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गुना में पर्यूषण पर्व पर 'पाड़ाशाह और पारस पत्थर' नाटक का मंचन

गुना के पार्श्वनाथ बड़े जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व पर 'पाड़ाशाह और पारस पत्थर' नाटक का मंचन हुआ। वीर शासन ग्रुप ने भक्ति, संयम और...

Sep 20
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•संवाददाता: राजा हतम वेग
गुना में पर्यूषण पर्व पर 'पाड़ाशाह और पारस पत्थर' नाटक का मंचन

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 20 सितंबर 2026

गुना स्थित पार्श्वनाथ बड़े जैन मंदिर परिसर में पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के पावन अवसर पर एक अनूठे लोककथा आधारित नाटक 'पाड़ाशाह और पारस पत्थर' का भव्य मंचन किया गया। वीर शासन ग्रुप के तत्वाधान में विनर सोसायटी आर्ट एंड कल्चर द्वारा प्रस्तुत इस रंगमंचीय प्रस्तुति को देखने के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे, जो नाटक की कथा, संवाद और भावनात्मक प्रसंगों से गहराई से जुड़े रहे।

भक्ति, संयम और लोककल्याण का संदेश

यह नाटक केवल एक चमत्कारी पत्थर की कहानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्ति, करुणा, संयम, त्याग और लोककल्याण जैसे उच्च मानवीय मूल्यों की एक सशक्त रंगमंचीय अभिव्यक्ति है। नाटक का मुख्य पात्र पाड़ाशाह अपने श्रम, ईमानदारी और जीव मात्र के प्रति करुणा को जीवन का आधार बनाता है। अपने आराध्य के प्रति अटूट श्रद्धा से प्रेरित होकर, वह मंदिर निर्माण का संकल्प लेता है। नाटक में मंदिर को मात्र उपासना स्थल नहीं, बल्कि शांति, नैतिकता और सह-अस्तित्व का प्रतीक दर्शाया गया है।

राजा के दरबार और लोकमान्यता का चित्रण

नाटक में राजा के दरबार, दरबारी षड्यंत्रों, सत्ता के साथ संवाद और पारस पत्थर से जुड़ी लोकमान्यता को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। नाटक के लेखक और निर्देशक मधुर जैन हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रस्तुति किसी चमत्कार की कथा नहीं, बल्कि उस इंसान की कहानी है जो अपनी सरलता और नेकनीयती से समाज को नई दिशा दे सकता है।

आंतरिक चेतना को जगाने का लक्ष्य

प्रस्तुति का मूल संदेश यह रहा कि सच्चा पारस बाहर खोजने की वस्तु नहीं है, बल्कि वह मनुष्य की आंतरिक चेतना में निवास करता है। यह चेतना व्यक्ति को लोभ को त्याग में और क्रोध को क्षमा में बदलने की शक्ति प्रदान करती है। प्रभावशाली संवादों और अभिनेताओं के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक मंत्रमुग्ध रखा और उन्हें भीतर की चेतना जगाने का संदेश दिया।

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