इटारसी: महिला वेंडर की दुकान हटाने पर पालिका की निष्पक्ष जांच की मांग
इटारसी में नगर पालिका द्वारा एक महिला स्ट्रीट वेंडर की मनिहारी की दुकान हटाने की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। महिला ने बिना नोटिस और सुनवाई के दुकान हटाई जाने का आरोप लगाया है।

द क्लिफ न्यूज़ | इटारसी | 30 जुलाई 2026
इटारसी के बाजार क्षेत्र में नगर पालिका द्वारा एक महिला स्ट्रीट वेंडर की दुकान हटाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। श्रीमती लीला बाई, जो पिछले लगभग 16 वर्षों से तालाब के समीप मनिहारी (बिंदी, चूड़ी आदि) का व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं, ने आरोप लगाया है कि उनकी दुकान को जेसीबी मशीन से हटा दिया गया। महिला का दावा है कि उनके पास इस व्यवसाय के लिए नगर पालिका द्वारा जारी तहबाजारी/पंजीयन से संबंधित दस्तावेज भी मौजूद हैं।
श्रीमती लीला बाई ने इस कार्रवाई को मनमाना बताते हुए कहा कि उन्हें न तो कार्रवाई से पूर्व कोई लिखित नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर मिला। उन्होंने यह भी बताया कि कार्रवाई के दौरान उनकी दुकान और उसमें रखा सामान क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। महिला ने यह भी इंगित किया कि उनके आसपास अन्य दुकानें भी संचालित हो रही थीं, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
निष्पक्ष जांच और विधिक प्रक्रिया की मांग
इस प्रकरण में अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धार्थ महेश आर्य ने नगर पालिका की कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की कार्रवाई की जाती है, तो वह पूर्णतः विधि एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए। श्री आर्य ने जोर देकर कहा कि इस मामले में सामने आए तथ्यों की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय हुआ है, तो उसे न्याय मिल सके।
अधिवक्ता सिद्धार्थ महेश आर्य ने बताया कि इस संबंध में जिला कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को जनसुनवाई के माध्यम से एक आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इस आवेदन में मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित अभिलेखों की गहन पड़ताल और आवश्यक विधिक कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रशासन द्वारा की जाने वाली प्रत्येक कार्रवाई कानून के अनुरूप, पारदर्शी और समान रूप से होनी चाहिए, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। श्री आर्य के अनुसार, यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित पीड़ित को विधि अनुसार राहत प्रदान की जानी चाहिए।
