ग्वालियर पुलिस का करोड़ों के साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर शिकंजा, 5 गिरफ्तार
ग्वालियर पुलिस ने विंडसर हिल्स स्थित डुप्लेक्स से करोड़ों के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पांच आरोपी गिरफ्तार, 7-8 करोड़ रुपये प्रतिमाह का हो रहा था लेन-देन।

द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 14 सितंबर 2026
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विंडसर हिल्स स्थित एक किराए के डुप्लेक्स से ऑनलाइन सट्टा, ऑनलाइन गैंबलिंग और बैंक खातों की खरीद-फरोख्त जैसे अवैध कार्यों को अंजाम दे रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये और सालाना करीब 100 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन हो रहा था। यह खुलासा प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही व्यापक मुहिम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो संगठित गिरोहों पर नकेल कसने में पुलिस की सक्रियता को दर्शाता है।
पुलिस को 12 सितंबर को गुप्त सूचना मिली थी कि विंडसर हिल्स इलाके में एक डुप्लेक्स में संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं, जिनमें ऑनलाइन सट्टेबाजी, बैंक खातों की खरीद-फरोख्त और ऑनलाइन गैंबलिंग शामिल हैं। सूचना की पुष्टि के बाद, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री धर्मवीर सिंह के निर्देश पर साइबर क्राइम विंग की एक टीम ने मौके पर छापामार कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस ने पांच आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा। प्रारंभिक पूछताछ और जांच में इन व्यक्तियों की संलिप्तता की पुष्टि हुई, जिसके बाद उनके विरुद्ध क्राइम ब्रांच ग्वालियर में मामला दर्ज कर आगे की विवेचना शुरू की गई।
‘100 पैनल’ वेबसाइट से संचालित हो रहा था ठगी का रैकेट
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह '100 पैनल' नामक एक वेबसाइट का इस्तेमाल करके ऑनलाइन सट्टेबाजी का संचालन कर रहा था। यह प्लेटफॉर्म संभवतः विभिन्न प्रकार के सट्टेबाजी के खेल और आयोजनों के लिए एक केंद्रीय हब के रूप में कार्य कर रहा था। आरोपियों के कब्जे से 23 मोबाइल फोन, 37 सिम कार्ड, 11 एटीएम कार्ड, तीन लैपटॉप, छह पासबुक और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस इन सभी उपकरणों से प्राप्त डेटा का गहन तकनीकी विश्लेषण कर रही है। इसका उद्देश्य गिरोह के संचालन के तरीके, उसके सदस्यों की पहचान, उनके द्वारा उपयोग किए गए बैंक खातों की विस्तृत जानकारी और वित्तीय लेन-देन के पूरे नेटवर्क का खुलासा करना है।
जांच के दौरान, यह भी पता चला है कि यह गिरोह बड़ी संख्या में बैंक खातों का विवरण एकत्र कर रहा था। पुलिस संबंधित बैंकों से इन खातों की विस्तृत जानकारी जुटा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग साइबर ठगी सहित अन्य अपराधों में किस प्रकार किया गया। इन खातों की खरीद-फरोख्त या दुरुपयोग के माध्यम से ही यह गिरोह अपनी अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था, जिससे यह वित्तीय श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया था।
करोड़ों के वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इस गिरोह द्वारा प्रतिमाह 7 से 8 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन किया जा रहा था, जो सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। यह भारी-भरकम राशि दर्शाती है कि यह गिरोह कितना बड़ा और संगठित था। पुलिस इस राशि के स्रोत, उन तक पहुंचने वाले लाभार्थियों और पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह पैसा कहाँ से आ रहा था और कहाँ जा रहा था, और इसमें कौन-कौन सी संस्थाएं या व्यक्ति शामिल थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ क्राइम ब्रांच ग्वालियर में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की विवेचना की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव का भी खुलासा
आरोपियों ने पूछताछ में यह भी बताया कि वे व्हाट्सएप के माध्यम से दुबई और श्रीलंका में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे। यह जुड़ाव इस बात की ओर इशारा करता है कि यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय हो सकता है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय तार अक्सर साइबर अपराधों में पाए जाते हैं, जहाँ अपराधी अपनी पहचान छुपाने और कानून की पकड़ से बचने के लिए दूरस्थ स्थानों से अपनी गतिविधियों का संचालन करते हैं। पुलिस जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा के माध्यम से इस अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी जांच कर रही है। इसके तहत, इन विदेशी संपर्कों की पहचान करने और उनके द्वारा रची जा रही बड़ी योजनाओं का पर्दाफाश करने का प्रयास किया जा रहा है।
मकान मालिक से भी होगी पूछताछ
जिस डुप्लेक्स किराए पर लेकर यह अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही थीं, उसके मकान मालिक की भूमिका की भी पुलिस जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या मकान मालिक इन गतिविधियों से अवगत था अथवा अनभिज्ञ था। यदि वह इन अवैध गतिविधियों से परिचित था, तो उसके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि संपत्ति का दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों के लिए न हो, और ऐसे मामलों में संपत्ति के मालिकों की जिम्मेदारी भी तय की जाती है।
मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों और ऑनलाइन अवैध गतिविधियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का उद्देश्य ऐसे संगठित नेटवर्क की पहचान कर उनके वित्तीय और तकनीकी तंत्र को ध्वस्त करना है, ताकि आम नागरिकों को साइबर ठगी, ऑनलाइन सट्टेबाजी और बैंक खातों के दुरुपयोग से बचाया जा सके। इसी क्रम में पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या किसी भी डिजिटल संसाधन को किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। किसी भी प्रकार के साइबर अपराध की सूचना तत्काल पुलिस को दें। यह सतर्कता न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पुलिस को ऐसे गिरोहों को पकड़ने में भी मदद करती है।
