हाईकोर्ट से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को राहत, दो याचिकाएं खारिज
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ दायर दो चुनाव याचिकाओं को खारिज कर दिया है। आरोप थे कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में संपत्ति संबंधी जानकारी छिपाई थी।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 5 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके विरुद्ध पूर्व सरपंच राजकुमार धनोरा द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया है। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों के दौरान मंत्री राजपूत ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई थी। न्यायालय ने मामले की गहन सुनवाई के बाद इन आरोपों को आधारहीन मानते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपने परिवार से संबंधित एक शिक्षा समिति की संपत्तियों का विवरण अपने शपथपत्र में शामिल नहीं किया था, जिसके आधार पर उनके निर्वाचन को चुनौती दी गई थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत, किसी भी प्रत्याशी के लिए अपनी तथा अपने आश्रितों की संपत्तियों का पूर्ण विवरण देना अनिवार्य है। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, तथ्यों और कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के उपरांत यह पाया कि याचिका में लगाए गए आरोप, किसी भी चुनाव को रद्द घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं करते। इस निष्कर्ष पर पहुँचने के पश्चात अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
संपत्ति छिपाने के आरोप, पहले भी एक याचिका खारिज
यह पहला अवसर नहीं है जब मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को इस प्रकार के आरोपों पर न्यायालय से राहत मिली हो। इससे पूर्व, कांग्रेस के तत्कालीन विधानसभा प्रत्याशी नीरज शर्मा ने भी वर्ष 2023 के चुनावी हलफनामे में संपत्ति की जानकारी छुपाने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी। उस याचिका को भी न्यायालय ने पहले ही खारिज कर दिया था। समान प्रकृति के आरोपों पर लगातार दूसरी बार उच्च न्यायालय द्वारा याचिकाएं खारिज किया जाना, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार दो याचिकाओं के खारिज होने से मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के विरुद्ध लगाए गए आरोप अब कानूनी रूप से पूरी तरह निराधार साबित हुए हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस की ओर से लगाए गए ये आरोप न्यायालय में टिक नहीं पाए। यह भी उल्लेखनीय है कि पूर्व सरपंच राजकुमार धनोरा, जिनके विरुद्ध आपराधिक प्रवृति एवं करोड़ों रुपए के गबन के आरोप भी बताए जाते हैं, पूर्व में भी मंत्री राजपूत के विरुद्ध विभिन्न मामलों में झूठे आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन उन्हें न्यायिक स्तर पर कभी भी सफलता नहीं मिली। वे सस्ती लोकप्रियता के लिए ऐसे झूठे आरोप लगाने के आदी माने जाते हैं।
मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की प्रतिक्रिया
उच्च न्यायालय के फैसले के पश्चात् मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “यह सत्य की जीत है। मुझे भारत की न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास था और आज न्यायालय के निर्णय ने एक बार पुनः सत्य को स्थापित किया है। उन्होंने आगे कहा कि मेरे विरुद्ध षड्यंत्र रचने वालों के लिए न्यायालय का यह निर्णय एक करारा जवाब है। न्यायपालिका पर मेरी आस्था पहले भी थी और भविष्य में भी बनी रहेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका सर्वोच्च संस्था है और सभी को उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए। मंत्री राजपूत ने कहा कि जनता के विश्वास और न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुझ पर लगाए गए सभी आरोप पूर्णतः झूठे थे।
उच्च न्यायालय के इस निर्णय को प्रदेश की राजनीति में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक विजय के रूप में देखा जा रहा है। लगातार दूसरी बार, चुनावी हलफनामे से जुड़े आरोपों पर न्यायालय से राहत मिलने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह का माहौल है।
डिजिटल क्रांति: सीबीडीसी से होगा खाद्यान्न वितरण
मध्य प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, पात्र हितग्राहियों को अब नकद या पारंपरिक व्यवस्था के बजाय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के माध्यम से राशन उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू हो गई है।
प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर शहरों का चयन किया है। दिसंबर 2026 तक इन शहरों की सभी उचित मूल्य दुकानों पर यह व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के सफल कार्यान्वयन के उपरांत, पात्र हितग्राहियों को प्रत्येक माह उनकी खाद्यान्न पात्रता के अनुरूप सीबीडीसी टोकन सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में भेजे जाएंगे। राशन प्राप्त करने के लिए, हितग्राही को केवल अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से उचित मूल्य दुकान पर उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन करना होगा। टोकन का उपयोग होते ही, उन्हें गेहूं, चावल तथा अन्य पात्रता अनुसार खाद्यान्न प्राप्त हो जाएगा। इस प्रक्रिया से पूरी व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।
खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने यह भी बताया कि यह व्यवस्था सार्वजनिक वितरण प्रणाली में लीकेज को रोकने, सब्सिडी के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और लाभार्थियों तक शत-प्रतिशत पारदर्शिता के साथ खाद्यान्न पहुंचाने में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह डिजिटल रुपया केवल राशन खरीदने के लिए ही उपयोग किया जा सकेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकारी सहायता का दुरुपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए न हो सके।
डिजिटल पीडीएस की कार्ययोजना
योजना के अंतर्गत, सर्वप्रथम लाभार्थियों के आधार और राशन कार्ड के डेटा का मिलान, मोबाइल नंबर का सत्यापन तथा ई-केवाईसी (ई-नो योर कस्टमर) प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद, हितग्राहियों को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के डिजिटल रुपया मोबाइल ऐप पर ऑनबोर्ड किया जाएगा। दूसरी ओर, सभी उचित मूल्य दुकानों को क्यूआर-आधारित सीबीडीसी भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा और विक्रेताओं को इस नई प्रणाली के संचालन के लिए विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, मध्य प्रदेश खाद्य विभाग, पंजाब नेशनल बैंक, एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र) तथा अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच हुई कई दौर की बैठकों और वीडियो कॉन्फ्रेंस के बाद एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार किए जाने की जानकारी दी। इसी के फलस्वरूप, भोपाल और इंदौर की सभी उचित मूल्य दुकानों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जा रहा है।
खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने आशा व्यक्त की कि यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो मध्य प्रदेश देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां डिजिटल रुपया सीधे जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का माध्यम बनेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल न केवल सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को कैशलेस, पेपरलेस और पारदर्शी बनाएगी, बल्कि भविष्य में अन्य कल्याणकारी योजनाओं में भी सीबीडीसी के उपयोग का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
डिजिटल प्रयोग की विशेषताएं
यह व्यवस्था राशन वितरण में पहली बार डिजिटल रुपये के उपयोग को चिह्नित करती है। लाभार्थी के मोबाइल वॉलेट में सीधे राशन का डिजिटल टोकन भेजा जाएगा। क्यूआर कोड स्कैन करके किसी भी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त किया जा सकेगा। यह सब्सिडी के दुरुपयोग और लीकेज को रोकने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होगी। भोपाल और इंदौर से शुरू होने वाला यह प्रयोग प्रदेश का सबसे बड़ा डिजिटल पीडीएस प्रयोग होगा, और यदि सफल रहा, तो इसके पूरे प्रदेश और देश में लागू होने का मार्ग प्रशस्त होगा।
