हरभजन सिंह बोले- गौतम गंभीर कड़वा सच कहते हैं, इसलिए खटकते हैं
पूर्व भारतीय ऑफ-स्पिनर हरभजन सिंह ने टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि गंभीर की स्पष्टवादिता ही उनकी खूबी है, भले ही वह कड़वा सच हो।

द क्लिफ न्यूज़ | 14 अगस्त 2026
भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर को वर्तमान में टीम के प्रदर्शन को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच, पूर्व भारतीय ऑफ-स्पिनर हरभजन सिंह ने गंभीर का पुरजोर समर्थन करते हुए उनके मुखर और स्पष्टवादी स्वभाव की सराहना की है। हरभजन के अनुसार, गंभीर की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वह अपनी बात सीधे रखते हैं, जो कई बार लोगों को कड़वा लग सकता है, लेकिन यह सच होता है।
हरभजन सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि गंभीर की स्पष्टवादिता को उनके इरादों की कठोरता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “गंभीर उन लोगों में से हैं जो बात को घुमा-फिराकर कहने के बजाय सीधे अपनी बात रखते हैं। कई बार उनकी यही बेबाकी लोगों को कठोर लगती है, लेकिन हरभजन का मानना है कि गंभीर जो कहते हैं, वह कड़वा सच होता है। हर किसी के लिए सच सुनना आसान नहीं होता और इसी वजह से गंभीर को लेकर आलोचना भी होती रहती है।”
जीत के प्रति जुनूनी और स्पष्टवादी नेतृत्व
हरभजन सिंह ने गौतम गंभीर की खेल मानसिकता को भी रेखांकित किया, जिसमें वह हमेशा जीत के लिए खेलने में विश्वास करते हैं। उनके लिए मैदान पर उतरने का अर्थ केवल भाग लेना नहीं, बल्कि जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करना है। यह दृष्टिकोण उनके क्रिकेट करियर की तरह ही उनके कोचिंग कार्यकाल में भी परिलक्षित होता है।
गंभीर के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए, हरभजन ने उनके शुरुआती दिनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जब गंभीर ने भारतीय टीम में पदार्पण किया था, तब वे काफी शर्मीले स्वभाव के थे और बहुत कम लोगों से घुलते-मिलते थे। वीरेंद्र सहवाग, अमित मिश्रा और मुनाफ पटेल जैसे कुछ ही खिलाड़ी उनके करीबी थे। हालांकि, समय के साथ, उनके व्यक्तित्व में महत्वपूर्ण बदलाव आया, और मैदान पर उनका आक्रामक रवैया और जीत के प्रति उनका जुनून उनकी पहचान बन गया। स्वयं गंभीर ने भी पूर्व में इस बात को स्वीकार किया है कि वे कूटनीतिक भाषा के बजाय सीधे और स्पष्ट संवाद को प्राथमिकता देते हैं, और उनकी नेतृत्व शैली इसी स्वाभाविक स्वभाव से प्रेरित है।
प्रदर्शन पर बहस और कोच की भूमिका
हरभजन सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर क्रिकेट जगत में बहस तेज हो गई है, विशेषकर टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, सीमित ओवरों के क्रिकेट में गंभीर के मार्गदर्शन में टीम इंडिया ने कई महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल की हैं। इस विरोधाभासी प्रदर्शन के कारण टीम प्रबंधन और कोच की भूमिका पर चर्चाएं लगातार जारी हैं।
इससे पहले भी हरभजन सिंह ने गंभीर के प्रति धैर्य रखने की वकालत की थी। उनका तर्क है कि जब टीम अच्छा प्रदर्शन करती है, तो सारा श्रेय खिलाड़ियों को मिलता है, लेकिन खराब प्रदर्शन की स्थिति में कोच अक्सर आलोचना का पहला निशाना बनता है।
साथी खिलाड़ी का समर्थन
गंभीर के समर्थन में हरभजन सिंह की बात का मूल संदेश यही है कि किसी व्यक्ति के स्वभाव की कठोरता को उसके इरादों की कठोरता नहीं माना जाना चाहिए। हरभजन के अनुसार, गंभीर के मामले में, उनकी स्पष्टवादिता, अनुशासन और जीत की तीव्र इच्छा उनके व्यक्तित्व का अभिन्न अंग हैं। क्रिकेट जैसे अत्यधिक दबाव वाले खेल में, जहां हर दिन चुनौतियां बढ़ती रहती हैं, हरभजन का मानना है कि गंभीर की यही स्पष्ट सोच अंततः टीम को बेहतर दिशा दे सकती है।
इस पूरे विवाद के बीच हरभजन का समर्थन गौतम गंभीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों खिलाड़ियों ने भारतीय क्रिकेट के उस स्वर्णिम दौर को करीब से देखा है जब उन्होंने एक साथ खेलते हुए टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। इसलिए, गंभीर के व्यक्तित्व और कार्यशैली पर हरभजन सिंह की राय किसी बाहरी व्यक्ति की राय न होकर, लंबे समय तक उनके साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने वाले एक साथी खिलाड़ी की राय है, जिसका गहरा महत्व है।
