इटावा में आप ने फूंका केंद्र सरकार का पुतला, युवाओं के मुद्दे उठाए
आम आदमी पार्टी ने इटावा में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी जिलाध्यक्ष संजीव शाक्य ने सोनम वांगचुक पर लाठीचार्ज, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 31 अगस्त 2026
आम आदमी पार्टी (आप) ने इटावा में जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के साथ कथित दुर्व्यवहार और युवाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी के जिलाध्यक्ष संजीव शाक्य ने कहा कि सरकार का यह रवैया सत्ता के अहंकार को दर्शाता है, जहाँ किसानों, महिलाओं और युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाठियों और आंसू गैस के गोलों का प्रयोग कर विरोध प्रदर्शनों को कुचला जा रहा है।
शाक्य ने देश में व्याप्त बेरोजगारी और लगातार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में सोनम वांगचुक का अनशन इस बात का संकेत है कि सरकार को युवाओं की समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास के लिए युवाओं का भविष्य सुरक्षित होना और उनकी आवाज़ को सुना जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और जांच की मांग
संजीव शाक्य ने कहा कि इन मांगों के समर्थन में और सोनम वांगचुक के संकल्प के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए देशभर के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं। आप जिलाध्यक्ष ने तत्काल प्रभाव से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने सोनम वांगचुक और युवाओं पर हुए कथित लाठीचार्ज व जबरन कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच कराने की भी मांग उठाई।
सख्त कानून और रोजगार की गारंटी पर जोर
प्रदर्शन के दौरान, संजीव शाक्य ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ को रोकने के लिए 'पेपर लीक' के खिलाफ कड़े कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने हेतु ठोस नीतियां बनाए जाने की भी मांग की। आप नेताओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की भी वकालत की, जो जंतर-मंतर जैसी जगहों पर अभिव्यक्ति का माध्यम हैं।
गौरतलब है कि सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसमें उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। स्वास्थ्य कारणों से उन्हें 18 जुलाई 2026 को अस्पताल ले जाया गया था और उन्होंने 23 जुलाई 2026 को अपनी 26-दिवसीय भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी। इसी क्रम में, धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा, सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और धोखाधड़ी को रोकने के लिए 1 अगस्त 2026 को 'लोक परीक्षाओं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026' लागू किया है।
