गुना में बस किराया वृद्धि का छात्रों का उग्र विरोध, मुफ्त पास की मांग
गुना में छात्र संगठन डीएसओ ने बस किराए में हुई वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने तत्काल वृद्धि वापस लेने और छात्रों के लिए मुफ्त...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 25 सितंबर 2026
गुना के अंबेडकर चौराहे पर छात्र संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (डीएसओ) ने हाल ही में बस किराए में की गई वृद्धि के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रशासन से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने और सभी के लिए मुफ्त बस पास की सुविधा बहाल करने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यह किराया वृद्धि छात्रों, मजदूरों और नियमित यात्रियों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ डाल रही है, खासकर उन लोगों पर जो ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में दैनिक आवागमन करते हैं।
छात्र नेताओं अमित और रोहित अहिरवार ने बताया कि 5 अगस्त को लागू किए गए नए नियमों के तहत, साधारण बसों का किराया प्रति किलोमीटर 1.25 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम किराया अब 10 रुपये निर्धारित किया गया है। जिला अध्यक्ष शुभम राव ने बताया कि सामान्य बसों में रात्रि के समय 10 प्रतिशत अतिरिक्त किराया वसूला जा रहा है। डीलक्स और एसी बसों के किराए में भी बढ़ोतरी की गई है। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक बोझ, जो पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे आम परिवारों के लिए असहनीय है, अब शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों के भविष्य पर भी संकट पैदा कर रहा है।
ग्रामीण छात्रों पर परिवहन का अत्यधिक बोझ
शहर के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में लगभग 15,000 छात्र पंजीकृत हैं, लेकिन कॉलेज की बस सुविधा अपर्याप्त है, जिसमें केवल एक बस उपलब्ध है। कॉलेज प्रबंधन छात्रों से प्रतिवर्ष 365 रुपये शुल्क लेता है, जिसे छात्र नेताओं ने अपर्याप्त बताया है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन लगभग 300 रुपये तक किराए के रूप में खर्च करने पड़ रहे हैं। शैक्षणिक खर्चों के साथ-साथ परिवहन के बढ़ते दामों ने कई विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ बना दिया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर गहरी चिंता व्याप्त है।
छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया और किराया वृद्धि वापस नहीं ली गई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह विरोध छात्रों के शैक्षणिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा की मांग को रेखांकित करता है।
