BREAKING
Revolutionary climate technology breakthrough announced • Championship finals draw record 150M+ viewers • Global markets surge following policy changes • New discovery in quantum computing promises faster processors
The Cliff News
Regional

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरी हड़ताल से ओपीडी प्रभावित, 1400 से अधिक मरीज बिना इलाज लौटे

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरी हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं चरमरा गईं। सामान्यतः 3000 मरीजों के पंजीकरण की क्षमता वाली ओपीडी में मात्र 1609 पर्चे बने, जिससे सैकड़ों मरीज बिना इलाज के लौट गए।

Few hours ago
3 मिनट में पढ़ें
हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरी हड़ताल से ओपीडी प्रभावित, 1400 से अधिक मरीज बिना इलाज लौटे

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 10 सितंबर 2026

हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरी हड़ताल का व्यापक असर स्वास्थ्य सेवाओं पर देखने को मिला है। सामान्य दिनों में जहां लगभग 3000 मरीजों के पंजीकरण वाली ओपीडी में हड़ताल के कारण केवल 1609 पर्चे ही बन सके, वहीं पंजीकरण और उपचार की व्यवस्था प्रभावित होने से इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचे सैकड़ों मरीजों को बिना डॉक्टर को दिखाए ही वापस लौटना पड़ा।

हड़ताल के चलते अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिसका सीधा असर ओपीडी में आने वाले मरीजों पर पड़ा। दूर-दराज के क्षेत्रों से उपचार के लिए पहुंचे मरीजों को पंजीकरण कराने और चिकित्सकीय परामर्श लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीजों को लंबा इंतजार करने के बावजूद उपचार नहीं मिल सका।

ओपीडी पर भारी दबाव

ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में पर्चे बनने की संख्या लगभग आधी रह जाना अस्पताल की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर दबाव को दर्शाता है। मरीजों की संख्या अधिक होने के बावजूद सीमित चिकित्सकीय स्टाफ के कारण सभी मरीजों को समय पर परामर्श देना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। इससे अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कई गुना बढ़ गई।

वैकल्पिक व्यवस्थाएं नाकाफी

हड़ताल के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने सेवाओं को सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया। जूनियर डॉक्टरों की कमी को देखते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों और प्रशासनिक डॉक्टरों की सेवाएं लेने की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, मरीजों की भारी संख्या के मुकाबले ये इंतजाम नाकाफी साबित हुए और अधिकांश मरीजों को निराश लौटना पड़ा।

प्रमुख चिकित्सा केंद्र पर संकट

हमीदिया अस्पताल भोपाल का प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है, जहां भोपाल के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल का असर केवल ओपीडी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल आने वाले मरीजों की पूरी उपचार प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित हुई। 3000 मरीजों की क्षमता वाली ओपीडी में महज 1609 पर्चे बनना यह दर्शाता है कि हड़ताल के दौरान अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना दबाव रहा। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई, जो पहले से समय और यात्रा का खर्च उठाकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन उन्हें उपचार के बिना ही वापस लौटना पड़ा।

तैयारियों पर उठे सवाल

यह हड़ताल अस्पताल की वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था की तैयारियों पर भी सवाल खड़े करती है। एक बड़े सरकारी अस्पताल में ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों के लिए पर्याप्त बैकअप व्यवस्था, प्रभावी कतार प्रबंधन और मरीजों को समय पर जानकारी देने की सुदृढ़ प्रणाली का होना अत्यंत आवश्यक है। फिलहाल, इस हड़ताल का सबसे बड़ा खामियाजा उन मरीजों को भुगतना पड़ा, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने के बाद भी आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श नहीं मिल सका।