गुना: स्कूल में छात्राओं की पानी की बोतल में मूत्र मिलाने का आरोप, परिजनों ने किया हंगामा
गुना जिले के आरोन में शासकीय स्कूल की दो छात्राओं की पानी की बोतलों में मूत्र मिलाने का आरोप लगा है। परिजनों के हंगामे के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 19 अगस्त 2026
गुना जिले के आरोन विकासखंड क्षेत्र के एक शासकीय स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ने वाली दो 10 वर्षीय छात्राओं के साथ कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक हरकत किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल में कुछ छात्रों ने दोनों छात्राओं की पानी की बोतल में मूत्र मिला दिया और उन्हें वही पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय परिजनों का गुस्सा भड़क उठा, जिसके बाद उन्होंने स्कूल बंद कराकर हंगामा किया। प्रशासन ने इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार को हुई जब दोनों छात्राएं स्कूल पहुंची थीं। आरोप है कि कक्षा में मौजूद कुछ अन्य छात्रों ने उनकी पानी की बोतलों के साथ छेड़छाड़ की और उनमें मूत्र मिला दिया। छात्राओं के अनुसार, उन्हें इस बात का पता तब चला जब कक्षा के अन्य बच्चों ने उन्हें बताया कि उनकी पानी की बोतल में मूत्र मिलाया गया है और उन्होंने गलती से वही पानी पी लिया है। यह घटना न केवल दो छात्राओं के स्वास्थ्य के लिए खतरा थी, बल्कि इसने स्कूल में सुरक्षा और छात्रों के बीच आपसी सम्मान जैसे गंभीर सवालों को भी जन्म दिया है। इस तरह की हरकतें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
प्राचार्य की प्रतिक्रिया पर बढ़ा आक्रोश
घटना के बाद, दोनों पीड़ित छात्राएं कथित तौर पर स्कूल प्राचार्य के पास शिकायत लेकर पहुंचीं। छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने प्राचार्य को पूरी घटना से अवगत कराया, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। आरोप है कि प्राचार्य ने छात्राओं से कहा कि यदि उनका मुंह खराब हो गया है तो वे 10-10 रुपये वाली चॉकलेट खा लें। प्राचार्य की इस कथित प्रतिक्रिया ने छात्राओं और उनके परिजनों के गुस्से को और भड़का दिया। घर पहुंचकर छात्राओं ने जब परिजनों को पूरी घटना बताई तो परिवारों में भारी रोष फैल गया। प्राचार्य का यह असंवेदनशील रवैया, यदि सच है, तो यह दिखाता है कि किस तरह स्कूल प्रबंधन ऐसी गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज कर सकता है, जिससे बच्चों का विश्वास पूरी तरह से टूट सकता है।
यह घटना इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि स्कूल परिसर में ऐसे व्यवहार के खिलाफ एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली का अभाव कितना हानिकारक हो सकता है। बच्चों को अक्सर धमकाया या डराया जाता है, जिससे वे अपनी समस्याओं को खुलकर बताने से डरते हैं। इस मामले में, जहां छात्राओं ने खुद आगे आकर शिकायत की, वहां भी उन्हें अपेक्षित संवेदनशीलता नहीं मिली, जो कि बेहद चिंताजनक है।
परिजनों का विरोध और स्कूल बंद
घटना की जानकारी मिलते ही अगले दिन मंगलवार को बड़ी संख्या में आक्रोशित परिजन स्कूल पहुंचे। उन्होंने स्कूल परिसर में पहुंचकर घटना के विरोध में नारेबाजी की और स्कूल को बंद करा दिया। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। स्थिति को बिगड़ता देख प्रशासन को सूचित किया गया।
परिजनों का यह कदम बच्चों के प्रति उनकी जिम्मेदारी और स्कूल में सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने की उनकी इच्छा को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वे इस तरह की घिनौनी हरकत को बर्दाश्त नहीं करेंगे और न ही स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को स्वीकार करेंगे। स्कूल को बंद कराने का उनका निर्णय इस बात का प्रतीक था कि वे तब तक चैन से नहीं बैठेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता। यह घटना दर्शाती है कि माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए कितने चिंतित और प्रतिबद्ध होते हैं।
प्रशासनिक जांच शुरू, दो दिन में रिपोर्ट तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम आरोन मंजूषा खत्री ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। एसडीएम के निर्देश पर तहसीलदार और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने दोनों पीड़ित छात्राओं से अलग-अलग पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए। इसके साथ ही, घटना में कथित तौर पर शामिल आरोपित छात्रों और उनके परिजनों के बयान भी लिए गए।
प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी को दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। जांच के दायरे में छात्राओं के बयान, अन्य विद्यार्थियों से प्राप्त जानकारी, स्कूल प्रबंधन की भूमिका और आरोपित छात्रों के कृत्य की गहन पड़ताल की जाएगी। इस जांच का उद्देश्य घटना की सत्यता का पता लगाना और दोषियों को चिन्हित करना है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
जांच दल द्वारा लिए जा रहे बयानों और जुटाई जा रही जानकारी का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना नहीं है, बल्कि यह समझना भी है कि इस घटना के पीछे क्या कारण थे और स्कूल में ऐसी स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। इसमें शामिल अन्य छात्रों, गवाहों और स्कूल कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है ताकि घटना का पूरा सच सामने आ सके।
एसडीएम ने की सख्त कार्रवाई का आश्वासन
एसडीएम आरोन मंजूषा खत्री ने बताया, “घटना की सूचना मिलते ही हमने तत्काल मौके पर तहसीलदार और बीईओ को भेजा है। प्राचार्य को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है। बीईओ दो दिन में जांच पूरी करके अपनी रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
एसडीएम का यह बयान पीड़ित परिवारों को कुछ राहत दे सकता है, लेकिन कार्रवाई का इंतजार अभी बाकी है। यह आश्वासन महत्वपूर्ण है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और केवल लीपापोती करने की बजाय दोषियों को दंडित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। इस तरह के आश्वासन बच्चों और उनके अभिभावकों के विश्वास को बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह मामला शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के लिए एक चुनौती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि बच्चों के लिए स्कूल एक सुरक्षित स्थान बना रहे। इस घटना के बाद, यह आवश्यक है कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा और उनके व्यवहार को लेकर कड़े नियम बनाए जाएं और उनका सख्ती से पालन करवाया जाए। इसके साथ ही, स्कूल कर्मचारियों के लिए भी संवेदनशील व्यवहार और शिकायत निवारण पर प्रशिक्षण आयोजित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
