इटावा में सातवें दिन भी जारी जलभराव सत्याग्रह, ग्रामीणों की सड़क की मांग
इटावा के शेखूपुर जखोली गांव में जलभराव से परेशान ग्रामीण सातवें दिन भी 'रास्ता दो या मौत' के नारे तले सत्याग्रह कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग आवागमन के लिए सुगम रास्ते की है।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 19 अगस्त 2026
जनपद इटावा के विकासखंड बढ़पुरा स्थित ग्राम पंचायत शेखूपुर जखोली में जलभराव की विकराल समस्या से जूझ रहे ग्रामीणों का आंदोलन बुधवार को सातवें दिन भी जारी रहा। 'रास्ता दो या मौत' के बैनर तले ग्रामीण अपनी आवाज उठाने के लिए सत्याग्रह कर रहे हैं, जिसमें वे प्रशासन से आवागमन के लिए सुगम मार्ग उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। लंबे समय से इस समस्या से परेशान निवासियों के लिए यह आंदोलन अब उनके दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग बन गया है, जो उनकी शिक्षा, व्यवसाय और कृषि पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।
सत्याग्रह में शामिल फूलकुमारी, बेबी, लज्जावती, रामरती और राजवती जैसी पीड़ित महिलाओं ने भूख हड़ताल में हिस्सा लेकर अपनी व्यथा सुनाई। उन्होंने बताया कि जलभराव के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। बच्चों का इकदिल स्थित विद्यालय जाना दूभर हो गया है, और स्थानीय बाजार में भी नियमित रूप से पहुंचना मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ी परेशानी रेलवे लाइन के दूसरी ओर जाने में हो रही है, जिससे खेती-किसानी से जुड़े आवश्यक कार्य भी बाधित हो रहे हैं। किसानों ने चिंता व्यक्त की है कि धान की फसल खेतों में खड़ी है, लेकिन समय पर खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि सामग्री पहुंचाना अत्यंत कठिन हो रहा है। यदि फसल की समय पर देखभाल नहीं हुई, तो उत्पादन और आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
आवागमन की सुगम राह की मुख्य मांग
सत्याग्रह के संयोजक दीपक राज ने बताया कि आंदोलन के सातवें दिन भी ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी समस्याओं को प्रशासन और जन प्रतिनिधियों के समक्ष रखने का प्रयास किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांग आवागमन के लिए एक उचित और सुगम रास्ते की व्यवस्था करना है। यह रास्ता बच्चों की शिक्षा, बाजार आने-जाने और खेती-किसानी के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करेगा।
दीपक राज के अनुसार, ग्रामीण वर्षों से जलभराव की समस्या से त्रस्त हैं। समस्या का कोई स्थायी समाधान न होने के कारण लोगों में गहरा आक्रोश पनप रहा है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने, तत्काल मौके का निरीक्षण करने, जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था करने और आवागमन के लिए एक स्थायी समाधान खोजने की अपील की है। ग्रामीणों की मांग है कि उनकी समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए और यथाशीघ्र समाधान निकाला जाए।
सपा नेताओं ने किया समर्थन का ऐलान
इस आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिलने लगा है। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रदीप शाक्य 'बबलू', जिला महासचिव वीरू भदौरिया, चच्चू शुक्ला, जिला सचिव प्रवीण कुशवाहा, नरेंद्र प्रजापति, विवेक यादव, शीलू यादव और अंकुर यादव सहित कई पार्टी नेता धरनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना और उनके आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया।
सपा नेताओं के समक्ष ग्रामीणों ने एक बार फिर जलभराव से उत्पन्न होने वाली गंभीर परेशानियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह समस्या केवल आवागमन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा, किसानों की खेती और उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों ने नेताओं से आग्रह किया कि वे उनकी आवाज को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाएं और जल्द से जल्द समाधान सुनिश्चित कराने में मदद करें।
ग्रामीणों ने एक बार फिर प्रशासन से जलभराव की समस्या का तत्काल समाधान करने की मांग दोहराई है। साथ ही, रेलवे लाइन के उस पार आने-जाने के लिए एक सुरक्षित और सुगम रास्ते की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगें पूरी नहीं हो जातीं और समस्या का ठोस समाधान नहीं निकल आता, तब तक उनका सत्याग्रह इसी प्रकार जारी रहेगा। यह स्थिति स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, जहां जन आक्रोश लगातार बढ़ रहा है।
