गुना में ध्वनि प्रदूषण पर कड़े प्रतिबंध, रात 10 बजे से लाउडस्पीकर वर्जित
गुना में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश। कलेक्टर ने रात 10 से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर व डीजे के सार्वजनिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाया। आदेश...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 14 सितंबर 2026
गुना जिले में ध्वनि प्रदूषण पर अंकुश लगाने और आम जनता को शांतिपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट किशोर कुमार कन्याल ने एक विस्तृत आदेश जारी करते हुए संपूर्ण जिले में रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के सार्वजनिक उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह प्रतिबंध आगामी 11 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा, जिसका उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण को कम करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है।
यह निर्णय पुलिस अधीक्षक द्वारा दी गई रिपोर्ट और उनके परामर्श के आधार पर लिया गया है। आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम 2000 के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सड़कों, चौराहों तथा सार्वजनिक मार्गों पर किसी भी प्रकार के डीजे का संचालन पूर्णतः वर्जित रहेगा।
डीजे और लाउडस्पीकर के उपयोग हेतु निर्धारित नियम
नए निर्देशों के अनुसार, डीजे का उपयोग केवल विधिवत अनुमत मैरिज गार्डन या किसी बंद परिसर के भीतर ही किया जा सकेगा। इसके लिए निर्धारित डेसीबल सीमा और समय-सीमा का पालन अनिवार्य होगा। किसी भी गली या मोहल्ले में, चाहे वह सार्वजनिक हो या निजी, ध्वनि विस्तारक यंत्रों का स्थिर रूप से उपयोग किसी भी समय मान्य नहीं होगा। यह प्रतिबंध सभी प्रकार के सार्वजनिक आयोजनों, जिनमें विवाह समारोह, जुलूस, शोभायात्राएं और त्यौहार शामिल हैं, पर समान रूप से लागू होगा। प्रशासन का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसे आयोजनों से आम जनजीवन प्रभावित न हो।
उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान
जिला प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन आदेशों का पालन नहीं करती है, तो उनके डीजे सिस्टम, लाउडस्पीकर, जनरेटर सेट और संबंधित वाहनों को तत्काल जब्त कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम आयोजित करने वाले स्थल, जैसे कि मैरिज गार्डन, को भी सील करने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले ऐसे आयोजनों के लिए कार्यक्रम के आयोजक, स्थल के स्वामी और डीजे संचालक, इन तीनों को संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। बिजली आपूर्ति प्रदान करने वाले व्यक्तियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
डेसीबल सीमाओं का निर्धारण और दंडनीय प्रावधान
प्रशासन द्वारा ध्वनि मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए डेसीबल सीमाएं निर्धारित की गई हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में दिन के दौरान 75 डेसीबल और रात में 70 डेसीबल की अधिकतम सीमा तय की गई है। वाणिज्यिक क्षेत्रों के लिए यह सीमा दिन में 65 और रात में 55 डेसीबल होगी। आवासीय क्षेत्रों में दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल की अनुमति होगी। वहीं, शांत क्षेत्रों, जैसे कि अस्पताल या शैक्षणिक संस्थानों के आसपास, में दिन में 50 और रात में 40 डेसीबल से अधिक ध्वनि की अनुमति नहीं होगी। कलेक्टर कन्याल ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर दंडनीय कार्रवाई की जाएगी। बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले मैरिज गार्डन संचालकों की अनुमति रद्द करने जैसे कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं।
