ग्वालियर में 5000 पौधे लगाकर रचा गया इतिहास, बनेगा गुरुकुल विश्वविद्यालय
ग्वालियर की मध्य भारत शिक्षा समिति ने ऋषि गालव विश्वविद्यालय परिसर में 5000 पौधे लगाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 1 अगस्त 2026
ग्वालियर शहर ने शनिवार को 'एक पेड़ एक जिंदगी' महाभियान के तहत एक अभूतपूर्व इतिहास रचा है। मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा स्थापित ऋषि गालव विश्वविद्यालय परिसर में मात्र दो घंटे के भीतर 55 बीघा जमीन पर पांच हजार से अधिक पौधे लगाए गए। इस वृहद वृक्षारोपण महायज्ञ में शहर के शैक्षणिक, प्रशासनिक, धार्मिक, शासकीय और प्रतिष्ठित समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने पूरे मनोयोग से सहभागिता कर प्रकृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
यह आयोजन श्रावण मास के प्रथम सप्ताह में प्रकृति और प्रकृति पुत्रों को समर्पित रहा। सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ यह वृक्षारोपण उत्सव 10:30 बजे तक उत्साह, उमंग और प्रफुल्लित भावपूर्ण वातावरण में 5000 पौधों के सफल रोपण के साथ संपन्न हुआ। इस भव्य आयोजन में विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। श्री गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ किला, ग्वालियर के सहयोग से पदमश्री बाबा सेवा सिंह जी, बाबा लक्खा सिंह जी, बाबा गुरुप्रीत सिंह जी की उपस्थिति में पौधरोपण संपन्न हुआ।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता
इस वृक्षारोपण महाअभियान में स्वामी समर्थ तीर्थ महाराज, स्वामी अभय कात्यायन, आईटीएम विश्वविद्यालय के डॉ. योगेश उपाध्याय, भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया, पूर्व विधायक घमश्याम पिरोनिया, स्वामी अजयकांत, राजेश शुक्ला, उपमहाधिवक्ता विवेक खेड़कर, प्राचार्य हरीश अग्रवाल, श्रीमती संध्या श्रीवास्तव, पूर्व सभापति वृजेन्द्र सिंह जादौन, पर्यावरण प्रमुख शिवसेवक, विभाग संघ चालक प्रह्लाद सबनानी, मुनेंद्र सिंह, ओमवीर सिंह, डॉ. राजीव मिश्रा, श्रीमती उषा गिर्राज, नगर निगम आयुक्त प्रदीप तोमर, नेता प्रतिपक्ष हरिपाल, संजीव गोयल, सुदर्शन गुप्ता, तरुण मित्तल, जगदीश अरोरा सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा संचालित नौ शैक्षणिक संस्थाओं के प्राध्यापक, अध्यापक, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, तथा एनएसएस, एनसीसी, क्रीड़ा, व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक समितियों के विद्यार्थी भी इस पुनीत कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हुए। पर्यावरण मित्रों संदीप मौर्य और दिनेश मिश्रा ने भी इस आयोजन में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान किया।
गुरुकुल पद्धति से सराबोर होगा अनुपम ऋषि गालव विश्वविद्यालय
यह पौधारोपण केवल एक उत्सव मात्र नहीं था, बल्कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय को एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था जो गुरुकुल पद्धति और पर्यावरण से गहराई से जुड़ा होगा। विश्वविद्यालय द्वारा लगाए गए पौधों की विशेष देखभाल के प्रबंध किए गए हैं। जामुन, आम, बरगद, पीपल, अर्जुन, अमरूद, कनेर, आंवला, पाम, बेलपत्र, नीम और चीनी चंपा जैसी विभिन्न प्रजातियों के वृक्षों को एक विशेष क्रम में लगाया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य न केवल विद्यार्थियों के वनस्पति संबंधी ज्ञान को संवर्धित करना है, बल्कि उन्हें सामाजिक संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने की व्यवहारिक सीख भी देना है।
विश्वविद्यालय ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए एक अनूठी पहल करते हुए, वर्षभर वृक्षों की देखभाल के लिए शैक्षणिक विभागों की भांति 'वृक्ष-रक्षक विभाग' की स्थापना भी की है। यह विभाग इन नन्हे पौधों के संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी संभालेगा। वृक्षोत्सव-2026 के रूप में ऋषि गालव विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक जगत में की गई यह अविस्मरणीय पहल संभवतः ग्वालियर में पहली ऐसी घटना है, जहाँ एक संस्था द्वारा मात्र दो घंटे के भीतर शिक्षा, धर्म, शासन और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तियों के साथ इतने बड़े स्तर पर वृक्षारोपण संपन्न हुआ हो।
पर्याप्त सहयोग और आगामी लक्ष्य
वृक्षउत्सव 2026 कार्यक्रम में विभिन्न स्रोतों से महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। गुरुद्वारा दाता बंदी छोड़ से 2500 वृक्ष, नगर निगम से 3000 वृक्ष, पानी के टैंकर, खाद, तथा कृषि विश्वविद्यालय से 700 किलो केंचुए की खाद प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त, अन्य नागरिकों और संस्थाओं से भी सहयोग मिला, जिसने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मध्य भारत शिक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र बांदिल ने इस प्रचंड समर्थन और दो घंटे में 5000 से अधिक वृक्ष लगाने के संकल्प को उत्साहपूर्वक पूरा करने में सहयोग देने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले वर्ष ग्वालियर के सहयोग से लाखों पेड़ लगाकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल पर्यावरण के प्रति जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि ग्वालियर को एक हरित और समृद्ध शहर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।
