इटावा: 25 दिन से लापता युवती, मां ने SSP से की महिला SI पर कार्रवाई की गुहार
इटावा के सैफई क्षेत्र में 25 दिन से लापता युवती के मामले में पुलिस की निष्क्रियता सामने आई है। युवती की मां ने महिला सब-इंस्पेक्टर पर उत्पीड़न और रिश्वतखोरी का आरोप लगाते हुए SSP से न्याय की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | इटावा | 23 अगस्त 2026
उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में एक युवती के पिछले 25 दिनों से लापता होने का मामला सामने आया है। युवती के परिजनों ने स्थानीय पुलिस पर निष्क्रियता का गंभीर आरोप लगाया है, खासकर एक महिला उप-निरीक्षक पर अभद्रता और रिश्वतखोरी का इल्जाम लगाया गया है। अपनी बेटी की सकुशल बरामदगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की गुहार लगाते हुए, युवती की मां ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), इटावा से मदद की अपील की है।
पीड़ित महिला का आरोप है कि उनकी बेटी 28 जुलाई 2026 को पास के डिग्री कॉलेज में फीस जमा करने के लिए निकली थी और तब से लापता है। घर की तलाशी लेने पर पता चला कि बेटी अपने साथ करीब 20,000 रुपये नकद, डेढ़ लाख रुपये की सोने की बालियां, 50,000 रुपये की सोने की अंगूठी और 25,000 रुपये की चांदी की पायल भी ले गई थी। इस घटना की लिखित शिकायत 28 जुलाई को ही थाना सैफई पुलिस को दी गई थी।
पुलिस की कथित निष्क्रियता और महिला SI पर गंभीर आरोप
शिकायत के अनुसार, जांच की जिम्मेदारी उप-निरीक्षक सुमन पाल को सौंपी गई थी। हालांकि, महिला का आरोप है कि सुमन पाल ने न तो कोई सक्रिय जांच की और न ही कॉलेज जाकर घटनास्थल का मुआयना किया। इतना ही नहीं, महिला का दावा है कि उप-निरीक्षक ने उनकी शिकायत का आवेदन पत्र भी खो दिया। जब पीड़िता अपनी बेटी की जानकारी के लिए पति के साथ थाने गईं, तो उप-निरीक्षक सुमन पाल ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, उन्हें गालियां दीं और झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी।
बाद में, उप-जिलाधिकारी (CO) सैफई से शिकायत करने के बाद, 31 जुलाई 2026 को युवती की गुमशुदगी दर्ज की गई। हालांकि, चिंताजनक बात यह है कि इस मामले की जांच भी उसी उप-निरीक्षक सुमन पाल को सौंपी गई, जिसने कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की। पीड़िता को बाद में पता चला कि एक युवक उन्हें बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। युवती के परिजनों ने उस युवक और उससे जुड़े लोगों के मोबाइल नंबर भी पुलिस को दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
आर्थिक लाभ के लिए कार्रवाई में देरी का आरोप
पीड़ित महिला का आरोप है कि उप-निरीक्षक सुमन पाल ने विपक्षी पक्ष से आर्थिक लाभ लेकर उनकी बेटी की बरामदगी के लिए कोई कदम नहीं उठाया। गुमशुदगी दर्ज होने के 13 दिनों के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़िता ने पुनः CO सैफई से शिकायत की। इसके बाद, 12 अगस्त 2026 को मुअस 182/26, धारा 87 के तहत मामला दर्ज किया गया। महिला का यह भी आरोप है कि थाना सैफई के प्रभारी निरीक्षक ने आरोपी युवक के पिता को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन उप-निरीक्षक सुमन पाल ने उनसे भी आर्थिक लाभ लेकर कोई पूछताछ नहीं की और उन्हें छोड़ दिया।
गुजर-बसर की आस खत्म, आत्महत्या की चेतावनी
पीड़िता के अनुसार, उन्हें जानकारी मिली है कि आरोपी युवक ने उनकी बेटी से जबरन कोर्ट मैरिज कर ली है और उसे गाजियाबाद में अपने एक रिश्तेदार के घर बंधक बनाकर रखा है। महिला का मानना है कि यदि उप-निरीक्षक सुमन पाल ने समय रहते युवक को गिरफ्तार कर लिया होता और उनकी बेटी को बरामद कर लिया होता, तो आज उनकी बेटी की जिंदगी बर्बाद न होती। पुलिस की निष्क्रियता और समाज के ताने-बाने से परेशान होकर, पीड़िता ने कहा कि वे अब पति-पत्नी दोनों जीना नहीं चाहते हैं और आत्महत्या ही एकमात्र समाधान बचा है। उन्होंने उप-निरीक्षक से गुहार लगाई थी कि एक बार उनकी बेटी को उनके सामने खड़ा कर दें, ताकि वह खुद बता सके कि उसने अपनी मर्जी से शादी की है, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस गंभीर मामले में, पीड़िता ने SSP इटावा से अपनी बेटी की सकुशल बरामदगी सुनिश्चित करने और महिला उप-निरीक्षक सुमन पाल के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह की त्रासदी का सामना न करना पड़े।
