गुना में नरवाई जलाने पर चार किसानों पर 12,500 का जुर्माना
गुना जिले के झागर और धाननखेड़ी गांवों में कृषि व राजस्व विभाग ने संयुक्त कार्रवाई कर नरवाई जलाने वाले चार किसानों पर कुल 12,500 रुपये...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 18 अक्टूबर 2026
गुना जिले में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशों के अनुपालन में, कृषि और राजस्व विभाग के संयुक्त अमले ने ग्राम झागर और धाननखेड़ी में ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए चार किसानों पर कुल 12,500 रुपये का जुर्माना ठोका है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल अवशेष जलाने के गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्यगत दुष्परिणामों के प्रति सचेत करना है।
इस अभियान के तहत, ग्राम झागर निवासी शिवम पुत्र ओमप्रकाश किरार पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, ग्राम धाननखेड़ी के गोपाल पुत्र सीताराम, संतोष पुत्र विजय और जगदीश पुत्र राधेकिशन पर प्रति किसान 2,500 रुपये के हिसाब से अर्थदंड लगाया गया है। इन किसानों को फसल कटाई के बाद बचे हुए ठूंठ (नरवाई) को जलाने का दोषी पाया गया, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि वायु प्रदूषण भी बढ़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
पर्यावरण संरक्षण हेतु संयुक्त अभियान
यह संयुक्त अभियान बमोरी के तहसीलदार देवदत्त गोलिया, उपसंचालक कृषि संजीव शर्मा, राजस्व निरीक्षक कालूराम मीना और एईओ निर्मल पंथी के नेतृत्व में चलाया गया। राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारी इस दौरान मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नरवाई जलाने जैसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अभियान विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित था जहां ऐसे मामले अधिक देखे जा रहे थे, ताकि एक निवारक प्रभाव पैदा किया जा सके।
कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों ने किसानों के साथ संवाद कर उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे उसकी उर्वरा शक्ति पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके अतिरिक्त, आग लगने से आस-पास के क्षेत्रों में भी नुकसान का खतरा बना रहता है।
किसानों से वैकल्पिक उपायों की अपील
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी खेतों में बची हुई नरवाई को जलाने की बजाय, इसके प्रबंधन के लिए सुझाए गए वैकल्पिक और पर्यावरण-अनुकूल उपायों को अपनाएं। इन उपायों में पराली को खेत में ही जुताई के माध्यम से मिलाना, जिससे वह खाद का रूप ले ले, कंपोस्ट खाद बनाना, या अन्य वैज्ञानिक तरीके जैसे कि हैप्पी सीडर का उपयोग शामिल हो सकते हैं। विभाग ने जोर दिया कि ऐसे उपाय न केवल पर्यावरण की रक्षा करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी बनाए रखने में सहायक होते हैं, जिससे दीर्घकाल में फसल उत्पादन में वृद्धि हो सकती है।
प्रशासन का लक्ष्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को पूर्णतः रोकना और किसानों को स्थायी कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित करना है। इस दिशा में, विभाग द्वारा समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाने की भी योजना है, ताकि किसानों को आधुनिक और पर्यावरण-हितैषी कृषि तकनीकों से परिचित कराया जा सके। यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि नरवाई प्रबंधन एक स्थायी प्रथा बने।
