हिमाचल: पुरानी पेंशन के बाद अब पेट्रोल-डीजल की महंगाई पर कांग्रेस सरकार घिरी
चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली का वादा कर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार पर अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने हमला बोला है।

संवाददाता: कमलेश मेहरा
द क्लिफ न्यूज़ | शिमला | 13 अगस्त 2026
हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) के वादे पर सत्तासीन हुई कांग्रेस सरकार अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों और राजनीतिक आलोचकों के निशाने पर आ गई है। विधानसभा चुनाव के दौरान कर्मचारियों के लिए ओपीएस की बहाली को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने वाली कांग्रेस के सामने अब आर्थिक प्रबंधन और आम जनता पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणापत्र में पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा किया था, जिससे कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग का समर्थन हासिल हुआ था। सरकार बनने के बाद ओपीएस बहाली की घोषणा भी की गई। हालांकि, प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति, कर्मचारियों के वेतन-भत्ते और सरकारी खर्च में निरंतर वृद्धि के बीच ओपीएस के वित्तीय प्रभावों को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।
ईंधन कीमतों में वृद्धि से विपक्ष हमलावर
इस बीच, प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमलावर होने का एक और मौका दे दिया है। राजनीतिक आलोचकों का दावा है कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कई बार ईंधन की कीमतों में वृद्धि की गई है, जिसमें एक अवसर पर यह बढ़ोतरी लगभग चार रुपये प्रति लीटर तक बताई गई है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इस तरह की वृद्धि का सीधा असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। परिवहन लागत, माल ढुलाई और रोजमर्रा के उपभोग की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है। विपक्ष, सरकार पर आर्थिक कुप्रबंधन का आरोप लगा रहा है और आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की बात कह रहा है।
सरकार का पक्ष और आर्थिक चुनौतियां
वहीं, कांग्रेस सरकार की ओर से इन फैसलों को प्रदेश की आर्थिक परिस्थितियों और राजस्व की आवश्यकता से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का तर्क है कि पिछली सरकार से विरासत में मिली आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए विकास कार्यों और कर्मचारियों से जुड़े दायित्वों को पूरा करने के लिए आवश्यक राजस्व जुटाना एक चुनौती है।
पुरानी पेंशन योजना की बहाली और ईंधन की कीमतों में वृद्धि, ये दोनों मुद्दे अब हिमाचल की राजनीति में एक-दूसरे से जुड़े हुए प्रतीत हो रहे हैं। जहां एक ओर कर्मचारी वर्ग पुरानी पेंशन को अपनी सामाजिक सुरक्षा के अधिकार के रूप में देखता है, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ता पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को सीधे अपने घरेलू बजट पर मार के तौर पर अनुभव कर रहा है।
ईंधन महंगाई और राज्य के आर्थिक प्रबंधन से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति में सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं।
