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ग्वालियर: अमरगढ़ में आदिवासी किसानों के लिए खुला आधुनिक कृषि संसाधन केंद्र

ग्वालियर के अमरगढ़ में एकता परिषद और महात्मा गांधी सेवा आश्रम की पहल पर किसान संसाधन केंद्र का शुभारंभ हुआ, जिससे आदिवासी परिवारों को आधुनिक...

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संवाददाता: दिनेश सिकरवार
ग्वालियर: अमरगढ़ में आदिवासी किसानों के लिए खुला आधुनिक कृषि संसाधन केंद्र

gwalior | संवाददाता: दिनेश सिकरवार

द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 11 सितंबर 2026

ग्वालियर जिले के आदिवासी बाहुल्य ग्राम अमरगढ़ में किसानों को आधुनिक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। महात्मा गांधी सेवा आश्रम, जौरा की ओर से स्थापित इस किसान संसाधन केंद्र का औपचारिक उद्घाटन एकता परिषद के संस्थापक एवं विख्यात गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता राजगोपाल पी. व्ही. ने किया। परिवर्तन और एचडीएफसी बैंक के सहयोग से स्थापित यह केंद्र, स्थानीय आदिवासी समुदायों को खेती-किसानी के क्षेत्र में सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता है। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने पारंपरिक आत्मीयता के साथ अतिथियों का स्वागत किया।

राजगोपाल पी. व्ही. ने इस अवसर पर कहा कि अमरगढ़ के आदिवासी समुदायों ने अपने बुनियादी हक और अधिकारों के लिए वर्षों तक लंबा संघर्ष किया है। उन्होंने बसंती बाई और अन्य ग्रामीणों के योगदान को विशेष रूप से याद किया, जिन्होंने एकता परिषद की पदयात्राओं और आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि आज अमरगढ़ के अनेक परिवारों को लगभग 350 बीघा भूमि पर मालिकाना अधिकार प्राप्त हुए हैं। अब उसी भूमि पर खेती कर ये परिवार अपनी आजीविका को सुरक्षित कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकार मिलने के बाद भूमि का इष्टतम उपयोग और किसानों की आय में वृद्धि करना ही इस संसाधन केंद्र का मुख्य उद्देश्य है।

जल-जंगल-जमीन के संघर्ष से आजीविका तक की राह

एकता परिषद के प्रदेश संयोजक डोंगर शर्मा ने वर्ष 2007 से क्षेत्र में जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर चले आंदोलनों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी सेवा आश्रम द्वारा जल संरक्षण के कार्यों के साथ-साथ किसानों के लिए आवश्यक कृषि संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ महात्मा गांधी प्रयोग आश्रम के अध्यक्ष सीताराम सोनवानी ने इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों की लड़ाई के साथ-साथ अब आजीविका और कृषि को मजबूत करना समय की मांग है। उन्होंने किसान संसाधन केंद्र को इसी दिशा में एक सार्थक प्रयास बताया। इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में, भूमि के अधिकार प्राप्त करना केवल एक कानूनी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उन समुदायों के लिए अपनी पहचान और आर्थिक स्वतंत्रता स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। वर्ष 2007 में शुरू हुए इन आंदोलनों ने जमीन पर काबिज आदिवासियों के मालिकाना हक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे उन्हें वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता से मुक्ति मिली।

भूमि अधिकार प्राप्त होने के बाद, इन समुदायों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी उस भूमि का प्रभावी ढंग से उपयोग करके आजीविका सुनिश्चित करना था। इसी को ध्यान में रखते हुए, महात्मा गांधी सेवा आश्रम ने न केवल जल संरक्षण जैसे बुनियादी मुद्दों पर काम किया, बल्कि किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों और उपकरणों से भी जोड़ा। यह एक व्यापक रणनीति का हिस्सा था जिसका उद्देश्य आदिवासी परिवारों को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाना था। इन पहलों के माध्यम से, ऐतिहासिक संघर्ष को अब एक व्यावहारिक और उत्पादक कृषि प्रणाली में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

आधुनिक यंत्रों से खेती को मिलेगी गति

स्थानीय एकता कमेटी के अध्यक्ष रूप सिंह आदिवासी ने बताया कि इस नए संसाधन केंद्र की स्थापना से ग्रामीणों को अब कृषि कार्यों के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। केंद्र पर ट्रैक्टर, दवा छिड़काव मशीन और कल्टीवेटर जैसे आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। इन संसाधनों का उपयोग एकता कमेटी के माध्यम से किया जाएगा, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की खेती की लागत और श्रम में कमी आएगी। इससे उनकी उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है और वे अधिक लाभकारी खेती कर सकेंगे। आधुनिक कृषि यंत्रों की उपलब्धता से पारंपरिक खेती पद्धतियों में एक बड़ा बदलाव आएगा। ये उपकरण न केवल श्रम को कम करेंगे, बल्कि बुवाई, जुताई और फसल सुरक्षा जैसे कार्यों में सटीकता और दक्षता भी बढ़ाएंगे।

यह सुविधा छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होगी, जिनके पास व्यक्तिगत रूप से ऐसे महंगे उपकरण खरीदने की क्षमता नहीं होती। एकता कमेटी द्वारा इन उपकरणों के किराए पर उपलब्ध कराए जाने से, सभी किसान इनका लाभ उठा सकेंगे। इससे न केवल उनकी उत्पादन लागत कम होगी, बल्कि वे कम समय में अधिक भूमि पर खेती कर पाएंगे, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी। इसके अतिरिक्त, आधुनिक छिड़काव मशीनों से कीटनाशकों और उर्वरकों का संतुलित उपयोग संभव होगा, जो मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की गुणवत्ता दोनों के लिए बेहतर है। यह कदम किसानों को एक अधिक टिकाऊ और लाभदायक कृषि भविष्य की ओर ले जाएगा।

भविष्य की राह: सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता

यह किसान संसाधन केंद्र केवल उपकरणों का एक संग्रह नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। राजगोपाल पी. व्ही. ने इस बात पर जोर दिया कि इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिकार प्राप्त करने के बाद, आदिवासी परिवार अपनी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें। यह एक समग्र दृष्टिकोण है जो भूमि के मालिकाना हक को आर्थिक समृद्धि से जोड़ता है। केंद्र के माध्यम से, किसानों को न केवल आधुनिक उपकरण मिलेंगे, बल्कि उन्हें बेहतर कृषि पद्धतियों, बीज चयन, और बाजार से जुड़ाव के बारे में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।

यह पहल एचडीएफसी बैंक और परिवर्तन जैसे संगठनों के सहयोग से संभव हुई है, जो ग्रामीण विकास और सामाजिक उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ऐसे सहयोग यह दर्शाते हैं कि जब सरकार, गैर-सरकारी संगठन और वित्तीय संस्थान मिलकर काम करते हैं, तो दूरगामी सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन लाए जा सकते हैं। अमरगढ़ में किसान संसाधन केंद्र का शुभारंभ इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे सामुदायिक नेतृत्व, सामाजिक आंदोलनों और सुनियोजित पहलों के माध्यम से वंचित समुदायों को सशक्त किया जा सकता है। यह केंद्र क्षेत्र के किसानों के लिए भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा, जो उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर महात्मा गांधी सेवा आश्रम के सचिव दिलीप जैन, संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव, अनिल कुमार गुप्ता, बागवाला के सरपंच शिव सिंह गुर्जर, एडवोकेट दिनेश सिंह सिकरवार और देवेन्द्र बना सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम में ग्रामीणों ने अपने संघर्षों और वर्तमान में मिल रहे अधिकारों के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह संसाधन केंद्र उनकी खेती को आधुनिक बनाएगा और उनकी आय में वृद्धि करेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। यह केंद्र क्षेत्र के किसानों के लिए भविष्य में मील का पत्थर साबित होगा, जो उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।