इमरान खान की रिहाई: पीटीआई ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च की घोषणा की
इमरान खान की गिरफ्तारी के तीन साल पूरे होने पर पीटीआई 27 सितंबर को इस्लामाबाद में विशाल मार्च करेगी। देशभर में हुए प्रदर्शनों में 100 से अधिक समर्थक हिरासत में लिए गए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | इस्लामाबाद | 6 अगस्त 2026
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी के तीन वर्ष पूरे होने के अवसर पर, उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन को तेज करने का ऐलान किया है। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर एक विशाल मार्च और शक्ति प्रदर्शन आयोजित करने की घोषणा की है, जिसे इमरान खान की तत्काल रिहाई की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया जा रहा है। इस बीच, देश के विभिन्न शहरों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान 100 से अधिक पीटीआई समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है।
पीटीआई नेताओं का आरोप है कि इमरान खान को पिछले तीन वर्षों से राजनीतिक प्रतिशोध का शिकार बनाया जा रहा है और उन्हें जेल में रखा गया है। पार्टी की प्रमुख मांगों में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की तत्काल रिहाई, उन्हें कथित एकांतवास (सॉलिटरी कन्फाइनमेंट) से बाहर लाना, तथा परिवार, वकीलों और पार्टी नेताओं को नियमित मुलाकात की अनुमति देना शामिल है।
27 सितंबर को इस्लामाबाद घेरने की तैयारी
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया, तो 27 सितंबर को हजारों समर्थक इस्लामाबाद पहुंचकर एक बड़ा प्रदर्शन करेंगे। पार्टी इस आंदोलन को लोकतंत्र और न्याय की लड़ाई के रूप में प्रस्तुत कर रही है। हाल के दिनों में आयोजित की गई विभिन्न रैलियों में, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं से इस महत्वपूर्ण प्रदर्शन के लिए बड़े पैमाने पर लामबंद होने की अपील की है।
देशभर में विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी
इमरान खान के जेल में तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में, लाहौर, रावलपिंडी, पेशावर, कराची और देश के अन्य प्रमुख शहरों में पीटीआई समर्थकों ने रैलियां और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। कई स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। रावलपिंडी में, पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े, जिसके परिणामस्वरूप 100 से अधिक समर्थकों को हिरासत में लिया गया।
अलीमा खान का दृढ़ रुख
इमरान खान की बहन, अलीमा खान, ने आंदोलन को और तेज करने के इरादे का संकेत देते हुए कहा है कि उनके भाई की रिहाई के लिए संघर्ष अब अपने निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि पीटीआई कार्यकर्ता पीछे हटने वाले नहीं हैं और पार्टी शांतिपूर्ण, परंतु प्रभावी जनआंदोलन को जारी रखेगी। अलीमा खान ने यह भी आरोप लगाया कि इमरान खान को राजनीतिक रूप से अलग-थलग करने के उद्देश्य से जेल में अनावश्यक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, और उनके परिवार से मुलाकात तथा उचित चिकित्सा सुविधा भी बाधित की जा रही है।
इससे पूर्व भी अलीमा खान ने इस बात पर जोर दिया था कि यदि किसी प्रकार की राजनीतिक सहमति बनती है, तो वह केवल स्वतंत्र न्यायपालिका की बहाली और निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनावों के आधार पर ही स्वीकार्य होगी।
मानवाधिकारों पर बढ़ती चिंता
इमरान खान की जेल में रहने की परिस्थितियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई गई है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने उनके कानूनी अधिकारों और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने की मांग की है। पीटीआई का आरोप है कि जेल प्रशासन अदालत के आदेशों के बावजूद मुलाकातों और अन्य आवश्यक सुविधाओं में बाधा उत्पन्न कर रहा है, जो उनकी मानवाधिकारों की अवहेलना है।
सरकार पर बढ़ेगा राजनीतिक दबाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 27 सितंबर का प्रस्तावित मार्च बड़े पैमाने पर सफल होता है, तो पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, दूसरी ओर सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दे रही है, जबकि पीटीआई इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई बताते हुए आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यह स्थिति आगामी दिनों में सरकार पर भारी राजनीतिक दबाव बना सकती है।
