हेमा सरदेसाई का खुलासा: कास्टिंग काउच के कारण छोड़ी बॉलीवुड की दुनिया, अध्यात्म को अपनाया
गायिका हेमा सरदेसाई ने बॉलीवुड में कास्टिंग काउच के अनुभवों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि काम के बदले समझौते के प्रस्तावों को ठुकराने के बाद उन्होंने फिल्म और संगीत उद्योग से दूरी बना ली और अध्यात्म की राह चुनी।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 27 जुलाई 2026
प्रसिद्ध गायिका हेमा सरदेसाई ने मनोरंजन उद्योग में व्याप्त कास्टिंग काउच की समस्या पर अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया है कि कैसे काम के बदले अनुचित समझौते के दबावों के कारण उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया और अध्यात्म की ओर रुख किया। सरदेसाई, जिन्होंने 'बादल पे पांव है' और 'आवारा भंवरे' जैसे कई हिट गाने दिए हैं, ने यह खुलासा एक साक्षात्कार के दौरान किया।
गायिका ने स्पष्ट किया कि कास्टिंग काउच की समस्या केवल अभिनेताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गायकों को भी इससे गुजरना पड़ता है। उन्होंने अपने करियर में ऐसे कई मौकों का जिक्र किया जब उन्हें काम दिलाने के एवज में गलत प्रस्ताव दिए गए। हालांकि, हेमा सरदेसाई ने हर बार ऐसे प्रस्तावों को दृढ़ता से ठुकरा दिया। उनका कहना था कि यदि उन्हें ऐसे समझौते करने पड़ते तो वह उस अवसर को छोड़ने में हिचकिचाती नहीं थीं।
संगीत उद्योग में बाहरी दबाव और सिद्धांत
हेमा सरदेसाई ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि संगीत उद्योग में निर्णय सिर्फ संगीत निर्देशकों तक सीमित नहीं होते, बल्कि कई अन्य प्रभावशाली व्यक्ति भी कलाकारों के करियर को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने अपने फैसलों में हमेशा आत्मसम्मान और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने की बात कही। उनके अनुसार, हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल मिलता है और उन्होंने व्यक्तिगत सिद्धांतों से समझौता न करने का निर्णय लिया।
आरोप लगाने में सावधानी की आवश्यकता
कास्टिंग काउच जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बात करते हुए हेमा सरदेसाई ने सार्वजनिक मंचों पर अधिक सावधानी और जिम्मेदारी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर 'रेपिस्ट' या 'मोलेस्टर' जैसे गंभीर आरोप लगाना एक बड़ी बात है और इसके लिए पर्याप्त तथ्यों का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अपने एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट में किसी को क्लीन चिट नहीं दी थी, लेकिन बिना ठोस प्रमाण के किसी पर भी गंभीर आरोप लगाने से परहेज किया था।
बॉलीवुड से दूरी और अध्यात्म का मार्ग
फिल्म और संगीत उद्योग के कटु अनुभवों के कारण हेमा सरदेसाई ने धीरे-धीरे बॉलीवुड से अपनी दूरी बढ़ा ली। इसके बाद उन्होंने अपना शेष जीवन अध्यात्म, शिक्षण और सकारात्मक जीवन मूल्यों को समर्पित कर दिया। उनका मानना है कि आत्मसम्मान और नैतिक सिद्धांतों के साथ लिए गए निर्णय अंततः व्यक्ति को मानसिक शांति और संतोष प्रदान करते हैं।
हेमा सरदेसाई के इस खुलासे ने एक बार फिर मनोरंजन जगत में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और कास्टिंग काउच जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष का नाम लिए बिना या किसी नए आरोप का उल्लेख किए बिना, कलाकारों को अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने और गंभीर आरोप लगाते समय जिम्मेदारी का ध्यान रखने का संदेश दिया है।
