इटारसी में शिवमहापुराण कथा: समुद्र मंथन और नीलकंठ का प्रसंग
इटारसी में चल रही शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन आचार्य नवल किशोर शास्त्री ने समुद्र मंथन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग सुनाए। कथा 12 अगस्त तक चलेगी।

द क्लिफ न्यूज़ | इटारसी | 9 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश के इटारसी स्थित वृंदावन गार्डन में चल रही संगीतमय श्री शिवमहापुराण कथा के तीसरे दिन आज समुद्र मंथन के प्रसंग को विस्तार से सुनाया गया। वृंदावन धाम से पधारे आचार्य परम श्रद्धेय पं श्री नवल किशोर जी शास्त्री ने कथावाचन करते हुए कहा कि देवताओं और असुरों ने क्षीर सागर में अमृत की प्राप्ति के लिए यह महान मंथन किया था। मंदराचल पर्वत को मथानी और वासुकी नाग को रस्सी बनाया गया था, जबकि भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण कर पर्वत को सहारा दिया था।
कथा के दौरान आचार्य शास्त्री ने बताया कि इस ऐतिहासिक मंथन के दौरान कालकूट विष (हलाहल) सहित कुल 14 रत्न और दिव्य शक्तियां निकलीं। सृष्टि को उस विष के विनाशकारी प्रभाव से बचाने के लिए भगवान शिव ने स्वयं उसे अपने कंठ में धारण कर लिया था। इसी कारण उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा। इस प्रसंग ने उपस्थित श्रद्धालुओं को सृष्टि की रक्षा में भगवान शिव के योगदान का स्मरण कराया।
भव्य आरती और भजनों का दौर
कथावाचक ने बताया कि दुर्वासा ऋषि के श्राप से बलहीन हुए देवताओं को पुनः शक्ति प्रदान करने के उद्देश्य से भगवान विष्णु की सलाह पर यह मंथन संपन्न हुआ था। कथा के दौरान शिव भजनों पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते हुए आनंदित हो रहे थे। वातावरण 'हर हर महादेव' और 'ॐ नमः शिवाय' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। कथा के अंत में भगवान भोलेनाथ की भव्य आरती की गई और प्रसाद वितरित किया गया।
विवाह प्रसंग की उत्सुकता
आचार्य नवल किशोर जी शास्त्री ने बताया कि आगामी कथा में भगवान शिव के विवाह का प्रसंग सुनाया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगा। यह कथा 12 अगस्त तक चलेगी। कथा के साथ-साथ पंडित अरुण शास्त्री जी द्वारा लगातार सवा लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण एवं महारुद्राभिषेक पूजन कार्य भी संपादित किया जा रहा है।
विश्व हिंदू परिषद के जिला प्रचार प्रसार प्रमुख अनुरुद्ध चंसौरिया ने सभी सनातनी बंधुओं और धर्म प्रेमी सज्जनों से अधिक से अधिक संख्या में कथा में उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित करने का निवेदन किया है।
