गुना नगर पालिका में गणेश स्थापना: पर्यावरण संरक्षण और पॉलीथिन मुक्त उत्सव पर जोर
गुना नगर पालिका ने गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण और अमानक पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगाने का संदेश दिया। इको-फ्रेंडली झांकियों और कागज...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 15 सितंबर 2026
गुना नगर पालिका परिसर में गणेश उत्सव के पावन अवसर पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा विधि-विधान के साथ स्थापित की गई। इस धार्मिक आयोजन के माध्यम से नगर पालिका प्रशासन ने नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण और अमानक पॉलीथिन का उपयोग बंद करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया है।
नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) शैलेश अवस्थी, पार्षद राजू ओझा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शिव मंदिर प्रांगण में गणेश प्रतिमा की स्थापना की गई। इस अवसर पर सीएमओ शैलेश अवस्थी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उत्सव के दौरान पंडालों में प्लास्टिक का उपयोग पूर्णतः वर्जित रहेगा। प्रसादी वितरण के लिए भी केवल कागज के दोने का ही इस्तेमाल किया जाएगा।
इको-फ्रेंडली उत्सव और पॉलीथिन पर अंकुश
नगर पालिका प्रशासन ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे पर्यावरण के अनुकूल झांकियां सजाएं और प्लास्टिक का प्रयोग न करें। नगर पालिका अमानक पॉलीथिन के क्रय-विक्रय पर निरंतर निगरानी रख रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जा रही है। शहरवासियों से बायोडिग्रेडेबल पॉलीथिन को अपनाने की अपील की गई है, ताकि शहर को स्वच्छ और हरित बनाया जा सके।
स्वच्छता की पाठशाला में विद्यार्थियों को दी गई सीख
इस पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत, नगर पालिका की सहयोगी संस्था सिद्धिविनायक वेस्ट मैनेजमेंट ने सरस्वती शिशु मंदिर, पुरानी छावनी में 'स्वच्छता की पाठशाला' का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के अंतर्गत गीला और सूखा कचरा अलग रखने के महत्व के बारे में बताया गया। उन्हें 4-बिन व्यवस्था अपनाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
विद्यार्थियों को जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाने के उद्देश्य से इको-फ्रेंडली प्रतिमाएं स्थापित करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के अंत में, सभी विद्यार्थियों ने शहर को स्वच्छ बनाने और स्वच्छता नियमों का पालन करने की शपथ ली। यह पहल गुना को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो जन-भागीदारी से ही संभव हो सकेगा।
