गुना: तीन माह से वेतन नहीं, आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मी भुखमरी की कगार पर
गुना में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों ने तीन माह से लंबित वेतन भुगतान की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने आर्थिक संकट और भुखमरी...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 9 सितंबर 2026
गुना जिले के सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मियों का तीन महीने का वेतन लंबित है, जिसके कारण वे गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। अपनी इस व्यथा को लेकर दर्जनों कर्मचारियों ने जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा और तत्काल वेतन भुगतान की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि इस आर्थिक तंगी के कारण उनके परिवारों के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है।
जनसुनवाई में शामिल जनेश, मोनाका, अभिलाषा, रजनीश, सौरभ, चिन्हलाल और ज्ञानसिंह जैसे स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि वे पिछले 11 महीनों से स्वास्थ्य सेवाओं में निष्ठापूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, जून, जुलाई और अगस्त 2026 का वेतन उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। इस तीन माह के बकाया वेतन के अभाव में कर्मचारियों के लिए अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करना, घर के लिए राशन खरीदना और परिवार के बीमार सदस्यों के लिए दवाइयों का प्रबंध करना भी मुश्किल हो गया है।
आउटसोर्स एजेंसी की लापरवाही ने बढ़ाई मुश्किलें
यह स्थिति सीधे तौर पर आउटसोर्स एजेंसी की लापरवाही का परिणाम है, जिसके माध्यम से इन चतुर्थ श्रेणी मल्टी-स्किल वर्कर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। एजेंसी द्वारा समय पर वेतन भुगतान न करने के कारण इन कर्मचारियों के सामने आर्थिक विपन्नता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यह केवल एक या दो कर्मचारियों की समस्या नहीं है, बल्कि कई स्वास्थ्य कर्मी इस समस्या से प्रभावित हैं, जिन्होंने जनसुनवाई में आकर अपनी आवाज उठाई। कर्मचारियों ने बताया कि वे न केवल वेतन न मिलने से बल्कि विभाग द्वारा इस ओर ध्यान न दिए जाने से भी हताश हैं।
लंबित वेतन भुगतान के लिए पांच बार आवेदन, अब तक कोई कार्रवाई नहीं
कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वेतन न मिलने के कारण उत्पन्न हुई आर्थिक तंगी की स्थिति बेहद विकट हो गई है। उन्होंने प्रशासन को इस संबंध में पूर्व में भी पांच बार लिखित आवेदन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया था, लेकिन अफसोस की बात यह है कि अब तक उनकी समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस उपेक्षा के कारण कर्मचारियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। बार-बार ज्ञापन सौंपने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकलता, तो कर्मचारियों का मनोबल गिरना स्वाभाविक है। यह स्थिति उनके पेशेवर जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने बताया कि आर्थिक तंगी के चलते कई परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। राशन का इंतजाम करना, बिजली-पानी के बिल भरना और छोटे-मोटे अन्य खर्चे उठाना भी दूभर हो गया है। यदि यही हाल रहा, तो वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कैसे कर पाएंगे, यह एक गंभीर चिंता का विषय है। कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने बार-बार संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन ही मिला है, जिसका अब तक कोई परिणाम नहीं निकला है।
कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
कर्मचारियों ने कलेक्टर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) गुना और संबंधित आउटसोर्स एजेंसी को निर्देशित करने की गुहार लगाई है। उनकी मुख्य मांग यह है कि उनका रुका हुआ तीन महीने का वेतन अविलंब उनके बैंक खातों में सीधे स्थानांतरित किया जाए, ताकि वे अपने परिवारों का भरण-पोषण कर सकें और दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा कर सकें। उन्होंने यह भी मांग की है कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाली आउटसोर्स एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों और अन्य कर्मचारी भी सुरक्षित रहें।
ज्ञापन सौंपने के दौरान कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि इस बार प्रशासन उनके मामले को गंभीरता से लेगा और उन्हें इस आर्थिक विपन्नता से शीघ्र निजात दिलाएगा। उन्होंने कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और उन्हें भी एक सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है। वेतन का समय पर भुगतान उनकी न्यायसंगत मांग है।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है, जिससे प्रभावित स्वास्थ्य कर्मियों में अपने भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। जिला प्रशासन इस ज्ञापन पर क्या कार्यवाही करता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। सभी प्रभावित कर्मचारी अब जल्द से जल्द अपने वेतन के भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, ताकि उनके घरों में चूल्हे जल सकें और उनके परिवारों की बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें। इस घटना ने प्रदेश में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के क्रियान्वयन और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह व्यवस्था, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सुचारू और कुशल बनाना है, ऐसे में सवालों के घेरे में आ जाती है जब इसके माध्यम से नियुक्त कर्मचारी ही अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करने पर मजबूर हो जाते हैं।
आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी की समस्या कोई नई नहीं है और यह अक्सर विभिन्न जिलों में देखी जाती है। यह स्थिति स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के मनोबल को भी प्रभावित करती है, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर डाल सकती है। इस मामले में प्रशासन की तत्परता और आउटसोर्स एजेंसी के प्रति की जाने वाली कार्रवाई, भविष्य के लिए एक नजीर पेश कर सकती है।
