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पूर्व IPS मैथिली शरण गुप्ता नई विवादों में घिरे: चुनावी हलफनामे में संपत्ति विवरण छिपाने का आरोप

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से नेता बने मैथिली शरण गुप्ता एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर चुनाव लड़ने वाले इस...

Nov 25
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पूर्व IPS मैथिली शरण गुप्ता नई विवादों में घिरे: चुनावी हलफनामे में संपत्ति विवरण छिपाने का आरोप

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से नेता बने मैथिली शरण गुप्ता एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर चुनाव लड़ने वाले इस पूर्व विशेष डीजीपी पर अब संपत्ति विवरण ग़लत तरीके से प्रस्तुत करने और बाजार मूल्य को कम दर्शाने के आरोप लगे हैं। मामला निर्वाचन आयोग और आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) तक पहुंच गया है।


शिकायत में गंभीर आरोप—संपत्ति का मूल्य और पंजीयन वर्ष छिपाने का दावा

शिकायतकर्ता माधव गुप्ता, जो भोपाल के कोलार रोड स्थित डेनिश कुंज में पूर्व IPS अधिकारी के पड़ोसी हैं, ने आरोप लगाया है कि 2024 लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय मैथिली शरण गुप्ता ने अपने बंगले के स्वामित्व और मूल्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को हलफनामे में सही तरीके से दर्ज नहीं किया।

शिकायत के अनुसार,

  • गुप्ता ने Election Affidavit में दावा किया कि उनका बंगला 1996 में खरीदा गया था और उसकी वर्तमान कीमत 3.10 करोड़ रुपये है।

  • शिकायतकर्ता द्वारा संलग्न पंजीयन दस्तावेज़ों में कथित तौर पर दिखाया गया है कि पंजीयन वास्तव में मार्च 2010 में हुआ,

  • और उस समय दिखाया गया खरीद मूल्य 3.85 लाख रुपये, जबकि उस समय का बाज़ार मूल्य लगभग 23.60 लाख रुपये था

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक दस्तावेज़ों के बाहर अतिरिक्त भुगतान किया गया, जिससे वास्तविक लेनदेन को छिपाने की कोशिश की गई।


"हलफनामे में गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध"

शिकायतकर्ता ने EOW को लिखे पत्र में कहा कि चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देना Representation of the People Act के तहत गंभीर उल्लंघन है और इसे कानूनी दुरुपयोग तथा शपथपूर्वक झूठ बोलने की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने मांग की है कि EOW संपत्ति के कागज़ात, मूल्यांकन और स्वामित्व से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करे।

शिकायत में यह भी आरोप है कि पूर्व IPS अधिकारी ने पड़ोसी के भूखंड के हिस्से पर अतिक्रमण कर अनधिकृत पार्किंग क्षेत्र बना लिया, और आपत्ति करने पर उलटा शिकायतकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी।


मैथिली शरण गुप्ता का जवाब—“आरोप राजनीतिक और व्यक्तिगत बदले की भावना से प्रेरित”

जब वरिष्ठ अधिकारी से इस मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं अवैध निर्माण में लिप्त है और इसी के खिलाफ आपत्ति दर्ज करने पर फर्जी शिकायत की गई है।

गुप्ता ने कहा:

  • “शिकायतकर्ता ने बिना अनुमति के निर्माण कराया है और कई पेड़ भी अवैध रूप से काटे हैं।”

  • “उसके निर्माण कार्य से नगर निगम की सीवर लाइन तक क्षतिग्रस्त हो चुकी है।”

  • “मैंने कश्मीर में सेवा की है, सुरक्षा जोखिमों को समझता हूं। यह शिकायत मुझे डराने और अवैध निर्माण पर आपत्ति से रोकने की कोशिश है।”


EOW की पुष्टि — शिकायत जांच के लिए लंबित

आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने पुष्टि की कि शिकायत प्राप्त हो चुकी है और प्राथमिक जांच के लिए दस्तावेज़ों का परीक्षण किया जा रहा है। संपत्ति पंजीयन वर्ष, बाजार मूल्यांकन और हलफनामे की जानकारी का मिलान किया जाएगा।

यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला आगे की कार्रवाई के लिए निर्वाचन आयोग को भेजा जा सकता है।


कौन हैं मैथिली शरण गुप्ता?

1986 बैच के IPS अधिकारी मैथिली शरण गुप्ता ने मध्य प्रदेश में विशेष डीजीपी के रूप में सेवा देने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली।
2024 लोकसभा चुनाव में वे वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उतरे थे और खुद को “राजनीतिक दखल से मुक्त पुलिसिंग और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए आवाज़” बताते रहे हैं।

गुप्ता “क्राइम एंड क्राइम-फ्री इंडिया मिशन” नामक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, जो पारदर्शिता और नैतिक शासन के मुद्दों पर काम करने का दावा करता है।


इस विवाद के व्यापक मायने

विशेषज्ञों के अनुसार चुनावी हलफनामों में संपत्ति का वास्तविक विवरण देना लोकतांत्रिक पारदर्शिता का अहम हिस्सा है।
यदि किसी पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी पर ऐसे आरोप लगते हैं, तो इससे

  • चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता,

  • नैतिक राजनीति के मानक,

  • और सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही
    जैसे मुद्दे फिर से बहस के केंद्र में आ जाते हैं।