हृदय रोग अब भारत में टीबी से कहीं अधिक घातक: चौंकाने वाले आंकड़े
भारत में हर साल होने वाली मौतों में हृदय रोगों का बड़ा हिस्सा है, जबकि टीबी से होने वाली मौतों की संख्या काफी कम है। जीवनशैली में बदलाव ने स्थिति को बदला है।

द क्लिफ न्यूज़ | 7 अक्टूबर 2026
भारत में हृदय रोग, जिनमें हार्ट अटैक और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां शामिल हैं, अब तपेदिक (टीबी) की तुलना में कहीं अधिक लोगों की जान ले रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और देश के नवीनतम स्वास्थ्य आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि गैर-संक्रामक बीमारियां, विशेषकर हृदय रोग, भारत में मृत्यु दर के प्रमुख कारण बन गए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में होने वाली कुल मौतों का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 24% से 31%, हृदय संबंधी बीमारियों (CVD) के कारण होता है। हर साल लाखों लोग दिल के दौरे और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं से अपनी जान गंवा देते हैं। वैश्विक स्तर पर भी, हार्ट अटैक से होने वाली कुल मौतों का लगभग 20% अकेले भारत में दर्ज किया जाता है, जो देश के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय है।
टीबी की तुलना में हृदय रोगों का बढ़ता प्रकोप
हालांकि टीबी भारत के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है, लेकिन कुल मृत्यु दर के मामले में यह हृदय रोगों के बाद दूसरे स्थान पर आती है। सरकारी और वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, भारत में टीबी से प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख लोगों की मृत्यु होती है। यह आंकड़ा हृदय रोगों से होने वाली कुल वार्षिक मौतों की संख्या की तुलना में काफी कम है।
यह स्थिति एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है। पहले के दशकों में, संक्रामक रोग जैसे टीबी, मृत्यु का प्रमुख कारण हुआ करते थे। हालांकि, अब भारत में गैर-संक्रामक बीमारियां 'सबसे बड़े हत्यारे' के रूप में उभरी हैं। इनमें यकृत (लिवर) संबंधी रोग, मधुमेह (डायबिटीज) और मुख्य रूप से हृदय रोग शामिल हैं।
युवाओं में बढ़ रहा हृदय रोगों का खतरा
जीवनशैली में आए नकारात्मक बदलाव, जैसे खराब खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, अत्यधिक तनाव और उच्च रक्तचाप (High BP) एवं मधुमेह जैसी स्थितियां, भारत में हृदय रोगों के बढ़ते मामलों के पीछे प्रमुख कारण हैं। चिंताजनक बात यह है कि इन जोखिमों के कारण अब युवाओं में भी हार्ट अटैक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
