हडसन-स्मिथ का यूरोपीय चैंपियनशिप में तीसरा 400मी स्वर्ण, ज़ापलेटालोवा ने रचा इतिहास
ब्रिटिश एथलीट मैथ्यू हडसन-स्मिथ ने यूरोपीय चैंपियनशिप में तीसरी बार 400 मीटर स्वर्ण जीता, जबकि स्लोवाकियाई धाविका एम्मा ज़ापलेटालोवा ने भी स्वर्ण पदक अपने नाम कर देश के लिए इतिहास रचा।

द क्लिफ न्यूज़ | बर्मिंघम | 14 अगस्त 2026
बर्मिंघम के अलेक्जेंडर स्टेडियम में बुधवार को ब्रिटिश एथलीट मैथ्यू हडसन-स्मिथ ने पुरुषों की 400 मीटर दौड़ में 44.17 सेकंड के समय के साथ यूरोपीय चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीत लिया। यह उनका इस स्पर्धा में तीसरा यूरोपीय खिताब है, जो उन्होंने घरेलू दर्शकों के सामने हासिल किया। इस जीत ने 31 वर्षीय हडसन-स्मिथ की रफ्तार, अनुभव और दृढ़ इच्छाशक्ति को रेखांकित किया।
हडसन-स्मिथ ने दौड़ की शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और शुरुआती चरण में बढ़त बना ली। अंतिम मोड़ पर फ्रांस के मुहम्मद अब्दुल्ला कौंटा और नीदरलैंड के जोनास फिजफर्स ने कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन हडसन-स्मिथ ने अपने अनुभव का उपयोग करते हुए बढ़त बनाए रखी और विजयी हुए। फ्रांस के कौंटा को रजत और नीदरलैंड के फिजफर्स को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
घरेलू मैदान पर भावनात्मक जीत
यह जीत हडसन-स्मिथ के लिए विशेष रूप से भावनात्मक थी, क्योंकि उन्होंने इसी अलेक्जेंडर स्टेडियम में नौ साल की उम्र से प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। उनके करियर की नींव यहीं रखी गई थी और स्टेडियम के एक हिस्से का नाम भी उनके सम्मान में रखा गया है। हजारों घरेलू प्रशंसकों के बीच यह उपलब्धि उनके लिए एक यादगार क्षण बन गई।
जीत के बाद हडसन-स्मिथ ने कहा, "मैं नौ साल की उम्र से इस स्टेडियम में आता रहा हूं और अपने दोस्तों तथा परिवार के सामने यह उपलब्धि हासिल करना मेरे लिए बेहद खास है।" उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह उनकी आखिरी यूरोपीय चैंपियनशिप हो सकती है, जिसके लिए घरेलू मैदान पर स्वर्ण पदक एक आदर्श विदाई है।
ओलंपिक स्वर्ण पर निगाहें
हालांकि, हडसन-स्मिथ का ध्यान केवल वर्तमान सफलता पर ही केंद्रित नहीं है। पेरिस ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में रजत पदक जीत चुके यह ब्रिटिश स्टार अब 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य बना रहे हैं। यूरोपीय चैंपियनशिप का यह स्वर्ण पदक उनके अंतिम लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हडसन-स्मिथ का मानना है कि यूरोपीय चैंपियनशिप हमेशा उनके लक्ष्यों में रही है और उन्हें विश्वास है कि हर दौड़ और हर जीत उन्हें लॉस एंजिल्स ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के अपने अंतिम लक्ष्य के करीब ले जाएगी। पेरिस में रजत पदक के बाद, अब उनका लक्ष्य उस पदक का रंग बदलना है।
स्लोवाकियाई एम्मा ज़ापलेटालोवा का ऐतिहासिक कारनामा
महिलाओं की 400 मीटर बाधा दौड़ में स्लोवाकिया की 26 वर्षीय एम्मा ज़ापलेटालोवा ने 52.91 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीतकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। वह यूरोपीय चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाली पहली स्लोवाकियाई महिला एथलीट बन गई हैं। प्रतियोगिता से पहले ही उन पर काफी उम्मीदें थीं, खासकर जब नीदरलैंड की फेमके बोल ने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया।
ज़ापलेटालोवा ने इन उम्मीदों को दबाव में बदलने के बजाय प्रेरणा के रूप में लिया और फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद उन्होंने कहा कि उन्हें इस उपलब्धि की बेहद खुशी है और वह दबाव से प्रभावित नहीं हुईं। उन्होंने पूरी दौड़ में अपनी लय बनाए रखी और निर्णायक क्षणों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
स्लोवाकिया के लिए 16 साल बाद स्वर्ण
ज़ापलेटालोवा की जीत स्लोवाकिया के लिए भी ऐतिहासिक है। यूरोपीय चैंपियनशिप के इतिहास में इससे पहले केवल एक स्लोवाकियाई एथलीट ने स्वर्ण पदक जीता था। 2010 में लिबोर चारफ्रेइताग ने पुरुषों के हैमर थ्रो में यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके 16 साल बाद, ज़ापलेटालोवा ने स्लोवाकिया के लिए दूसरा यूरोपीय स्वर्ण पदक जीता और देश की महिला एथलेटिक्स के लिए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
उन्होंने इस उपलब्धि को अपने देश के लिए बेहद अनमोल बताया और स्वीकार किया कि 16 साल के लंबे इंतजार के बाद स्लोवाकिया को फिर यूरोपीय चैंपियनशिप का स्वर्ण मिला है, जिस पर उन्हें अब भी विश्वास करना मुश्किल हो रहा है।
एथलेटिक्स में दृढ़ता और महत्वाकांक्षा का संगम
यूरोपीय चैंपियनशिप की ये दोनों स्पर्धाएं एथलेटिक्स की प्रतिस्पर्धात्मकता और भावनात्मक गहराई को उजागर करती हैं। एक ओर, हडसन-स्मिथ ने अपने प्रशिक्षण स्थल पर घरेलू प्रशंसकों के सामने करियर का तीसरा यूरोपीय स्वर्ण जीतकर अपनी विरासत को और मजबूत किया, वहीं ज़ापलेटालोवा ने अपने देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
हडसन-स्मिथ की जीत 31 वर्ष की आयु में भी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं, विशेषकर लॉस एंजिल्स ओलंपिक में स्वर्ण पदक, का प्रतीक है। वहीं, ज़ापलेटालोवा का स्वर्ण स्लोवाकिया की युवा पीढ़ी के एथलीटों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। दोनों एथलीटों की उपलब्धियां यूरोपीय एथलेटिक्स में दृढ़ता, निरंतरता और बड़े सपने देखने की भावना का एक ज्वलंत उदाहरण पेश करती हैं।
