गुना स्टेशन पर आवारा पशुओं का आतंक, यात्रियों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा
गुना रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं का घूमना यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों और यात्रियों ने इस समस्या पर ध्यान देने की मांग की है।

संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 6 सितंबर 2026
गुना रेलवे स्टेशन पर आवारा पशुओं, विशेषकर सांडों का जमावड़ा यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर रहा है। स्टेशन परिसर में इन पशुओं की मौजूदगी से न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है, बल्कि वे दुर्घटनाओं का शिकार भी हो सकते हैं। इस समस्या को लेकर यात्रियों और स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है।
स्रोत से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह माना जाता है कि स्टेशन परिसर की साफ-सफाई और इसे बाधा-मुक्त रखना स्टेशन अधीक्षक की जिम्मेदारी है, जबकि प्लेटफार्मों पर आवारा पशुओं को नियंत्रित करना रेलवे सुरक्षा बल (जीआरपी) का कार्य है। इसके बावजूद, रेलवे प्रशासन की कथित लापरवाही के कारण आवारा पशुओं के साथ-साथ चोर-उचक्के भी बेखौफ घूम रहे हैं, जिससे यात्रियों के जान-माल को लगातार खतरा बना हुआ है।
स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल
क्षेत्र के सांसद प्रतिनिधि, विधायक प्रतिनिधि और जिला प्रशासन से इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान देने की अपेक्षा की जा रही है। आरोप है कि इन प्रतिनिधियों द्वारा पर्याप्त ध्यान न दिए जाने के कारण गुना स्टेशन पर गंदगी और आवारा पशुओं की समस्या लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है। इससे स्टेशन की छवि धूमिल हो रही है और यात्रियों का अनुभव नकारात्मक हो रहा है।
XZRUCC सदस्य की चिंता और अपील
क्षेत्रीय रेल उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति (XZRUCC) के सदस्य सुनील आचार्य ने इस गंभीर समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को गुना स्टेशन पर व्याप्त इन समस्याओं पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। आचार्य के अनुसार, केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ही नहीं, बल्कि स्टेशन के समग्र वातावरण को बेहतर बनाने के लिए भी यह आवश्यक है। यात्रियों ने भी स्टेशन पर साफ-सफाई और सुरक्षा संबंधी अन्य मुद्दों पर चिंताएं जताई हैं, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर संबोधित किया जाना चाहिए।
गुना नगरपालिका द्वारा आवारा पशुओं को सड़कों पर छोड़ने के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश भी जुलाई 2026 तक लागू है, जो इस समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर इन आदेशों के प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता है।
