जलभराव की समस्या ने स्थानीय लोगों के जीवन को मुश्किल बना दिया है, जिससे उन्हें खेतों, स्कूल और दैनिक कामकाज तक पहुंचने में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि उनकी आजीविका, बच्चों की शिक्षा और संपूर्ण दैनिक जीवन से जुड़ी एक विकट स्थिति है।
सत्याग्रह को संबोधित करते हुए संयोजक दीपक राज ने बताया कि आंदोलन के पांचवें दिन भी ग्रामीणों का आक्रोश और अपनी मांग को लेकर उनका संकल्प अडिग है। उन्होंने जानकारी दी कि चौथे चरण से भूख-हड़ताल पर बैठे देवशरण बरुआ, पवन बरुआ और अनुज तिवारी ने सोमवार को भी अपना अनशन जारी रखा। इनके साथ गिरजेश तिवारी और हैप्पी पंडित ने भी भूख-हड़ताल शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनके लिए आवागमन का एक स्थायी और सुगम रास्ता उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक उनका यह सत्याग्रह किसी भी सूरत में समाप्त नहीं होगा।
खेतों तक पहुंचने में किसानों को भारी परेशानी
भूख-हड़ताल पर बैठे गिरजेश तिवारी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि उनके खेत रेलवे लाइन के दूसरी ओर स्थित हैं। रेलवे अंडरपास में लगातार जमा रहने वाले पानी के कारण खेतों तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान फसल के समय में खेतों की नियमित निगरानी और देखभाल अत्यंत आवश्यक है, परंतु रास्ता बाधित होने के कारण किसान अपनी ही उपजाऊ जमीन तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे फसल को नुकसान होने की आशंका बनी हुई है।
गिरजेश तिवारी ने आगे बताया कि इस समस्या का गंभीर प्रभाव बच्चों की शिक्षा पर भी पड़ रहा है। उनके बच्चे इकदिल कस्बे में स्थित विद्यालय में पढ़ने जाते हैं, लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से अंडरपास में जलभराव के कारण उनका स्कूल जाना अत्यंत दुश्वार हो गया है। उन्होंने बताया कि जब कभी उन्हें अपने बच्चों को स्कूल पहुंचाने या वापस लाने की आवश्यकता पड़ती है, तो उन्हें लगभग पांच से छह किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। इस कारण न केवल उनके कीमती समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि धन का भी अतिरिक्त व्यय हो रहा है, जो उनके लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ है।
सौ मीटर की दूरी भी बनी दुर्गम
इसी क्रम में, भूख-हड़ताल पर बैठे एक अन्य ग्रामीण, हैप्पी पंडित, ने भी अपनी गंभीर समस्या सामने रखी। उन्होंने बताया कि उनके खेत घर से मात्र लगभग सौ मीटर की दूरी पर स्थित हैं। इसके बावजूद, अंडरपास में जलभराव और उसके कारण आवागमन पूरी तरह से बंद होने की स्थिति के कारण, वह नियमित रूप से अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेत इतने करीब होने के बावजूद रास्ता अवरुद्ध होने से फसलों की उचित देखभाल करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम के दौरान अंडरपास में पानी भरने की समस्या उनके लिए कोई नई नहीं है। उनका आरोप है कि जलभराव के कारण यह रास्ता लंबे समय तक आवागमन के लिए बाधित रहता है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर किसानों की फसलों पर और स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। ग्रामीण अब इस समस्या का एक स्थायी और दीर्घकालिक समाधान चाहते हैं, ताकि भविष्य में उन्हें ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।
‘रास्ता मिलने तक थमेगा नहीं सत्याग्रह’
सत्याग्रह संयोजक दीपक राज ने ग्रामीणों के दृढ़ संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस बार गांववासी अपनी मांग को लेकर पूरी तरह से दृढ़ हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांव के लोग इस बात पर अड़े हैं कि जब तक उन्हें आवागमन का एक सुगम और स्थायी रास्ता नहीं मिल जाता, तब तक उनकी भूख-हड़ताल और सत्याग्रह अनवरत रूप से जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, “हमारे आंदोलन बैनर पर स्पष्ट रूप से ‘रास्ता दो या मौत’ लिखा है। वर्तमान स्थिति में, रास्ते के अभाव में हमारा जीवन ही मौत के समान बना हुआ है। हमारा सत्याग्रह केवल तभी समाप्त होगा, जब हमें हमारी मांग के अनुसार आवागमन का रास्ता उपलब्ध कराया जाएगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रामीण अपनी मांग से पीछे हटने वाले नहीं हैं और समस्या का समाधान होने तक आंदोलन को जारी रखने का सामूहिक निर्णय लिया गया है।
मंगलवार से अनशन पर बैठेंगे नए ग्रामीण
दीपक राज के अनुसार, इस आंदोलन को और गति प्रदान करते हुए, मंगलवार को महेंद्र सिंह, हरीशंकर, दिनेश बरुआ, आशीष अग्निहोत्री और योगेन्द्र कुमार जैसे ग्रामीण भूख-हड़ताल पर बैठेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने और अंडरपास में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की पुरजोर मांग की है।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि रास्ते की समस्या का समाधान हो जाता है, तो इससे न केवल किसानों को अपने खेतों तक सुगमता से पहुंचने में मदद मिलेगी, बल्कि बच्चों की स्कूल तक पहुंच भी सुचारू हो सकेगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों की दैनिक आवाजाही आसान होगी और आपातकालीन परिस्थितियों में एम्बुलेंस या अन्य आवश्यक वाहनों का आवागमन भी सुचारू रूप से संभव हो सकेगा। पांचवें दिन भी जारी इस सत्याग्रह के बीच, अब सभी ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं, और वे एक सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे हैं।
