गुना विधायक की मांग: डिफॉल्टर किसानों को नगद पर मिले खाद
गुना विधायक पन्नालाल शाक्य ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मांग की है कि रबी सीजन में डिफॉल्टर किसानों को नगद भुगतान पर खाद उपलब्ध...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 22 अक्टूबर 2026
रबी सीजन की बुवाई से पहले खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, गुना के विधायक पन्नालाल शाक्य ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मांग की है कि प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में डिफॉल्टर (बकायादार) किसानों को भी नगद भुगतान के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं। इस कदम से किसानों को खाद संकट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
विधायक शाक्य ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है कि वर्तमान नियमों के अनुसार, सहकारी समितियों में बकाया होने के कारण कई किसान क्रेडिट पर खाद प्राप्त नहीं कर पाते। इससे उन्हें ऐन बुवाई के समय भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और खाद के लिए परेशान होना पड़ता है। ऐसी स्थिति रबी सीजन की शुरुआत में अक्सर देखी जाती है, जब किसानों को अपनी फसलों के लिए समय पर उर्वरकों की आवश्यकता होती है।
किसानों को राहत देने का प्रस्ताव
विधायक ने तर्क दिया है कि यदि सहकारी समितियों के माध्यम से बकायादार किसानों को नगद राशि जमा करने पर खाद उपलब्ध कराने की छूट दी जाती है, तो उनकी तत्काल समस्या का समाधान हो सकेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि किसानों के व्यापक हित और रबी फसल की बुवाई को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कृषि एवं सहकारिता विभाग को इस संबंध में त्वरित और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
इस पहल का उद्देश्य किसानों को बाजार में खाद के लिए भटकने से बचाना और समय पर बुवाई सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करना है। यदि यह मांग स्वीकार की जाती है, तो यह प्रदेश के हजारों किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी, खासकर रबी सीजन की शुरुआत में जब उर्वरकों की मांग सर्वाधिक होती है। वर्तमान में, कई डिफॉल्टर किसानों को सहकारी समितियों से उधार पर खाद नहीं मिल पाता, जिसके कारण वे या तो बाजार से महंगी दर पर खरीदने को मजबूर होते हैं या फिर खाद की कमी के चलते बुवाई में देरी करते हैं, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन पर पड़ता है। विधायक शाक्य द्वारा उठाया गया यह कदम, किसानों को वित्तीय बोझ के साथ-साथ समय की कमी से भी निजात दिलाएगा। नगद भुगतान पर उर्वरक मिलने से किसान अपनी आवश्यकतानुसार खाद खरीद सकेंगे, जिससे बुवाई प्रक्रिया बाधित नहीं होगी। यह प्रस्ताव किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, क्योंकि उन्हें अपनी बकाया राशि का भुगतान कर खाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इस प्रकार, यह न केवल व्यक्तिगत किसानों के लिए बल्कि समग्र कृषि उत्पादकता के लिए भी फायदेमंद होगा।
