गुना में अघोषित बिजली कटौती: किसानों की मुसीबत बढ़ी, विधायक ने CM को लिखा पत्र
गुना जिले में अघोषित बिजली कटौती से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। विधायक ऋषि अग्रवाल ने सीएम से तत्काल समाधान की मांग की है, अन्यथा आंदोलन की...

द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 28 जुलाई 2026
गुना जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत विभाग द्वारा की जा रही अघोषित बिजली कटौती ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दिन में रखरखाव और रात में लोड शेडिंग के नाम पर घंटों की बिजली गुल रहने से ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर बमौरी विधायक ऋषि अग्रवाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। विधायक ने ऊर्जा मंत्री और क्षेत्रीय सांसद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी समस्या से अवगत कराया है।
विधायक ऋषि अग्रवाल ने अपने पत्र में रेखांकित किया है कि गुना जिले की 33 केवीए और 11 केवीए विद्युत लाइनों पर दिन-रात अनियोजित कटौती जारी है। इसका सर्वाधिक खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खरीफ सीजन में पहले से ही कम बारिश और खाद की किल्लत से परेशान किसानों को सरकार द्वारा घोषित 10 घंटे की कृषि पंप बिजली आपूर्ति भी नसीब नहीं हो पा रही है। सिंचाई बाधित होने से धान, सोयाबीन, मक्का और उड़द जैसी महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन पर गहरा संकट मंडरा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
किसानों पर दोहरी मार: सिंचाई ठप, फसलें बर्बाद
सरकार की घोषणा के अनुसार, आबादी वाले क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जानी थी। परंतु, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विभाग द्वारा दिन में मेंटेनेंस और रात में लोड सेटिंग का बहाना बनाकर बिजली कटौती जारी रखी जा रही है। इस अव्यवस्था का सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ रहा है। कम बारिश के इस मौसम में, जहां किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली की आवश्यकता है, वहीं घंटों की कटौती उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है। फसलों की जीवनरेखा कही जाने वाली बिजली की अनुपलब्धता से न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी, बल्कि प्रदेश की खाद्य सुरक्षा पर भी प्रश्नचिन्ह लग सकता है।
ग्रामीणों का जीना दूभर, स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित
बिजली की अनिश्चित कटौती का प्रभाव केवल किसानों तक ही सीमित नहीं है। भीषण गर्मी और उमस के इस दौर में, बिजली न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। छोटे बच्चों और महिलाओं को मच्छरों व कीट-पतंगों के प्रकोप से जूझना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। विशेष रूप से रात के अंधेरे में सर्पदंश और जहरीले जीवों के काटने की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।
सर्पदंश से बच्चों की मौत, विधायक ने चेताया
चिंताजनक पहलू यह है कि इस गंभीर समस्या के चलते हाल ही में बमौरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम विष्णुपुरा में 13 वर्षीय देव अहिरवार और ग्राम डोंगरपुर में 12 वर्षीया संजना सहरिया की सर्पदंश से दुखद मौत हो चुकी है। ऐसी ही अन्य घटनाओं की सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। इन मौतों ने स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधायक ऋषि अग्रवाल ने पत्र में इन घटनाओं का हवाला देते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाने और अविलंब कार्रवाई की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
विधायक ऋषि अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में भोपाल विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को फोन पर भी समस्या से अवगत कराया है, जिन्होंने जल्द समाधान का आश्वासन दिया है। हालांकि, विधायक सरकार की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार ग्रामीण जनता को अंधेरे में जीने के लिए मजबूर कर रही है। विधायक ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि समस्या का तत्काल समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें जनता के साथ मिलकर धरना और आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।
