सतना अस्पताल HIV त्रासदी: अवैध पेड डोनर्स की सिफारिश करने वाली जांच रिपोर्ट पर मचा बवाल
सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने के मामले में आई जांच रिपोर्ट में अवैध पेड डोनर्स को बढ़ावा देने की...

मुख्य बिंदु:
- क्या हुआ: सतना जिला अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्त चढ़ाने) के बाद थैलेसीमिया पीड़ित छह बच्चे एचआईवी (HIV) संक्रमित हो गए, जिससे हड़कंप मच गया है और एक बड़ी जांच शुरू की गई है।
- यह क्यों महत्वपूर्ण है: 270 पन्नों की इस जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तरीके से पैसे लेकर खून देने वाले (पेड प्रोफेशनल ब्लड डोनर्स) को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर लगे कानूनी प्रतिबंध का सीधा उल्लंघन है।
- क्या बदलाव आया है: अस्पताल प्रबंधन ब्लड दलालों के सक्रिय नेटवर्क को न रोक पाने और सुरक्षा संबंधी जांच में लापरवाही बरतने के लिए भारी जांच के दायरे में है।
- कौन प्रभावित है: थैलेसीमिया मरीज, अस्पताल के अधिकारी और छह सदस्यीय जांच पैनल सीधे तौर पर जवाबदेही और कानूनी सवालों के घेरे में हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों का चौंकाने वाला उल्लंघन
मध्य प्रदेश में सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित छह मासूम बच्चों के एचआईवी (HIV) संक्रमित होने की जांच के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, 270 पन्नों की इस प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अवैध रूप से पैसे लेकर खून देने वाले डोनर्स को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।
यह रिपोर्ट 31 दिसंबर, 2025 को स्वास्थ्य आयुक्त को सौंपी गई थी। यह सिफारिश सीधे तौर पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों का उल्लंघन करती है, जो पूरे भारत में पैसों के बदले रक्तदान करने पर सख्त कानूनी प्रतिबंध लगाते हैं।
जांच समिति और उसकी विवादित सिफारिशें
यह गंभीर मामला 16 दिसंबर, 2025 को सामने आया, जब ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद छह बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। अगले ही दिन छह सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया, जिसने 14 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप दी।
इस जांच का नेतृत्व राज्य रक्त संचरण परिषद (SBTC) के तत्कालीन निदेशक और आयुष्मान भारत के पूर्व सीईओ डॉ. योगेश भरसट ने किया, जो वर्तमान में झाबुआ के कलेक्टर हैं।
समिति की विवादित सिफारिश में कहा गया कि "हर परिस्थिति में व्यावसायिक तौर पर पैसे लेकर खून देने वाले डोनर्स (पेड डोनर्स) से रक्त लिया जाना चाहिए और अस्पताल परिसर के भीतर इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए," जिससे चारों तरफ आक्रोश फैल गया है।
रिपोर्ट के विवरण पर आपस में भिड़े जांच समिति के सदस्य
अंतिम रिपोर्ट में शामिल इस अवैध सिफारिश को लेकर जांच समिति के सदस्यों ने विरोधाभासी बयान दिए हैं।
"थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के एचआईवी संक्रमित होने की जांच रिपोर्ट... सौंप दी गई है। रिपोर्ट में क्या सिफारिशें की गई हैं, यह मैं रिपोर्ट देखने के बाद ही बता पाऊंगा।"
— डॉ. योगेश भरसट, कलेक्टर, झाबुआ
इसके विपरीत, समिति की एक अन्य प्रमुख सदस्य ने आधिकारिक दस्तावेज में ऐसी किसी भी सिफारिश के होने से साफ इनकार किया है।
"किसी भी परिस्थिति में पैसे लेकर खून देने वाले डोनर्स से रक्त नहीं लिया जाना चाहिए। रिपोर्ट में यही लिखा होना चाहिए। रिपोर्ट में यह नहीं लिखा है कि पेड प्रोफेशनल डोनर्स से रक्त लिया जाए।"
— डॉ. रूबी खान, उप निदेशक, राज्य रक्त संचरण परिषद
गंभीर प्रशासनिक कमियां और दलालों का नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि सतना जिला अस्पताल परिसर के भीतर खून के दलालों (पेड प्रोफेशनल डोनर्स) का एक सक्रिय नेटवर्क बेखौफ होकर काम कर रहा था। अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें रोकने का कोई प्रयास नहीं किया, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ गई।
समिति ने अस्पताल अधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को इस जानलेवा लापरवाही के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
जांच में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं:
- लावारिस पड़ी सुविधाएं: हीमोग्लोबिनेपैथी केंद्र, आईसीटीसी (ICTC), एआरटी (ART) केंद्र और ब्लड सेंटर पूरी तरह से बिना किसी निगरानी के चल रहे थे।
- शून्य निरीक्षण: प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था और ब्लड स्टोरेज प्रोटोकॉल की कभी भी लगातार जांच नहीं की गई।
- जागरूकता का अभाव: खून बेचने के मामले में पूर्व में पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज होने के बावजूद, अस्पताल ने मरीजों को मुफ्त, सुरक्षित और स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
जांच समिति के सदस्य
सतना जिला अस्पताल की खामियों की जांच करने वाले छह सदस्यीय पैनल में शामिल हैं:
- डॉ. योगेश भरसट: समिति के अध्यक्ष और पूर्व निदेशक, राज्य रक्त संचरण परिषद
- डॉ. रूबी खान: उप निदेशक, राज्य रक्त संचरण परिषद
- डॉ. सत्य अवधिया: क्षेत्रीय निदेशक, रीवा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग
- डॉ. सीमा नावेद: वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, ब्लड सेंटर, बीएमएचआरसी (BMHRC), भोपाल
- संजीव जादौन: वरिष्ठ औषधि निरीक्षक (ड्रग इंस्पेक्टर), नर्मदापुरम
- प्रियंका चौबे: औषधि निरीक्षक, सतना
आगे क्या देखना होगा
स्वास्थ्य आयुक्त से 270 पन्नों की इस प्रारंभिक रिपोर्ट की समीक्षा करने और पेड डोनर्स से जुड़ी अवैध सिफारिशों पर कड़ी कार्रवाई करने की उम्मीद है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सतना जिला अस्पताल में तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई और संस्थागत सुधारों की मांग की है। इसके साथ ही, अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना होगा कि एक प्रतिबंधित सिफारिश को सरकारी जांच रिपोर्ट में कैसे शामिल किया गया।
